SSC GD Constable 5 February 2025 · Shift 2 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 25 of 210
5 February 2025 · Shift 2
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
‘मैं बीमार हूँ, इसलिए कार्यालय नहीं जा सकता।’ निम्नलिखित विकल्पों में से इस वाक्य के लिए कौन-सा एक उचित सरल वाक्य होगा?
A.मैं कार्यालय नहीं जा सका बीमारी के कारण।
B.बीमार होने के कारण मैं कार्यालय नहीं जा सका।
C.मैं बीमार था इसलिए कार्यालय नहीं जा सका।
D.मैं नहीं जा सका बीमारी होने के कारण।
Solution
वाक्य-रूपांतरण (सरल वाक्य)
जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो, अर्थात् एक ही मुख्य क्रिया हो, उसे सरल वाक्य कहते हैं।
विकल्प (b) में 'बीमार होने के कारण' केवल कारण बताने वाला पदबंध है, कोई स्वतंत्र उपवाक्य नहीं; मुख्य क्रिया एक ही है - 'नहीं जा सका'। अतः यह सरल वाक्य है।
विकल्प (c) में 'इसलिए' योजक से दो स्वतंत्र उपवाक्य ('मैं बीमार था' तथा 'कार्यालय नहीं जा सका') जुड़े हैं, इसलिए वह संयुक्त वाक्य है, सरल नहीं।
विकल्प (a) और (d) में कारण-सूचक अंश क्रिया के बाद रख दिया गया है, जिससे हिंदी का स्वाभाविक पदक्रम (कर्ता-कर्म-क्रिया) टूट जाता है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
82
वाक्य के रेखांकित शब्दों के आधार पर बताइए कि किस विकल्प में पुल्लिंग शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है-
A.पुराने पीपल के पेड़ पर चुड़ैल रहती है यह अच्छा मजाक है।
B.राजा-रजवाड़े चाँदी के बर्तनों में खाना खाते थे।
C.मेरी मौसी की माला टूट गई।
D.नदी की धारा बहती है।
Solution
लिंग-निर्णय
किसी संज्ञा का लिंग उसके साथ आने वाले विशेषण और क्रिया के रूप से पहचाना जाता है।
विकल्प (b) में परखा जाने वाला शब्द 'चाँदी' है, जो नित्य स्त्रीलिंग संज्ञा है - 'चाँदी चमकती है', 'शुद्ध चाँदी'; अतः इसी विकल्प में पुल्लिंग शब्द का प्रयोग नहीं हुआ।
विकल्प (a) में 'मजाक' पुल्लिंग है, जिसका प्रमाण उसका पुल्लिंग विशेषण-रूप है - 'यह अच्छा मजाक है' ('अच्छी' नहीं)।
स्मरण रखें - धातुओं में 'सोना', 'ताँबा' और 'लोहा' पुल्लिंग हैं, जबकि 'चाँदी' स्त्रीलिंग; यही युग्म परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
83
‘माली ने पौधों को पानी देने से मना कर दिया।’ सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर वाक्य के रेखांकित अंश को बदलें-
A.सींचने
B.पानी गिराने
C.पानी उड़ेलने
D.भिगोने
Solution
उपयुक्त क्रिया-चयन
'पौधों को पानी देना' - इस पूरी क्रिया के लिए हिंदी में एक ही सटीक शब्द है : 'सींचना'।
अतः रेखांकित अंश के स्थान पर 'सींचने' रखने पर वाक्य बनेगा - 'माली ने पौधों को सींचने से मना कर दिया।'
'पानी गिराने' में पानी के व्यर्थ गिर जाने का भाव है और 'पानी उड़ेलने' में एक साथ बहुत-सा पानी डाल देने का - दोनों सिंचाई का अर्थ नहीं देते।
'भिगोने' में केवल गीला कर देने का भाव है, जो पौधों की नियमित सिंचाई से भिन्न है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
84
दिए गए वाक्य में त्रुटि पहचानें। दूध में थोड़ा पड़ गया है।
A.थोड़ा
B.दूध
C.पड़
D.गया
Solution
वाक्य-शुद्धि (सर्वनाम)
'थोड़ा' परिमाणवाचक विशेषण है, और विशेषण अकेले कर्ता या कर्म के स्थान पर नहीं आ सकता - उसके साथ कोई संज्ञा आवश्यक है।
यहाँ 'दूध में क्या पड़ गया' - इसका उत्तर देने वाला कोई संज्ञा-पद वाक्य में है ही नहीं; अतः यहाँ अनिश्चयवाचक सर्वनाम 'कुछ' चाहिए।
शुद्ध वाक्य - 'दूध में कुछ पड़ गया है।'
'दूध' (कारक-रूप सहित), 'पड़' और 'गया' अपने-अपने स्थान पर शुद्ध हैं, अतः त्रुटि केवल 'थोड़ा' में है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
85
‘अपने को धोखा देने वाला’ वाक्यांश के लिए इनमें से उपयुक्त शब्द कौन-सा है?
A.आत्मश्लाघा
B.आत्मवंचक
C.आत्मपीड़क
D.आत्मवादी
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
'वंचना' का अर्थ है ठगना या धोखा देना; अतः 'आत्मवंचक' = अपने-आप को धोखा देने वाला - यही दिए गए वाक्यांश का अर्थ है।
आत्मश्लाघा = अपनी ही प्रशंसा करना (ऐसा करने वाले व्यक्ति के लिए शब्द 'आत्मश्लाघी' है, 'आत्मश्लाघा' तो भाववाचक संज्ञा है)।
आत्मपीड़क = जो स्वयं को कष्ट या पीड़ा पहुँचाए।
आत्मवादी = आत्मा के अस्तित्व को मानने वाला।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
86
ईश्वर में विश्वास न रखने वालों को समाज नास्तिक कहता है। वाक्य में प्रयुक्त नास्तिक का विलोमार्थी शब्द है-
A.आस्तिक
B.अनासक्त
C.विश्वासपात्र
D.नास्तिक
Solution
विलोम शब्द
'नास्तिक' शब्द 'न + अस्ति' से बना है, जिसका अर्थ है - जो ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास न रखता हो।
इसका ठीक विलोम 'आस्तिक' है - जो ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखता हो।
अनासक्त = मोह और लगाव से रहित (इसका विलोम 'आसक्त' है); विश्वासपात्र = जिस पर भरोसा किया जा सके (इसका विलोम 'विश्वासघाती' है)।
विकल्प (d) में वही शब्द 'नास्तिक' दोहरा दिया गया है, और कोई शब्द अपना विलोम स्वयं नहीं हो सकता।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
87
‘अपने स्थान पर अचल रहने वाला’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द इनमें से कौन-सा है?
A.बुध
B.ध्रुव
C.मंगल
D.शुक्र
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
'अपने स्थान पर अचल रहने वाला' - इसके लिए एक शब्द है 'ध्रुव', जिसका अर्थ ही है स्थिर, अटल और अचल।
ध्रुव तारा आकाश में अपने स्थान से नहीं हटता, इसी कारण अटल रहने वाले के लिए यह शब्द रूढ़ हो गया।
बुध = सूर्य के सर्वाधिक निकट का ग्रह; मंगल = लाल ग्रह; शुक्र = भोर का तारा कहलाने वाला ग्रह।
ये तीनों ग्रह हैं, जो निरंतर सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं, अर्थात् गतिशील हैं - अचल नहीं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
88
निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और वाक्य में प्रयुक्त त्रुटिपूर्ण शब्द की पहचान करें। कहानी हमारे व्यक्तित्व को एक दर्पण की भांति हमारे सामने प्रेशित करती है।
A.प्रेशित
B.दर्पण
C.कहानी
D.व्यक्तित्व
Solution
वर्तनी-शुद्धि
वाक्य में प्रयुक्त 'प्रेशित' अशुद्ध है; इसकी शुद्ध वर्तनी 'प्रेषित' है, जिसका अर्थ है - भेजा हुआ (इसी से 'प्रेषण', 'प्रेषक' बनते हैं)।
शुद्ध वाक्य - 'कहानी हमारे व्यक्तित्व को एक दर्पण की भाँति हमारे सामने प्रेषित करती है।'
'दर्पण', 'कहानी' और 'व्यक्तित्व' - तीनों शब्दों की वर्तनी शुद्ध है।
ध्यान रखें - 'श' और 'ष' का भेद : प्रेषित, विशेष, शेष; 'प्रेशित' जैसा कोई शब्द हिंदी में है ही नहीं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
89
निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान कर शुद्ध वाक्य का चयन करें-गर्मियों में हम शिमला घुमने जाएंगे।
A.गर्मी में हम शिमला घुमने जाएंगे।
B.गर्मी में हम शिमला घूमने जाएंगे।
C.गर्मियों में हम शिमला पर घूमने जाएंगे।
D.गर्मियों में हम शिमला घूमने जाएंगे।
Solution
वाक्य-शुद्धि (वर्तनी)
वाक्य की एकमात्र अशुद्धि 'घुमने' में है; 'घूमना' धातु में दीर्घ 'ऊ' है, अतः शुद्ध रूप 'घूमने' होगा।
शेष अंश 'गर्मियों में हम शिमला ... जाएंगे' शुद्ध है, इसलिए केवल वर्तनी सुधारने पर शुद्ध वाक्य बनेगा - 'गर्मियों में हम शिमला घूमने जाएंगे।'
(a) में अशुद्ध रूप 'घुमने' ज्यों-का-त्यों रह गया है, अतः वह शुद्ध वाक्य हो ही नहीं सकता।
(b) में 'गर्मियों' को अनावश्यक रूप से 'गर्मी' कर दिया गया है, और (c) में 'शिमला पर' परसर्ग अशुद्ध है - स्थान के लिए 'शिमला घूमने जाना' ही शुद्ध प्रयोग है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
90
कौन-सा शब्द ‘वसंत’ का विलोम है?
A.मुखर
B.पतझरा
C.साकार
D.पुरस्कार
Solution
विलोम शब्द
'वसंत' वह ऋतु है जिसमें वृक्ष नए पत्तों और फूलों से भर जाते हैं; इसका विलोम वह ऋतु होगी जिसमें पत्ते झड़ जाते हैं - 'पतझरा' (पतझड़)।
मुखर = बोलने वाला, वाचाल; इसका विलोम 'मौन' है।
साकार = आकार वाला, मूर्त; इसका विलोम 'निराकार' है।
पुरस्कार = अच्छे कार्य पर मिलने वाला इनाम; इसका विलोम 'दंड' है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
91
‘समतल’ के लिए उपयुक्त विलोम शब्द है-
A.ढाल
B.सीधा
C.समान
D.धरती
Solution
विलोम शब्द
'समतल' का अर्थ है बराबर, बिना ऊँच-नीच वाली सतह; इसका विलोम वह भूमि होगी जो एक ओर झुकी हो - 'ढाल'।
'सीधा' और 'समान' तो 'समतल' के निकट अर्थ वाले शब्द हैं, विलोम नहीं - ये उसी भाव को दोहराते हैं।
'धरती' केवल भूमि का नाम है; इसमें ऊँच-नीच या समतलता का कोई विरोधी भाव है ही नहीं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
92
‘मेरी किताब मेरी मित्र प्रिया के पास है।’ वाक्य में प्रयुक्त कौन-सा शब्द विदेशज है?
A.प्रिया
B.मित्र
C.पास
D.किताब
Solution
शब्द-स्रोत (विदेशज)
विदेशज (आगत) शब्द वे हैं जो अरबी, फ़ारसी, तुर्की, अंग्रेज़ी आदि विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए हैं।
'किताब' अरबी भाषा का शब्द है, अतः वाक्य में यही विदेशज शब्द है।
'प्रिया' और 'मित्र' संस्कृत से ज्यों-के-त्यों लिए गए तत्सम शब्द हैं।
'पास' संस्कृत के 'पार्श्व' से विकसित तद्भव शब्द है, विदेशज नहीं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
93
निम्नांकित मुहावरे के रिक्त स्थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शब्द कौन-सा है? अपनी खिचड़ी अलग ____।
A.पीना
B.खाना
C.बनाना
D.पकाना
Solution
मुहावरा
मुहावरा है - 'अपनी खिचड़ी अलग पकाना', जिसका अर्थ है सबसे अलग-थलग रहकर अपनी मनमानी करना।
मुहावरे का रूप निश्चित होता है; उसके किसी शब्द को बदल देने पर वह मुहावरा नहीं रह जाता, चाहे वाक्य बन ही क्यों न जाए।
इसीलिए 'पीना', 'खाना' या 'बनाना' रखने पर केवल सामान्य वाक्य बनेगा, मुहावरे का लाक्षणिक अर्थ नष्ट हो जाएगा।
प्रयोग - 'वह किसी की सुनता ही नहीं, हमेशा अपनी खिचड़ी अलग पकाता है।'
इसलिए सही विकल्प (d) है।
94
‘परलोक’ का विलोम शब्द है-
A.पारलौकिक
B.इहलोक
C.सांसारिक
D.अलौकिक
Solution
विलोम शब्द
'परलोक' का अर्थ है मृत्यु के बाद का लोक; 'इह' का अर्थ है 'यहाँ', अतः 'इहलोक' = यह लोक, वर्तमान संसार - यही 'परलोक' का सही विलोम है।
'पारलौकिक' तो 'परलोक' का ही विशेषण रूप है (परलोक से संबंधित), विलोम नहीं; इसका विलोम 'ऐहिक/लौकिक' होगा।
'सांसारिक' = संसार से संबंधित, जिसका विलोम 'आध्यात्मिक' है।
'अलौकिक' = जो इस लोक का न हो, जिसका विलोम 'लौकिक' है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
95
‘मुझे आये इतनी देर हो गयी, अब तक ____।’ उपर्युक्त वाक्य पूर्ण करने के लिए उचित सार्थक और निरर्थक शब्द-युग्म वाले विकल्प का चयन करें-
A.किसी ने पानी-शरबत भी नहीं दिया।
B.किसी ने चाय-बिस्कुट तक नहीं मिला।
C.किसी ने चाय-वाय भी नहीं पूछा।
D.किसी ने दाना-पानी भी नहीं पूछा।
Solution
सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म
प्रश्न में ऐसा युग्म चाहिए जिसका पहला शब्द सार्थक हो और दूसरा निरर्थक - अर्थात् अनुकरणवाची, जो केवल 'आदि/वगैरह' का भाव देता हो।
'चाय-वाय' में 'चाय' सार्थक है और 'वाय' निरर्थक; अतः वाक्य बनेगा - 'मुझे आये इतनी देर हो गयी, अब तक किसी ने चाय-वाय भी नहीं पूछा।'
'पानी-शरबत', 'चाय-बिस्कुट' और 'दाना-पानी' - इन तीनों युग्मों में दोनों ही शब्द सार्थक हैं, अतः ये सार्थक-निरर्थक युग्म नहीं हैं।
इसके अतिरिक्त (b) में वाक्य-रचना भी अशुद्ध है - 'किसी ने ... नहीं मिला' में कर्ता और क्रिया का मेल नहीं बैठता।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हमारा यह ...(76) नीरस नहीं है उसके ज्ञान-विज्ञान का ...(76) विशाल है। उसके खोजों और भावावेग से प्रेरणा का समुद्र लहरा रहा है। यह हमारा परम सौभाग्य है कि जड़ तत्वों के इतने ...(77) हमारी साधना के लिए देश के ...(77) में बिखरे पड़े हैं। अन्य किसी भी देश को शायद ही इतनी परिपूर्ण साधन-सामग्री प्राप्त हो। यदि हम ...(78) के साथ इस संपूर्ण सामग्री का उपयोग ...(78) के लिए करें, तभी कल्याण है। केवल इन सामग्रियों को लक्ष्य मान लेना गलती है। इनके ...(79) से सिद्ध नहीं मिलेगी, यद्यपि इनकी सूक्ष्म और ...(79) जानकारी परम आवश्यक है। प्राचीनता का अध्ययन ...(80) है। उसमें पग-पग पर सावधानी की आवश्यकता है, प्रतिक्षण अपने लक्ष्य को याद रखने की आवश्यकता है और सदैव-सदैव कठोर ...(80) साहस की होना जरूरी है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.विश्व/नाटक
B.देश/इतिहास
C.भारत/अकारण
D.नियति/दशा
Solution
गद्यांश : रिक्त स्थान
पहला रिक्त स्थान 'हमारा यह ...(76) नीरस नहीं है' में है, अतः वहाँ ऐसी पुल्लिंग संज्ञा चाहिए जिसे 'हमारा यह' कहा जा सके - 'देश'।
दूसरा रिक्त स्थान 'ज्ञान-विज्ञान का ...(76) विशाल है' में है, जहाँ 'का' और 'विशाल है' से मेल खाती पुल्लिंग संज्ञा 'इतिहास' ही उपयुक्त है।
(a) 'नाटक' और (c) 'अकारण' - 'ज्ञान-विज्ञान का' के साथ अर्थ ही नहीं देते; 'अकारण' तो अव्यय है, संज्ञा भी नहीं।
(d) में 'दशा' स्त्रीलिंग है, अतः 'विशाल है' से व्याकरणिक मेल भी नहीं बैठता।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हमारा यह ...(76) नीरस नहीं है उसके ज्ञान-विज्ञान का ...(76) विशाल है। उसके खोजों और भावावेग से प्रेरणा का समुद्र लहरा रहा है। यह हमारा परम सौभाग्य है कि जड़ तत्वों के इतने ...(77) हमारी साधना के लिए देश के ...(77) में बिखरे पड़े हैं। अन्य किसी भी देश को शायद ही इतनी परिपूर्ण साधन-सामग्री प्राप्त हो। यदि हम ...(78) के साथ इस संपूर्ण सामग्री का उपयोग ...(78) के लिए करें, तभी कल्याण है। केवल इन सामग्रियों को लक्ष्य मान लेना गलती है। इनके ...(79) से सिद्ध नहीं मिलेगी, यद्यपि इनकी सूक्ष्म और ...(79) जानकारी परम आवश्यक है। प्राचीनता का अध्ययन ...(80) है। उसमें पग-पग पर सावधानी की आवश्यकता है, प्रतिक्षण अपने लक्ष्य को याद रखने की आवश्यकता है और सदैव-सदैव कठोर ...(80) साहस की होना जरूरी है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.उम्मीद/स्वास्थ्य
B.परिपूर्णसंचार/कोने-कोने
C.दूर/आसपास
D.आलोचना/सम्मान
Solution
गद्यांश : रिक्त स्थान
दूसरा रिक्त स्थान 'देश के ...(77) में बिखरे पड़े हैं' में है; 'देश के' के बाद स्थानवाचक पुनरुक्त शब्द 'कोने-कोने' ही बैठता है।
पहला रिक्त स्थान 'जड़ तत्वों के इतने ...(77)' में है, जहाँ 'इतने' विशेषण के साथ बहुवचन संज्ञा चाहिए - 'परिपूर्ण संचार' (अर्थात् संचित भंडार)।
(c) में 'देश के आसपास' कहने से अर्थ बदलकर 'देश के बाहर-भीतर' हो जाता है, जबकि गद्यांश देश के भीतर बिखरी सामग्री की बात कर रहा है।
(a) 'उम्मीद/स्वास्थ्य' और (d) 'आलोचना/सम्मान' प्रसंग से पूर्णतः असंगत हैं - यहाँ जड़ तत्वों की साधन-सामग्री की चर्चा है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हमारा यह ...(76) नीरस नहीं है उसके ज्ञान-विज्ञान का ...(76) विशाल है। उसके खोजों और भावावेग से प्रेरणा का समुद्र लहरा रहा है। यह हमारा परम सौभाग्य है कि जड़ तत्वों के इतने ...(77) हमारी साधना के लिए देश के ...(77) में बिखरे पड़े हैं। अन्य किसी भी देश को शायद ही इतनी परिपूर्ण साधन-सामग्री प्राप्त हो। यदि हम ...(78) के साथ इस संपूर्ण सामग्री का उपयोग ...(78) के लिए करें, तभी कल्याण है। केवल इन सामग्रियों को लक्ष्य मान लेना गलती है। इनके ...(79) से सिद्ध नहीं मिलेगी, यद्यपि इनकी सूक्ष्म और ...(79) जानकारी परम आवश्यक है। प्राचीनता का अध्ययन ...(80) है। उसमें पग-पग पर सावधानी की आवश्यकता है, प्रतिक्षण अपने लक्ष्य को याद रखने की आवश्यकता है और सदैव-सदैव कठोर ...(80) साहस की होना जरूरी है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.करुणा/दया
B.निष्ठा और प्रेम/भविष्य-निर्माण
C.श्रद्धा और भक्ति/प्रेम
D.असहज/संकुचित
Solution
गद्यांश : रिक्त स्थान
'यदि हम ...(78) के साथ' में ऐसी भाववाचक संज्ञा चाहिए जो कार्य करने की मनोवृत्ति बताए, और '...(78) के लिए करें' में वह लक्ष्य चाहिए जिसके लिए सामग्री का उपयोग हो।
'निष्ठा और प्रेम के साथ ... उपयोग भविष्य-निर्माण के लिए करें' - दोनों स्थान अर्थ और व्याकरण, दोनों दृष्टि से पूर्ण हो जाते हैं।
(c) में दूसरा शब्द 'प्रेम' है, जो कोई लक्ष्य नहीं बनता - सामग्री का उपयोग 'प्रेम के लिए' करना निरर्थक है।
(a) 'करुणा/दया' परस्पर पर्यायवाची हैं, जिससे वाक्य में पुनरुक्ति दोष आ जाता है; (d) 'असहज/संकुचित' विशेषण हैं, संज्ञा नहीं, अतः 'के साथ/के लिए' परसर्गों के साथ नहीं चल सकते।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हमारा यह ...(76) नीरस नहीं है उसके ज्ञान-विज्ञान का ...(76) विशाल है। उसके खोजों और भावावेग से प्रेरणा का समुद्र लहरा रहा है। यह हमारा परम सौभाग्य है कि जड़ तत्वों के इतने ...(77) हमारी साधना के लिए देश के ...(77) में बिखरे पड़े हैं। अन्य किसी भी देश को शायद ही इतनी परिपूर्ण साधन-सामग्री प्राप्त हो। यदि हम ...(78) के साथ इस संपूर्ण सामग्री का उपयोग ...(78) के लिए करें, तभी कल्याण है। केवल इन सामग्रियों को लक्ष्य मान लेना गलती है। इनके ...(79) से सिद्ध नहीं मिलेगी, यद्यपि इनकी सूक्ष्म और ...(79) जानकारी परम आवश्यक है। प्राचीनता का अध्ययन ...(80) है। उसमें पग-पग पर सावधानी की आवश्यकता है, प्रतिक्षण अपने लक्ष्य को याद रखने की आवश्यकता है और सदैव-सदैव कठोर ...(80) साहस की होना जरूरी है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.यहाँ/जहाँ
B.जैसा/निराला
C.कृपा/प्रतिभामान
D.ज्ञान-मात्र/ठीक-ठीक
Solution
गद्यांश : रिक्त स्थान
'इनके ...(79) से सिद्धि नहीं मिलेगी' - यहाँ ऐसा पद चाहिए जो 'केवल जानकारी भर' की सीमा बताए; 'ज्ञान-मात्र' में 'मात्र' यही सीमा सूचित करता है।
'इनकी सूक्ष्म और ...(79) जानकारी' में 'सूक्ष्म' के साथ जुड़ने वाला विशेषण चाहिए - 'ठीक-ठीक', अर्थात् यथार्थ और सही-सही।
(a) 'यहाँ/जहाँ' और (b) 'जैसा/निराला' दोनों स्थानों पर वाक्य-रचना में बैठते ही नहीं।
(c) में 'कृपा से सिद्धि नहीं मिलेगी' गद्यांश के तर्क के विपरीत है - लेखक कृपा की नहीं, केवल जानकारी की सीमा की बात कर रहा है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हमारा यह ...(76) नीरस नहीं है उसके ज्ञान-विज्ञान का ...(76) विशाल है। उसके खोजों और भावावेग से प्रेरणा का समुद्र लहरा रहा है। यह हमारा परम सौभाग्य है कि जड़ तत्वों के इतने ...(77) हमारी साधना के लिए देश के ...(77) में बिखरे पड़े हैं। अन्य किसी भी देश को शायद ही इतनी परिपूर्ण साधन-सामग्री प्राप्त हो। यदि हम ...(78) के साथ इस संपूर्ण सामग्री का उपयोग ...(78) के लिए करें, तभी कल्याण है। केवल इन सामग्रियों को लक्ष्य मान लेना गलती है। इनके ...(79) से सिद्ध नहीं मिलेगी, यद्यपि इनकी सूक्ष्म और ...(79) जानकारी परम आवश्यक है। प्राचीनता का अध्ययन ...(80) है। उसमें पग-पग पर सावधानी की आवश्यकता है, प्रतिक्षण अपने लक्ष्य को याद रखने की आवश्यकता है और सदैव-सदैव कठोर ...(80) साहस की होना जरूरी है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.किसने/महान
B.उत्तम शत-साधना/संयम और अपार
C.प्रकाशवान/सरल
D.उम्मीद की किरण/जागरता
Solution
गद्यांश : रिक्त स्थान
'प्राचीनता का अध्ययन ...(80) है' - आगे कहा गया है कि इसमें पग-पग पर सावधानी और प्रतिक्षण लक्ष्य-स्मरण चाहिए; अतः इसे कठिन तप बताने वाला पद 'उत्तम शत-साधना' ही उपयुक्त है।
अंतिम रिक्त स्थान 'सदैव-सदैव कठोर ...(80) साहस की होना जरूरी है' में है, जहाँ 'कठोर संयम और अपार साहस' - यह संज्ञा-युग्म ही वाक्य को पूरा करता है।
(a) 'किसने/महान' और (c) 'प्रकाशवान/सरल' दूसरे रिक्त स्थान पर 'कठोर ... साहस' के बीच व्याकरणिक रूप से बैठते ही नहीं।
(d) 'उम्मीद की किरण/जागरता' अर्थ की दृष्टि से असंगत है - अध्ययन को 'उम्मीद की किरण' कहना गद्यांश के भाव से मेल नहीं खाता।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
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