SSC GD Constable 25 February 2025 · Shift 2 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 205 of 210
25 February 2025 · Shift 2
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
‘गोदान’ प्रेमचंद की एक मशहूर ____ का नाम है। रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त विदेशी शब्द है-
A.किताब
B.ग्रंथ
C.उपन्यास
D.पुस्तक
Solution
विदेशी (आगत) शब्द
प्रश्न रिक्त स्थान के लिए ‘विदेशी शब्द’ माँगता है, अर्थात् वह शब्द जो किसी अन्य भाषा से हिंदी में आया हो - केवल अर्थ की दृष्टि से चयन नहीं करना है।
‘किताब’ अरबी भाषा से हिंदी में आया आगत शब्द है और वाक्य में भी सटीक बैठता है - ‘गोदान’ प्रेमचंद की एक मशहूर किताब का नाम है।
‘ग्रंथ’, ‘उपन्यास’ तथा ‘पुस्तक’ तीनों संस्कृत से आए तत्सम शब्द हैं, विदेशी नहीं; इसलिए सही विकल्प (a) है।
82
‘स्वधर्म’ का विलोम शब्द है-
A.अधर्म
B.परधर्म
C.अर्थम
D.कुधर्म
Solution
विलोम शब्द
‘स्वधर्म’ की रचना है - ‘स्व’ (अपना) + ‘धर्म’, अर्थात् अपना धर्म या अपना निजी कर्तव्य।
‘स्व’ का विलोम ‘पर’ (दूसरा) है, अतः ‘स्वधर्म’ का विलोम ‘परधर्म’ बनता है - गीता का प्रसिद्ध वचन भी है ‘स्वधर्मे निधनं श्रेयः, परधर्मो भयावहः’।
‘अधर्म’ ‘धर्म’ का विलोम है, ‘कुधर्म’ का अर्थ बुरा धर्म है और ‘अर्थम’ हिंदी का कोई मानक शब्द नहीं; इसलिए सही विकल्प (b) है।
83
निम्नलिखित में से अशुद्ध वाक्य का चयन कीजिए-
A.मेरे मित्र की पत्नी विद्वान है।
B.सच बोलना मोहन की आदत है।
C.श्याम की ससुराल जयपुर में है।
D.आत्मा अजर-अमर होती है।
Solution
वाक्य-शुद्धि (लिंग-दोष)
नियम - विशेषण अपने विशेष्य के लिंग के अनुसार चलता है; स्त्रीलिंग विशेष्य के साथ स्त्रीलिंग विशेषण ही आएगा।
‘पत्नी’ स्त्रीलिंग है, अतः उसके लिए पुल्लिंग विशेषण ‘विद्वान’ का प्रयोग अशुद्ध है; शुद्ध वाक्य होगा - ‘मेरे मित्र की पत्नी विदुषी है।’
शेष तीनों वाक्य - ‘सच बोलना मोहन की आदत है।’, ‘श्याम की ससुराल जयपुर में है।’ तथा ‘आत्मा अजर-अमर होती है।’ - व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हैं; इसलिए सही विकल्प (a) है।
84
आपके विद्यालय में परीक्षा-परीणाम कब तक घोषित होगा? ‘परीक्षा-परीणाम’ के स्थान पर उचित शब्द होगा-
A.परीक्षा-परिणाम
B.परीक्षा-परीणाम
C.परीक्षा परीणाम
D.परीक्षापरीणाम
Solution
शुद्ध वर्तनी
‘परिणाम’ शब्द ‘परि’ उपसर्ग से बना है और ‘परि’ में सदैव ह्रस्व ‘इ’ की मात्रा लगती है - परिवार, परिश्रम, परिचय, परिणाम।
अतः ‘परीक्षा-परीणाम’ की शुद्ध वर्तनी ‘परीक्षा-परिणाम’ है; ‘परीक्षा’ में दीर्घ ‘ई’ रहेगी, किंतु ‘परिणाम’ में ह्रस्व ‘इ’ ही आएगी।
विकल्प (b) वही अशुद्ध रूप दोहराता है तथा (c) और (d) केवल योजक-चिह्न घटा-बढ़ाकर उसी अशुद्ध ‘परीणाम’ को बनाए रखते हैं; इसलिए सही विकल्प (a) है।
85
दिए गए वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति उचित शब्द के द्वारा कीजिए-
हिमालय ____ का राजा है।
A.पर्वत माला
B.पर्वत छोटी
C.पर्वतों
D.पर्वत
Solution
वाक्य-पूर्ति (उचित शब्द)
वाक्य का भाव है कि हिमालय समस्त पर्वतों में सर्वश्रेष्ठ है; ‘राजा’ जिस समूह का होता है, वह समूह बहुवचन के संबंधकारक रूप में आता है।
अतः शुद्ध वाक्य बनेगा - ‘हिमालय पर्वतों का राजा है।’
‘पर्वत’ एकवचन होने से समूह का भाव नहीं देता, तथा ‘पर्वत माला’ और ‘पर्वत छोटी’ यहाँ अर्थ एवं व्याकरण दोनों दृष्टि से असंगत हैं; इसलिए सही विकल्प (c) है।
86
निम्नलिखित वाक्यों में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए-
राकेश घर बनवाया।
A.राकेश का घर बनवाया।
B.राकेश ने घर बनवाया।
C.राकेश की घर बनवाया।
D.राकेश से घर बनाया।
Solution
कारक - ‘ने’ परसर्ग
नियम - सकर्मक क्रिया के सामान्य भूतकाल में कर्ता के साथ ‘ने’ परसर्ग लगाना अनिवार्य होता है।
‘बनवाया’ सकर्मक क्रिया का भूतकालिक रूप है, अतः कर्ता ‘राकेश’ के साथ ‘ने’ आएगा - ‘राकेश ने घर बनवाया।’
‘का’ तथा ‘की’ संबंध कारक के चिह्न हैं, जो कर्ता के साथ नहीं लगते, और ‘राकेश से घर बनाया’ में कर्ता करण कारक बन जाने से वाक्य अशुद्ध हो जाता है; इसलिए सही विकल्प (b) है।
87
निम्नलिखित वाक्य के किस खंड में अशुद्धि है?
मैंने यह बात उनके द्वारा सुनी थी।
A.बात
B.मैंने
C.उनके द्वारा
D.सुनी
Solution
वाक्य-शुद्धि (कारक-प्रयोग)
‘द्वारा’ करण कारक का चिह्न है और उसका प्रयोग साधन बताने अथवा कर्मवाच्य में होता है, किसी से कोई बात सुनने के अर्थ में नहीं।
यहाँ बात सुनने का स्रोत बताना है, जिसके लिए अपादान का ‘से’ उपयुक्त है - शुद्ध वाक्य होगा ‘मैंने यह बात उनसे सुनी थी।’
‘मैंने’, ‘बात’ और ‘सुनी’ तीनों खंड वाक्य में शुद्ध हैं, अशुद्धि केवल ‘उनके द्वारा’ खंड में है; इसलिए सही विकल्प (c) है।
88
____ आदमी का इलाज किसी वैद्य ने नहीं किया। वाक्य के रिक्त स्थान के लिए विदेशी शब्द चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए।
A.गरीब
B.निर्धन
C.निराश
D.मूर्छित
Solution
विदेशी (आगत) शब्द
प्रश्न रिक्त स्थान के लिए विदेशी शब्द माँगता है, अर्थात् ऐसा शब्द जो किसी अन्य भाषा से हिंदी में आया हो।
‘गरीब’ (ग़रीब) अरबी भाषा से आया आगत शब्द है और वाक्य में भी सार्थक बैठता है - ‘गरीब आदमी का इलाज किसी वैद्य ने नहीं किया।’
‘निर्धन’, ‘निराश’ तथा ‘मूर्छित’ संस्कृत से आए तत्सम शब्द हैं; इसलिए सही विकल्प (a) है।
89
‘आराधना’ का उपयुक्त एकार्थक शब्द है-
A.तपस्या
B.परिश्रम
C.पढ़ाई
D.प्रेम
Solution
एकार्थक (समानार्थी) शब्द
‘आराधना’ का अर्थ है - इष्ट अथवा ईश्वर की भक्तिपूर्वक उपासना एवं साधना करना।
दिए गए विकल्पों में ‘तपस्या’ ही इसी भाव - साधना, उपासना, कठोर आराधना - को व्यक्त करता है, इसलिए यही ‘आराधना’ का एकार्थक शब्द है।
‘परिश्रम’ का अर्थ मेहनत, ‘पढ़ाई’ का अर्थ अध्ययन और ‘प्रेम’ का अर्थ स्नेह है, जो आराधना के अर्थ नहीं हैं; इसलिए सही विकल्प (a) है।
90
निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान करें।
इस जगत के कन-कन में ईश्वर विद्यमान हैं।
A.विद्यमान
B.ईश्वर
C.कन-कन
D.जगत
Solution
वर्तनी अशुद्धि
वाक्य का अभिप्राय है कि संसार के कण-कण अर्थात् प्रत्येक सूक्ष्म अंश में ईश्वर विद्यमान है।
‘कण’ (मूर्धन्य ‘ण’ के साथ) का अर्थ है सूक्ष्म अंश, जबकि ‘कन’ हिंदी का कोई सार्थक शब्द नहीं है; अतः वाक्य में ‘कन-कन’ वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है और उसका शुद्ध रूप ‘कण-कण’ होगा।
शेष तीनों शब्दों - ‘विद्यमान’, ‘ईश्वर’ और ‘जगत’ - की वर्तनी में कोई त्रुटि नहीं है; इसलिए सही विकल्प (c) है।
91
‘प्रख्यात’ का विलोम शब्द नहीं है-
A.कुख्यात
B.ख्यात
C.प्रसिद्ध
D.विख्यात
Solution
विलोम शब्द
प्रश्न उलटा पूछा गया है - बताना यह है कि कौन-सा शब्द ‘प्रख्यात’ का विलोम नहीं है।
‘प्रख्यात’ का अर्थ है बहुत प्रसिद्ध; इसका प्रचलित विलोम ‘कुख्यात’ है, अर्थात् बुरे कामों के लिए प्रसिद्ध - अतः विकल्प (a) विलोम है और उत्तर नहीं हो सकता।
‘ख्यात’ स्वयं ‘प्रख्यात’ का मूल शब्द है, जिसमें ‘प्र’ उपसर्ग जुड़ने से केवल अर्थ की तीव्रता बढ़ी है, अर्थ वही ‘प्रसिद्ध’ बना रहता है; इसलिए यह विलोम नहीं, सीधा पर्याय है।
‘प्रसिद्ध’ और ‘विख्यात’ भी अर्थ में इसके निकट पड़ते हैं, किंतु ‘ख्यात’ उसी शब्द का मूल रूप होने के कारण सबसे स्पष्ट पर्याय है; इसलिए सही विकल्प (b) है।
92
जिसे समझना कठिन हो- वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द का चयन करें।
A.सुबोध
B.सुगम
C.दुर्गम
D.दुर्बोध
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
‘दुर्’ उपसर्ग कठिनाई अथवा बुराई का भाव देता है और ‘बोध’ का अर्थ है समझ; अतः ‘दुर्बोध’ = जिसे समझना कठिन हो।
‘सुबोध’ इसका ठीक विलोम है (जो सरलता से समझ में आ जाए), ‘सुगम’ का अर्थ सरल है और ‘दुर्गम’ का अर्थ है जहाँ पहुँचना कठिन हो - इन दोनों का संबंध समझने से नहीं, मार्ग से है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
93
निम्नलिखित वाक्य के किस भाग में त्रुटि है?
ग्रीष्मकालीन काल में अमराई में घूमना अत्यंत भला लगता है।
A.अत्यंत भला
B.लगता है
C.ग्रीष्मकालीन काल में
D.अमराई में घूमना
Solution
पुनरुक्ति दोष
‘ग्रीष्मकालीन’ शब्द में ‘काल’ पहले से सम्मिलित है (ग्रीष्म + काल + ईन), अर्थात् वह स्वयं ‘ग्रीष्म ऋतु के समय का’ अर्थ दे देता है।
इसके बाद पुनः ‘काल में’ लिखने से एक ही भाव दो बार आ जाता है, जो पुनरुक्ति दोष है; शुद्ध प्रयोग होगा - ‘ग्रीष्मकाल में अमराई में घूमना अत्यंत भला लगता है।’
‘अमराई में घूमना’, ‘अत्यंत भला’ तथा ‘लगता है’ खंडों में कोई त्रुटि नहीं है; इसलिए सही विकल्प (c) है।
94
‘किरण’ का पर्याय निम्न में से है-
A.रश्मि
B.ईहा
C.ज्योत्सना
D.विद्युत
Solution
पर्यायवाची शब्द
‘किरण’ के प्रमुख पर्यायवाची हैं - रश्मि, मरीचि, अंशु, कर, मयूख।
अतः दिए गए विकल्पों में ‘रश्मि’ ही ‘किरण’ का पर्याय है।
‘ईहा’ का अर्थ इच्छा, ‘ज्योत्स्ना’ का अर्थ चाँदनी और ‘विद्युत’ का अर्थ बिजली है - ये तीनों प्रकाश से जुड़े होने पर भी ‘किरण’ के पर्याय नहीं हैं; इसलिए सही विकल्प (a) है।
95
नमन वैसे तो महापूर्व है, परंतु इस बार कक्षा में अव्वल आया है। इसे कहते हैं-अंधे के सिर बटेर लगना। रेखांकित पद के स्थान पर उचित शब्द बताइए।
A.दिमाग
B.पैर
C.गले
D.हाथ
Solution
मुहावरा
प्रचलित मुहावरा है - ‘अंधे के हाथ बटेर लगना’, जिसका अर्थ है अयोग्य अथवा अनुपयुक्त व्यक्ति को संयोगवश कोई बड़ी सफलता मिल जाना।
वाक्य का भाव भी यही है - नमन सामान्यतः पढ़ाई में कमज़ोर है, फिर भी इस बार कक्षा में अव्वल आ गया।
अतः रेखांकित पद ‘सिर’ के स्थान पर ‘हाथ’ आना चाहिए; ‘दिमाग’, ‘पैर’ अथवा ‘गले’ के साथ यह मुहावरा प्रचलन में नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बापू ने हमेशा धनाढ्य लोगों को इस बात के लिए __(76)__ किया कि वे अपनी मर्जी से जनहित के लिए उस मुनाफे में से व्यय करें जो वे अपने व्यवसाय से कमाते हैं। बापू की यह अवधारणा नैसर्गिक न्याय के __(77)__ थी। वे __(78)__ के प्राकृतिक सिद्धांत में विश्वास करते थे, जिसमें यह अवधारणा निहित थी कि प्रत्येक व्यक्ति उतना ही ले जो उसकी __(79)__ आवश्यकता हो। ऐसा नहीं है कि भारत के औद्योगिक __(80)__ ने जनहित की तरफ ध्यान न दिया हो।
रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.उत्प्रेरित
B.प्रेरित
C.संचालित
D.निर्देशित
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
रिक्त स्थान के तुरंत बाद ‘किया’ है, अतः वहाँ ऐसा शब्द चाहिए जो ‘करना’ के साथ जुड़कर ‘मन बनाना, उत्साहित करना’ का भाव दे।
बापू धनाढ्य लोगों को स्वेच्छा से जनहित में व्यय करने के लिए ‘प्रेरित’ करते थे - ‘प्रेरित करना’ ही यहाँ मानक एवं स्वाभाविक प्रयोग है।
‘उत्प्रेरित’ रसायन-शास्त्र का पारिभाषिक शब्द है, ‘संचालित’ का अर्थ चलाना है, और ‘निर्देशित’ आदेश का भाव देता है, जिसे गद्यांश ‘अपनी मर्जी से’ कहकर स्वयं हटा देता है; इसलिए सही विकल्प (b) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बापू ने हमेशा धनाढ्य लोगों को इस बात के लिए __(76)__ किया कि वे अपनी मर्जी से जनहित के लिए उस मुनाफे में से व्यय करें जो वे अपने व्यवसाय से कमाते हैं। बापू की यह अवधारणा नैसर्गिक न्याय के __(77)__ थी। वे __(78)__ के प्राकृतिक सिद्धांत में विश्वास करते थे, जिसमें यह अवधारणा निहित थी कि प्रत्येक व्यक्ति उतना ही ले जो उसकी __(79)__ आवश्यकता हो। ऐसा नहीं है कि भारत के औद्योगिक __(80)__ ने जनहित की तरफ ध्यान न दिया हो।
रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.स्वरूप
B.अनुरूप
C.प्रतिकूल
D.समान
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
वाक्य है - ‘बापू की यह अवधारणा नैसर्गिक न्याय के ____ थी।’ यहाँ ‘के’ के साथ वही शब्द बैठेगा जो ‘उसके अनुसार होने’ का भाव दे।
‘के अनुरूप होना’ का अर्थ है - उसके अनुकूल अथवा उससे मेल खाता हुआ; गद्यांश के अनुसार बापू की अवधारणा प्राकृतिक न्याय से पूरी तरह मेल खाती थी।
‘प्रतिकूल’ ठीक विपरीत अर्थ देकर प्रसंग बिगाड़ देता है, ‘समान’ केवल उपमा देता है और ‘स्वरूप’ यहाँ वाक्य-रचना में असंगत है; इसलिए सही विकल्प (b) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बापू ने हमेशा धनाढ्य लोगों को इस बात के लिए __(76)__ किया कि वे अपनी मर्जी से जनहित के लिए उस मुनाफे में से व्यय करें जो वे अपने व्यवसाय से कमाते हैं। बापू की यह अवधारणा नैसर्गिक न्याय के __(77)__ थी। वे __(78)__ के प्राकृतिक सिद्धांत में विश्वास करते थे, जिसमें यह अवधारणा निहित थी कि प्रत्येक व्यक्ति उतना ही ले जो उसकी __(79)__ आवश्यकता हो। ऐसा नहीं है कि भारत के औद्योगिक __(80)__ ने जनहित की तरफ ध्यान न दिया हो।
रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.परिवर्तन
B.व्यवस्था
C.विभाजन
D.वितरण
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
आगे आया वाक्यांश ही कुंजी है - ‘प्रत्येक व्यक्ति उतना ही ले जो उसकी आवश्यकता हो’; यह सबको उसकी आवश्यकता के अनुसार हिस्सा मिलने का सिद्धांत है।
आवश्यकता के अनुसार सबको हिस्सा मिलने की यही व्यवस्था ‘वितरण का प्राकृतिक सिद्धांत’ कहलाती है।
‘विभाजन’ केवल टुकड़े करने का भाव देता है, ‘परिवर्तन’ का यहाँ कोई संदर्भ नहीं और ‘व्यवस्था’ इतना सामान्य शब्द है कि ‘प्राकृतिक सिद्धांत’ के साथ आवश्यकता-आधारित बँटवारे का यह विशिष्ट अर्थ नहीं दे पाता; इसलिए सही विकल्प (d) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बापू ने हमेशा धनाढ्य लोगों को इस बात के लिए __(76)__ किया कि वे अपनी मर्जी से जनहित के लिए उस मुनाफे में से व्यय करें जो वे अपने व्यवसाय से कमाते हैं। बापू की यह अवधारणा नैसर्गिक न्याय के __(77)__ थी। वे __(78)__ के प्राकृतिक सिद्धांत में विश्वास करते थे, जिसमें यह अवधारणा निहित थी कि प्रत्येक व्यक्ति उतना ही ले जो उसकी __(79)__ आवश्यकता हो। ऐसा नहीं है कि भारत के औद्योगिक __(80)__ ने जनहित की तरफ ध्यान न दिया हो।
रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.समकालीन
B.व्यक्तिगत
C.प्रथम
D.तात्कालिक
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
भाव यह है कि व्यक्ति संग्रह न करे, केवल उतना ही ले जितनी उसे उसी समय आवश्यकता हो - यही गांधीजी के अपरिग्रह तथा न्यास (ट्रस्टीशिप) सिद्धांत का सार है।
‘तात्कालिक आवश्यकता’ का अर्थ ठीक यही है - उसी समय की, तुरंत की आवश्यकता।
‘व्यक्तिगत’ इसलिए अनुपयुक्त है कि वाक्य में ‘प्रत्येक व्यक्ति’ कहकर व्यक्ति का भाव पहले ही आ चुका है, तथा ‘समकालीन’ और ‘प्रथम’ इस प्रसंग में कोई सार्थक अर्थ नहीं देते; इसलिए सही विकल्प (d) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बापू ने हमेशा धनाढ्य लोगों को इस बात के लिए __(76)__ किया कि वे अपनी मर्जी से जनहित के लिए उस मुनाफे में से व्यय करें जो वे अपने व्यवसाय से कमाते हैं। बापू की यह अवधारणा नैसर्गिक न्याय के __(77)__ थी। वे __(78)__ के प्राकृतिक सिद्धांत में विश्वास करते थे, जिसमें यह अवधारणा निहित थी कि प्रत्येक व्यक्ति उतना ही ले जो उसकी __(79)__ आवश्यकता हो। ऐसा नहीं है कि भारत के औद्योगिक __(80)__ ने जनहित की तरफ ध्यान न दिया हो।
रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.समाजों
B.घरानों
C.समूहों
D.प्रतिष्ठानों
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
वाक्य है - ‘भारत के औद्योगिक ____ ने जनहित की तरफ ध्यान न दिया हो’; रिक्त स्थान में बड़े व्यावसायिक परिवारों के लिए प्रचलित शब्द चाहिए।
हिंदी में ‘औद्योगिक घराने’ एक रूढ़ प्रयोग है, जो टाटा, बिड़ला जैसे बड़े उद्योग-परिवारों के लिए बोला जाता है, और इन्हीं घरानों ने जनहित के कार्य किए हैं।
‘समाजों’, ‘समूहों’ तथा ‘प्रतिष्ठानों’ के साथ ‘औद्योगिक’ का यह रूढ़ सहप्रयोग नहीं मिलता; इसलिए सही विकल्प (b) है।
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