SSC GD Constable 10 February 2025 · Shift 3 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 75 of 210
10 February 2025 · Shift 3
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
निम्नलिखित में से किस पदार्थ का नाम स्त्रीलिंग में होता है?
A.पीतल
B.सोना
C.काँसा
D.चाँदी
Solution
धातुओं का लिंग-निर्णय
धातुओं के नामों का लिंग रूढ़ होता है, उसे प्रयोग से याद रखना पड़ता है।
‘चाँदी’ स्त्रीलिंग है - जैसे ‘चाँदी महँगी हो गई है।’
‘पीतल’, ‘सोना’ और ‘काँसा’ पुल्लिंग हैं - जैसे ‘सोना महँगा हो गया है।’
इसलिए सही विकल्प (d) है।
82
निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और बताएं कि प्रस्तुत विकल्पों में से कौन-सा विकल्प रेखांकित शब्द का विलोम शब्द है? इस व्यवहार की मैं निंदा करता हूँ।
A.स्तुति
B.दुःख
C.कृतघ्न
D.स्तूति
Solution
विलोम शब्द
‘निंदा’ का अर्थ है किसी की बुराई करना।
इसका विलोम ‘स्तुति’ है, जिसका अर्थ है प्रशंसा या गुणगान करना।
विकल्प (d) ‘स्तूति’ केवल वर्तनी का जाल है; शुद्ध रूप ‘स्तुति’ ही है।
‘दुःख’ (सुख का विलोम) और ‘कृतघ्न’ (कृतज्ञ का विलोम) का ‘निंदा’ से कोई संबंध नहीं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
83
निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान कर शुद्ध वाक्य का चयन करें। मजदूरी के इशारों पर बंदर करतब दिखा रहा था।
A.मजदूर के इशारों पर बंदर करतब दिखा रहा था।
B.मजदौर के इशारों पर बंदर करतब दिखा रहा था।
C.मदारी के इशारों पर बंदर करतब दिखा रहा था।
D.मदारी के इशारों पर बंदर करतब दिखा रही थी।
Solution
वाक्य-शुद्धि
वाक्य में ‘मजदूरी’ अशुद्ध है; बंदर से करतब दिखवाने वाले को ‘मदारी’ कहते हैं।
शुद्ध वाक्य - ‘मदारी के इशारों पर बंदर करतब दिखा रहा था।’
विकल्प (d) में शब्द तो शुद्ध है, पर ‘बंदर’ पुल्लिंग है, अतः ‘दिखा रही थी’ क्रिया अशुद्ध हो जाती है।
‘मजदूर’ और ‘मजदौर’ अर्थ की दृष्टि से वाक्य में बैठते ही नहीं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
84
‘इंद्रियों को वश में रखने वाला’ उपरोक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
A.इंद्रियातीत
B.इंद्राणी
C.इंद्रियानिग्रह
D.इंद्रियजित
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
जो अपनी इंद्रियों को वश में रखता हो, उसे ‘इंद्रियजित’ (जितेंद्रिय) कहते हैं।
वाक्यांश में ‘वाला’ आया है, अर्थात् व्यक्ति का बोध कराने वाला शब्द चाहिए।
‘इंद्रियानिग्रह’ इंद्रियों को वश में करने की क्रिया है, व्यक्ति नहीं; अतः वह उपयुक्त नहीं।
‘इंद्रियातीत’ = जो इंद्रियों की पहुँच से परे हो; ‘इंद्राणी’ = इंद्र की पत्नी।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
85
निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और रेखांकित शब्द का पर्यायवाची अर्थ लिखें। किसान इस बात से बेखबर थे कि उनका कोई पीछा करता है।
A.अनजानकार
B.गाफिल
C.लुप्त
D.बेनजीर
Solution
पर्यायवाची शब्द
‘बेखबर’ का अर्थ है - जिसे कुछ पता न हो, असावधान।
इसका पर्यायवाची ‘गाफिल’ है, जिसका अर्थ भी बेसुध या असावधान होता है।
‘लुप्त’ = गायब हो गया, ‘बेनजीर’ = अनुपम/बेमिसाल - दोनों का अर्थ भिन्न है।
‘अनजानकार’ कोई मानक शब्द नहीं है; शुद्ध रूप ‘अनजान’ होता है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
86
‘वरदान’ शब्द का विलोम क्या होगा?
A.वर
B.देय
C.अभिशाप
D.अनुदान
Solution
विलोम शब्द
‘वरदान’ का अर्थ है - देवता या किसी बड़े द्वारा दी गई कृपा।
इसका विलोम ‘अभिशाप’ है, अर्थात् शाप।
‘वर’ इसका समानार्थी अंश है, तथा ‘देय’ और ‘अनुदान’ विलोम नहीं हैं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
87
दिए गए वाक्य के अशुद्ध भाग का चयन कीजिए। सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी पढ़ने की किताबें निकालें।
A.अपनी-अपनी
B.निकालें
C.पढ़ने की किताबें
D.सभी विद्यार्थी
Solution
वाक्य का अशुद्ध अंश
वाक्य है - ‘सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी पढ़ने की किताबें निकालें।’
‘सभी’ बहुवचनवाचक विशेषण है, और ‘विद्यार्थी’ ईकारांत पुल्लिंग संज्ञा है, जिसका बहुवचन ‘गण’ जोड़कर बनता है।
अतः कर्ता ‘सभी विद्यार्थी’ के स्थान पर ‘सभी विद्यार्थीगण’ होना चाहिए।
शेष तीनों अंश शुद्ध हैं - ‘अपनी-अपनी’ (प्रत्येक की अलग-अलग), ‘पढ़ने की किताबें’ तथा आज्ञार्थक क्रिया ‘निकालें’।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
88
निम्नलिखित में से किस वाक्य में एक-दूसरे के उचित विलोम शब्द का प्रयोग नहीं है?
A.मैं उसका ऋणी अवश्य था परंतु अब उऋण हो गया।
B.सुधार नहीं होना चाहिए, धीर व्यक्ति ही सफल होते हैं।
C.अधीर नहीं होना चाहिए, धीर व्यक्ति ही सफल होते हैं।
D.परोक्ष नहीं होना चाहिए, प्रत्यक्ष व्यक्ति ही सफल होते हैं।
Solution
विलोम शब्दों का प्रयोग
प्रश्न यह पूछता है कि किस वाक्य में आमने-सामने रखे गए शब्द परस्पर विलोम नहीं हैं।
विकल्प (a) में ऋणी × उऋण, (c) में अधीर × धीर तथा (d) में परोक्ष × प्रत्यक्ष - तीनों उचित विलोम-युग्म हैं।
विकल्प (b) में ‘धीर’ के सामने ‘सुधार’ रखा गया है, जबकि ‘धीर’ का विलोम ‘अधीर’ और ‘सुधार’ का विलोम ‘बिगाड़’ होता है।
अतः इसी वाक्य में विलोम शब्दों का उचित प्रयोग नहीं हुआ है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
89
वर्तनी की दृष्टि से दिए गए वाक्य के त्रुटि वाले अंश को पहचानें- लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार विधायिका के प्रति उत्तरदाई होती है।
A.के प्रति उत्तरदाई
B.लोकतांत्रिक व्यवस्था में
C.सरकार विधायिका
D.होती है
Solution
वर्तनी शुद्धि
वाक्य में ‘उत्तरदाई’ की वर्तनी अशुद्ध है।
शुद्ध रूप ‘उत्तरदायी’ है (उत्तर + दायी = जवाबदेह)।
शुद्ध वाक्य - ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है।’
शेष अंश ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था में’, ‘सरकार विधायिका’ तथा ‘होती है’ वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
90
‘भेड़ चाल होना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
A.भेड़ के साथ चलना
B.भेड़ पालना
C.बिना विचार के अनुगामी होना
D.भेड़ चराना
Solution
मुहावरा
भेड़ें बिना सोचे-समझे आगे चलने वाली भेड़ के पीछे चल पड़ती हैं।
इसी से ‘भेड़ चाल होना’ मुहावरा बना - बिना विचार किए दूसरों का अनुकरण करना।
प्रयोग - ‘भेड़ चाल में पड़कर उसने भी वही पाठ्यक्रम चुन लिया।’
शेष विकल्प मुहावरे का शाब्दिक अर्थ देते हैं, जो मुहावरे में मान्य नहीं होता।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
91
रिक्त स्थान की पूर्ति सार्थक शब्द-युग्म से करें- जीवन में हमेशा ____ लगा ही रहता है।
A.अनाप-शनाप
B.राग-विराग
C.मेला
D.उखड़-खाबड़
Solution
शब्द-युग्म
रिक्त स्थान में ऐसा सार्थक शब्द-युग्म चाहिए जो ‘जीवन में हमेशा ____ लगा ही रहता है’ में ठीक बैठे।
‘राग-विराग’ का अर्थ है आसक्ति और विरक्ति; जीवन में ये दोनों भाव बने ही रहते हैं।
‘अनाप-शनाप’ (बेतुका/बेहिसाब) और ‘उखड़-खाबड़’ वाक्य के भाव से मेल नहीं खाते।
‘मेला’ शब्द-युग्म है ही नहीं, इसलिए प्रश्न की शर्त पूरी नहीं करता।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
92
‘जो किये जाने योग्य हो’ उपरोक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
A.कर्णनीय
B.अनुकरणीय
C.कारित
D.करणीय
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
‘जो किये जाने योग्य हो’ - उसके लिए एक शब्द ‘करणीय’ है।
यह ‘कृ’ धातु में ‘अनीय’ प्रत्यय लगाकर बना है, अर्थात् जो करने योग्य/कर्तव्य हो।
‘अनुकरणीय’ = जिसका अनुकरण किया जाए, ‘कारित’ = जो कराया गया हो।
‘कर्णनीय’ कोई मानक शब्द नहीं है, वह केवल वर्तनी का भ्रम है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
93
दिए गए वाक्यों के रेखांकित शब्दों के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य का चयन करें-
A.अपने स्वभाव में विनम्रता रखना उत्तम रीति है।
B.अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
C.शमा तो बहुत ही भोली है।
D.तुमने अच्छा काम किया है, तुम्हें शाबाशी मिलनी चाहिए।
Solution
भाववाचक संज्ञा
चारों वाक्यों के रेखांकित शब्दों को संज्ञा की दृष्टि से परखना है।
‘विनम्रता’, ‘अहंकार’ और ‘शाबाशी’ - तीनों भाववाचक संज्ञाएँ हैं।
‘भोली’ संज्ञा नहीं, गुणवाचक विशेषण है; इसकी भाववाचक संज्ञा ‘भोलापन’ होती है।
अतः संज्ञा की दृष्टि से वही वाक्य अशुद्ध ठहरता है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
94
तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की ____ चारों दिशाओं में फैली है। रिक्त स्थान की पूर्ति तत्सम शब्द द्वारा कीजिए।
A.कीरत
B.किरती
C.कीर्ति
D.किर्ती
Solution
तत्सम शब्द
रिक्त स्थान में ‘यश/प्रसिद्धि’ के अर्थ वाला तत्सम शब्द चाहिए।
तत्सम रूप ‘कीर्ति’ है, जिसका तद्भव रूप ‘कीरत’ होता है।
‘किरती’ और ‘किर्ती’ अशुद्ध वर्तनियाँ हैं।
पूर्ण वाक्य - ‘तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली है।’
इसलिए सही विकल्प (c) है।
95
निम्नलिखित वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द चुनिए- साथ-साथ पढ़ाई किए हुए
A.सहकर्मी
B.सहयात्री
C.सहभागी
D.सहपाठी
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
‘सह’ उपसर्ग का अर्थ है - साथ।
जो साथ-साथ पढ़ाई करे, उसे ‘सहपाठी’ कहते हैं।
‘सहकर्मी’ = साथ काम करने वाला, ‘सहयात्री’ = साथ यात्रा करने वाला, ‘सहभागी’ = साथ भाग लेने वाला।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गांधीजी ने दोनों को-प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर भारतीय अनुभव की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था। उन्होंने बाह्य को सिर्फ इसलिए नहीं नकारा कि वह हमारे जीवन का सांसारिक पहलू है, न ही वे अदृश्य से सिर्फ इसलिए सम्मोहित हुए कि उसमें सब-कुछ शाश्वत और पवित्र है, बल्कि उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखण्डित सत्य की तरह स्वीकार किया। वह हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें। वह अपने प्रयास में असफल नहीं हुए, हम ही उनकी संभावनाओं तक पहुँचने में असफल रहे, किन्तु जो विकल्प उन्होंने सुझाया था, वह आज भी उतना जीवित और गौरवपूर्ण है, जितना पहले था। वह भारतीय संस्कृति का स्वप्न है जिससे आज समूची मानव-जाति की नियति जुड़ी है। क्या समय रहते हम उसे चुनने का साहस जुटा पाएँगे?
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा?
A.भारतीय अनुभव
B.प्रत्यक्ष-परोक्ष
C.मानव-जाति
D.गांधी-मार्ग
Solution
गद्यांश - शीर्षक
शीर्षक वही उपयुक्त होता है जो पूरे गद्यांश के केंद्रीय भाव को समेट ले।
गद्यांश आरंभ से अंत तक गांधीजी की दृष्टि, उनके प्रयास और उनके सुझाए विकल्प पर केंद्रित है।
‘भारतीय अनुभव’, ‘प्रत्यक्ष-परोक्ष’ और ‘मानव-जाति’ गद्यांश के केवल अंश हैं, पूरा भाव नहीं।
यह पूरा भाव ‘गांधी-मार्ग’ शीर्षक में समाहित हो जाता है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गांधीजी ने दोनों को-प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर भारतीय अनुभव की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था। उन्होंने बाह्य को सिर्फ इसलिए नहीं नकारा कि वह हमारे जीवन का सांसारिक पहलू है, न ही वे अदृश्य से सिर्फ इसलिए सम्मोहित हुए कि उसमें सब-कुछ शाश्वत और पवित्र है, बल्कि उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखण्डित सत्य की तरह स्वीकार किया। वह हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें। वह अपने प्रयास में असफल नहीं हुए, हम ही उनकी संभावनाओं तक पहुँचने में असफल रहे, किन्तु जो विकल्प उन्होंने सुझाया था, वह आज भी उतना जीवित और गौरवपूर्ण है, जितना पहले था। वह भारतीय संस्कृति का स्वप्न है जिससे आज समूची मानव-जाति की नियति जुड़ी है। क्या समय रहते हम उसे चुनने का साहस जुटा पाएँगे?
गांधीजी ने दोनों को-प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर किस अनुभव की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था?
A.अमेरिकी अनुभव
B.यूरोपीय अनुभव
C.विदेशी अनुभव
D.भारतीय अनुभव
Solution
गद्यांश - तथ्य
उत्तर गद्यांश की पहली ही पंक्ति में है।
गांधीजी ने प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से और बाह्य को अंतर से जोड़कर ‘भारतीय अनुभव’ की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था।
अमेरिकी, यूरोपीय या विदेशी अनुभव का उल्लेख गद्यांश में कहीं नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गांधीजी ने दोनों को-प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर भारतीय अनुभव की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था। उन्होंने बाह्य को सिर्फ इसलिए नहीं नकारा कि वह हमारे जीवन का सांसारिक पहलू है, न ही वे अदृश्य से सिर्फ इसलिए सम्मोहित हुए कि उसमें सब-कुछ शाश्वत और पवित्र है, बल्कि उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखण्डित सत्य की तरह स्वीकार किया। वह हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें। वह अपने प्रयास में असफल नहीं हुए, हम ही उनकी संभावनाओं तक पहुँचने में असफल रहे, किन्तु जो विकल्प उन्होंने सुझाया था, वह आज भी उतना जीवित और गौरवपूर्ण है, जितना पहले था। वह भारतीय संस्कृति का स्वप्न है जिससे आज समूची मानव-जाति की नियति जुड़ी है। क्या समय रहते हम उसे चुनने का साहस जुटा पाएँगे?
समूचे भारतीय यथार्थ को एक ____ सत्य की तरह स्वीकार किया है। रिक्त स्थान को पूरा करें।
A.परोक्ष सत्य को
B.खण्डित सत्य को
C.अखण्डित सत्य को
D.प्रत्यक्ष सत्य को
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान
गद्यांश में लिखा है - ‘उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखण्डित सत्य की तरह स्वीकार किया।’
अतः रिक्त स्थान में ‘अखण्डित सत्य को’ ही आएगा।
‘खण्डित’ इसका विलोम है, तथा ‘परोक्ष’ और ‘प्रत्यक्ष’ गद्यांश के दूसरे प्रसंग के शब्द हैं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गांधीजी ने दोनों को-प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर भारतीय अनुभव की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था। उन्होंने बाह्य को सिर्फ इसलिए नहीं नकारा कि वह हमारे जीवन का सांसारिक पहलू है, न ही वे अदृश्य से सिर्फ इसलिए सम्मोहित हुए कि उसमें सब-कुछ शाश्वत और पवित्र है, बल्कि उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखण्डित सत्य की तरह स्वीकार किया। वह हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें। वह अपने प्रयास में असफल नहीं हुए, हम ही उनकी संभावनाओं तक पहुँचने में असफल रहे, किन्तु जो विकल्प उन्होंने सुझाया था, वह आज भी उतना जीवित और गौरवपूर्ण है, जितना पहले था। वह भारतीय संस्कृति का स्वप्न है जिससे आज समूची मानव-जाति की नियति जुड़ी है। क्या समय रहते हम उसे चुनने का साहस जुटा पाएँगे?
गांधीजी हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष में, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि क्या हो सके?
A.हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें।
B.हम इतिहास में अपनी संभावनाओं से जी सकें।
C.हम इतिहास में अपनी इच्छा से जी सकें।
D.हम इतिहास में अपने अतीत की तरह जी सकें।
Solution
गद्यांश - तथ्य
गद्यांश के अनुसार गांधीजी हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से और हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे।
इसका उद्देश्य था - ‘ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें।’
शेष विकल्पों में कही गई बातें गद्यांश में नहीं आई हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गांधीजी ने दोनों को-प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर भारतीय अनुभव की पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था। उन्होंने बाह्य को सिर्फ इसलिए नहीं नकारा कि वह हमारे जीवन का सांसारिक पहलू है, न ही वे अदृश्य से सिर्फ इसलिए सम्मोहित हुए कि उसमें सब-कुछ शाश्वत और पवित्र है, बल्कि उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखण्डित सत्य की तरह स्वीकार किया। वह हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें। वह अपने प्रयास में असफल नहीं हुए, हम ही उनकी संभावनाओं तक पहुँचने में असफल रहे, किन्तु जो विकल्प उन्होंने सुझाया था, वह आज भी उतना जीवित और गौरवपूर्ण है, जितना पहले था। वह भारतीय संस्कृति का स्वप्न है जिससे आज समूची मानव-जाति की नियति जुड़ी है। क्या समय रहते हम उसे चुनने का साहस जुटा पाएँगे?
‘प्रत्यक्ष’ शब्द में किस संधि का प्रयोग हुआ है?
A.यण स्वर संधि
B.दीर्घ स्वर संधि
C.गुण स्वर संधि
D.वृद्धि स्वर संधि
Solution
स्वर संधि
‘प्रत्यक्ष’ का संधि-विच्छेद है - प्रति + अक्ष।
यहाँ ‘इ’ के बाद असमान स्वर ‘अ’ आया है, अतः ‘इ’ के स्थान पर ‘य्’ हो गया - यही यण स्वर संधि है।
सूत्र: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।
दीर्घ संधि में समान स्वर मिलते हैं, गुण संधि में अ + इ = ए और वृद्धि संधि में अ + ए = ऐ होता है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
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