SSC GD Constable 25 February 2025 · Shift 3 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 210 of 210
25 February 2025 · Shift 3
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
वर्तनी की दृष्टि से दिए गए वाक्य के किस अंश में त्रुटि है?
आपने मेरे गृह में अनाधिकार प्रवेश करने की चेष्टा कैसे की।
A.में अनाधिकार
B.आपने मेरे गृह
C.चेष्टा कैसे की।
D.प्रवेश करने की
Solution
वर्तनी शुद्धि
वाक्य को दिए गए चार अंशों में बाँटकर प्रत्येक की वर्तनी अलग-अलग जाँचिए; त्रुटि केवल एक ही अंश में है।
‘में अनाधिकार’ अंश अशुद्ध है। यह शब्द ‘अन्’ (निषेधवाचक उपसर्ग) + ‘अधिकार’ से बना है, अतः इसका शुद्ध रूप ‘अनधिकार’ होगा - ‘अन्’ के बाद ‘आ’ की दीर्घ मात्रा नहीं लगती।
शेष अंश - ‘आपने मेरे गृह’, ‘प्रवेश करने की’ तथा ‘चेष्टा कैसे की।’ - वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध हैं।
शुद्ध वाक्य: आपने मेरे गृह में अनधिकार प्रवेश करने की चेष्टा कैसे की।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
82
निम्नलिखित में से बहुवचन से संबंधित वाक्य है-
A.वह योद्धा है।
B.वे सभी योद्धा हैं।
C.एक योद्धा आया है।
D.तुम योद्धा हो।
Solution
वचन (बहुवचन)
वचन से शब्द की संख्या का बोध होता है - एक के लिए एकवचन और एक से अधिक के लिए बहुवचन।
विकल्प (b) ‘वे सभी योद्धा हैं।’ में कर्ता ‘वे सभी’ बहुवचन है और क्रिया ‘हैं’ भी बहुवचन रूप में है, अर्थात् वाक्य अनेक व्यक्तियों की बात करता है।
(a) ‘वह योद्धा है।’ तथा (c) ‘एक योद्धा आया है।’ में कर्ता और क्रिया दोनों एकवचन हैं; (d) ‘तुम योद्धा हो।’ भी एक ही व्यक्ति को संबोधित है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
83
निम्न में से किस वाक्य में कारक चिह्न का अशुद्ध प्रयोग हुआ है?
A.गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा का महत्व दिया।
B.तिलक ने महान भारत का सपना देखा था।
C.माता ने पुत्री को विदाई पर समय बहुत धन दिया।
D.गुलाम अली द्वारा एक सुंदर गजल सुनाई गई।
Solution
कारक चिह्न का प्रयोग
कारक चिह्न (परसर्ग) वही शुद्ध माना जाता है जो वाक्य के अर्थ तथा क्रिया के अनुरूप बैठे।
विकल्प (c) में ‘विदाई पर समय’ अशुद्ध है; ‘समय’ के साथ अधिकरण का चिह्न ‘पर’ नहीं, बल्कि संबंधसूचक ‘के’ लगता है - ‘विदाई के समय’।
शुद्ध वाक्य: माता ने पुत्री को विदाई के समय बहुत धन दिया।
(b) में संबंध कारक ‘का’ (‘भारत का सपना’) और (d) में करण कारक ‘द्वारा’ का प्रयोग नियमानुकूल है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
84
यह व्यक्ति बहुत धनी है। रेखांकित शब्द के उचित विलोम शब्द का चयन कीजिए।
A.निर्जन
B.निर्धन
C.धनवान
D.धनिक
Solution
विलोम शब्द
रेखांकित शब्द ‘धनी’ का अर्थ है - जिसके पास धन हो, संपन्न व्यक्ति।
इसका विलोम ‘निर्धन’ है, अर्थात् जिसके पास धन न हो; ‘निर्’ उपसर्ग यहाँ अभाव का बोध कराता है।
‘धनवान’ और ‘धनिक’ तो ‘धनी’ के पर्यायवाची हैं, विलोम नहीं; ‘निर्जन’ का अर्थ है - जनशून्य, सुनसान स्थान।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
85
‘सौम्य’ का विलोम है-
A.उग्र
B.सरल
C.शांत
D.कठोर
Solution
विलोम शब्द
‘सौम्य’ का अर्थ है - शांत स्वभाव वाला, कोमल एवं मृदु प्रकृति का।
इसका ठीक उलटा भाव ‘उग्र’ में मिलता है, जिसका अर्थ है - प्रचंड, तीव्र तथा क्रोधी स्वभाव वाला।
‘सरल’ और ‘शांत’ ‘सौम्य’ के निकटार्थी शब्द हैं; ‘कठोर’ का विलोम ‘कोमल’ होता है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
86
अभ्यास अथवा व्यवहार से प्राप्त ज्ञान को ____ कहते हैं। वाक्य के रिक्त स्थान की उपयुक्त शब्द से पूर्ति कीजिए।
A.अनुभव
B.अनुशरण
C.अनुशासन
D.अनुभूति
Solution
उपयुक्त शब्द चयन
रिक्त स्थान में ऐसा शब्द चाहिए जो ‘अभ्यास अथवा व्यवहार से प्राप्त ज्ञान’ का वाचक हो।
यह अर्थ ‘अनुभव’ शब्द देता है - करके, देखकर अथवा भोगकर अर्जित किया गया व्यावहारिक ज्ञान।
‘अनुभूति’ केवल मन में उठने वाला भाव या संवेदना है; ‘अनुशासन’ नियम-पालन को कहते हैं; ‘अनुशरण’ अशुद्ध वर्तनी है - शुद्ध शब्द ‘अनुसरण’ है, जिसका अर्थ है पीछे चलना।
पूर्ण वाक्य: अभ्यास अथवा व्यवहार से प्राप्त ज्ञान को अनुभव कहते हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
87
विलोम शब्द की दृष्टि से अशुद्ध विकल्प का चयन करें-
A.हित-अहित
B.अपमान-निरादर
C.राजा-रंक
D.जय-पराजय
Solution
विलोम युग्म
यहाँ उस युग्म को छाँटना है जो विलोम का नहीं है, अतः प्रत्येक जोड़े के अर्थ की तुलना कीजिए।
‘अपमान’ और ‘निरादर’ - दोनों का अर्थ एक ही है, तिरस्कार अथवा बेइज़्ज़ती; यह पर्यायवाची युग्म है, विलोम नहीं।
शेष तीनों शुद्ध विलोम युग्म हैं - हित × अहित, राजा × रंक (कंगाल), जय × पराजय।
‘अपमान’ का वास्तविक विलोम ‘सम्मान’ होता है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
88
‘विज्ञ’ का विलोम शब्द नीचे दिए विकल्पों में से चुनिए-
A.अघ
B.अनुराग
C.अज्ञ
D.प्रज्ञ
Solution
विलोम शब्द
‘विज्ञ’ का अर्थ है - जानकार, विशेष ज्ञान रखने वाला।
इसका विलोम ‘अज्ञ’ है, अर्थात् जो कुछ भी न जानता हो, अनजान; ‘अ’ उपसर्ग यहाँ निषेध का भाव देता है।
‘प्रज्ञ’ भी ‘विज्ञ’ की भाँति बुद्धिमान का वाचक है, विलोम नहीं; ‘अनुराग’ का विलोम ‘विराग’ तथा ‘अघ’ (पाप) का विलोम ‘पुण्य’ है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
89
निम्नलिखित वाक्य का कौन-सा भाग अशुद्ध है?
‘आशा है आप स्वस्थ्य, संतुष्ट और सानंद होंगे।’
A.सानंद होंगे
B.आप स्वस्थ्य
C.आशा है
D.संतुष्ट और
Solution
वर्तनी की अशुद्धि
वाक्य को उसके चार भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग की शुद्धता जाँचिए।
‘आप स्वस्थ्य’ भाग अशुद्ध है; ‘स्वस्थ्य’ कोई शब्द ही नहीं है - नीरोग के अर्थ में शुद्ध विशेषण ‘स्वस्थ’ है।
ध्यान रहे, ‘स्वास्थ्य’ भाववाचक संज्ञा है (सेहत), जो यहाँ विशेषण के स्थान पर नहीं चल सकती।
शेष भाग ‘आशा है’, ‘संतुष्ट और’ तथा ‘सानंद होंगे’ शुद्ध हैं। शुद्ध वाक्य: आशा है आप स्वस्थ, संतुष्ट और सानंद होंगे।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
90
रिक्त स्थान की पूर्ति सार्थक और निरर्थक शब्द-युग्म से कीजिए-
सोहन आया तो उसे खाने के लिए ____ ही मिला।
A.हिलते-डुलते
B.बचा-खुचा
C.ऊँचा-नीचा
D.भला-चंगा
Solution
सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म
सार्थक-निरर्थक युग्म में पहला शब्द अर्थवान होता है और दूसरा उसी की ध्वनि पर गढ़ा हुआ निरर्थक शब्द, जो केवल अर्थ को विस्तार देता है।
‘बचा-खुचा’ में ‘बचा’ सार्थक है और ‘खुचा’ निरर्थक; पूरे युग्म का अर्थ है - जो थोड़ा-बहुत शेष रह गया हो।
‘हिलते-डुलते’, ‘ऊँचा-नीचा’ तथा ‘भला-चंगा’ में दोनों ही शब्द सार्थक हैं, अतः वे इस श्रेणी में नहीं आते।
पूर्ण वाक्य: सोहन आया तो उसे खाने के लिए बचा-खुचा ही मिला।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
91
रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए।
कोई ऐसा कृत्य नहीं हो सकता जो आपके अनुदानों को भुला दे।
A.अपकारी
B.कार्यों
C.दुष्टों
D.उपकारों
Solution
उपयुक्त शब्द चयन
वाक्य का अभीष्ट भाव है - ऐसा कोई काम नहीं हो सकता जो आपकी की हुई भलाइयों को भुला दे।
रेखांकित ‘अनुदानों’ का अर्थ है - दी गई आर्थिक सहायता; यह कृतज्ञता के इस भाव से मेल नहीं खाता।
‘उपकारों’ (भलाई, परोपकार) रखने पर वाक्य सार्थक हो जाता है; ‘अपकारी’ (बुरा करने वाला), ‘दुष्टों’ तथा ‘कार्यों’ से यह भाव नहीं निकलता।
शुद्ध वाक्य: कोई ऐसा कृत्य नहीं हो सकता जो आपके उपकारों को भुला दे।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
92
निम्नलिखित में से उस विकल्प का चयन करें, जिसमें उचित मुहावरे का प्रयोग किया गया है-
A.जो योग्य होते हैं उनकी प्रशंसा दूसरे करते हैं, वे खुद ईद का चाँद नहीं होते।
B.नौकर किस मर्ज की दवा है? यदि तुम्हीं को सारा काम करना है?
C.आज तो तुमने उनको ऐसी चुभती बात सुनाई कि वे अपने मुँह मियाँ मिट्ठू हो गए।
D.अपनी तरक्की के लिए ईंट का जवाब पत्थर से देना जरूरी है।
Solution
मुहावरों का प्रयोग
मुहावरे का प्रयोग तभी उचित माना जाता है जब उसका लाक्षणिक अर्थ वाक्य के भाव से पूरी तरह मेल खाए।
‘किस मर्ज़ की दवा होना’ का अर्थ है - किसी काम का न होना, निरर्थक होना। विकल्प (b) में नौकर के निकम्मेपन पर यही व्यंग्य है, अतः प्रयोग सटीक है।
(a) ‘ईद का चाँद होना’ = बहुत दिनों बाद दिखाई देना - योग्य व्यक्ति की प्रशंसा के प्रसंग में यह असंगत है।
(c) ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ = स्वयं अपनी प्रशंसा करना - चुभती बात सुनने पर यह भाव नहीं बनता, वहाँ ‘आग-बबूला होना’ चाहिए।
(d) ‘ईंट का जवाब पत्थर से देना’ = कड़ा प्रत्युत्तर देना - अपनी तरक्की के संदर्भ में यह अनुपयुक्त है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
93
निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए-
मांस न खाने वाला
A.निरामिष
B.मिमामुष
C.अमानुष
D.आमिष
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
‘आमिष’ का अर्थ है मांस; इसमें अभाववाचक ‘निर्’ उपसर्ग जोड़ने पर ‘निरामिष’ बनता है, अर्थात् मांस-रहित, मांस न खाने वाला (शाकाहारी)।
‘आमिष’ स्वयं मांस अथवा मांसाहार का वाचक है, अतः वह ठीक उलटा अर्थ देगा।
‘अमानुष’ का अर्थ है - मनुष्यता से रहित, क्रूर; और ‘मिमामुष’ हिंदी का कोई शब्द ही नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
94
निम्नलिखित में से सही युग्म की पहचान कीजिए-
A.लोटा-तत्सम
B.चाय-जापानी
C.नर्स-अंग्रेजी
D.रिक्शा-चीनी
Solution
शब्दों का उद्गम
प्रत्येक युग्म में शब्द तथा उसके स्रोत का मिलान जाँचना है; केवल एक युग्म ही सही बैठता है।
‘नर्स’ अंग्रेज़ी के ‘nurse’ से हिंदी में आया विदेशी शब्द है, अतः युग्म ‘नर्स-अंग्रेजी’ सही है।
‘लोटा’ तत्सम नहीं, देशज शब्द है; ‘चाय’ जापानी नहीं, चीनी भाषा से आया है; और ‘रिक्शा’ चीनी नहीं, जापानी शब्द है - तीनों युग्मों में स्रोत ग़लत जोड़ा गया है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
95
आपकी निबंध-शैली अत्यंत सरस और सहावनी है। उपरोक्त वाक्य में रेखांकित पद के बदले कौन-सा विकल्प उपयुक्त है?
A.आकर्षक
B.ग्रहणीय
C.सुखदायक
D.जटिल
Solution
उपयुक्त शब्द चयन
वाक्य में निबंध-शैली की प्रशंसा की जा रही है - वह ‘सरस’ भी है और मन को भाने वाली भी।
रेखांकित पद ‘सहावनी’ (सुहावनी) का भाव है - मन को लुभाने वाली; ठीक यही भाव ‘आकर्षक’ शब्द देता है।
‘सुखदायक’ सुख देने वाली वस्तु के लिए, ‘ग्रहणीय’ ग्रहण करने योग्य के लिए तथा ‘जटिल’ कठिन के लिए प्रयुक्त होता है; शैली के लुभावनेपन का भाव इनमें से कोई नहीं देता।
वाक्य बनेगा: आपकी निबंध-शैली अत्यंत सरस और आकर्षक है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सबसे ऊँचे चबूतरे पर बड़ा बौद्ध स्तूप है। मगर यह मुअनजो-दड़ो की सभ्यता के बिखरने के बाद एक जीर्ण-शीर्ण टीले पर बना। कोई पच्चीस फुट ऊँचे चबूतरे पर छब्बीस सदी पहले बनी ईंटों के दम पर स्तूप को आकार दिया गया। चबूतरे पर भिक्षुओं के कमरे भी हैं। 1922 में जब राखालदास बनर्जी यहाँ आए तब वे इसे स्तूप की खोजबीन करना चाहते थे। इसके गिर्द खुदाई शुरू करने के बाद उन्हें इलहाम हुआ कि यहाँ ईसा पूर्व के निशान हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर खुदाई का व्यापक अभियान शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह खोज विशेषज्ञों को सिंधु घाटी सभ्यता की देहरी पर ले आई। इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया (इराक) की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया। दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने के भारत के दावे को पुरातत्व का वैज्ञानिक आधार मिल गया।
दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने का श्रेय किसे मिला?
A.अमेरिका
B.इराक
C.भारत
D.जापान
Solution
गद्यांश - मुख्य निष्कर्ष
गद्यांश की अंतिम पंक्ति उत्तर देती है - ‘दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने के भारत के दावे को पुरातत्व का वैज्ञानिक आधार मिल गया।’
मुअनजो-दड़ो की इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया, अतः यह श्रेय भारत को मिला।
इराक (मेसोपोटामिया) का उल्लेख गद्यांश में केवल तुलना के लिए हुआ है, जबकि अमेरिका और जापान की चर्चा है ही नहीं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सबसे ऊँचे चबूतरे पर बड़ा बौद्ध स्तूप है। मगर यह मुअनजो-दड़ो की सभ्यता के बिखरने के बाद एक जीर्ण-शीर्ण टीले पर बना। कोई पच्चीस फुट ऊँचे चबूतरे पर छब्बीस सदी पहले बनी ईंटों के दम पर स्तूप को आकार दिया गया। चबूतरे पर भिक्षुओं के कमरे भी हैं। 1922 में जब राखालदास बनर्जी यहाँ आए तब वे इसे स्तूप की खोजबीन करना चाहते थे। इसके गिर्द खुदाई शुरू करने के बाद उन्हें इलहाम हुआ कि यहाँ ईसा पूर्व के निशान हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर खुदाई का व्यापक अभियान शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह खोज विशेषज्ञों को सिंधु घाटी सभ्यता की देहरी पर ले आई। इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया (इराक) की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया। दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने के भारत के दावे को पुरातत्व का वैज्ञानिक आधार मिल गया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक कौन थे?
A.जॉन मार्शल
B.दलाई लामा
C.गौतम बुद्ध
D.राखालदास बनर्जी
Solution
गद्यांश - तथ्य
गद्यांश में स्पष्ट लिखा है - ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर खुदाई का व्यापक अभियान शुरू हुआ।’
अतः महानिदेशक जॉन मार्शल थे, और उन्हीं के निर्देश पर व्यापक खुदाई आरंभ हुई।
राखालदास बनर्जी वे पुरातत्ववेत्ता थे जो 1922 में वहाँ पहुँचे थे, महानिदेशक नहीं; दलाई लामा और गौतम बुद्ध का इस प्रसंग से कोई संबंध नहीं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सबसे ऊँचे चबूतरे पर बड़ा बौद्ध स्तूप है। मगर यह मुअनजो-दड़ो की सभ्यता के बिखरने के बाद एक जीर्ण-शीर्ण टीले पर बना। कोई पच्चीस फुट ऊँचे चबूतरे पर छब्बीस सदी पहले बनी ईंटों के दम पर स्तूप को आकार दिया गया। चबूतरे पर भिक्षुओं के कमरे भी हैं। 1922 में जब राखालदास बनर्जी यहाँ आए तब वे इसे स्तूप की खोजबीन करना चाहते थे। इसके गिर्द खुदाई शुरू करने के बाद उन्हें इलहाम हुआ कि यहाँ ईसा पूर्व के निशान हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर खुदाई का व्यापक अभियान शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह खोज विशेषज्ञों को सिंधु घाटी सभ्यता की देहरी पर ले आई। इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया (इराक) की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया। दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने के भारत के दावे को पुरातत्व का वैज्ञानिक आधार मिल गया।
1922 में बौद्ध स्तूप पर कौन शोध करना चाहते थे?
A.जॉन मार्शल
B.पुरातत्व विभाग
C.बौद्ध भिक्षुक
D.राखालदास
Solution
गद्यांश - तथ्य
गद्यांश के अनुसार - ‘1922 में जब राखालदास बनर्जी यहाँ आए तब वे इसे स्तूप की खोजबीन करना चाहते थे।’
अतः 1922 में बौद्ध स्तूप पर शोध करने के इच्छुक राखालदास (बनर्जी) थे।
जॉन मार्शल के निर्देश पर तो इसके बाद व्यापक खुदाई का अभियान चला, अतः विकल्प (a) वर्ष 1922 के संदर्भ में सही नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सबसे ऊँचे चबूतरे पर बड़ा बौद्ध स्तूप है। मगर यह मुअनजो-दड़ो की सभ्यता के बिखरने के बाद एक जीर्ण-शीर्ण टीले पर बना। कोई पच्चीस फुट ऊँचे चबूतरे पर छब्बीस सदी पहले बनी ईंटों के दम पर स्तूप को आकार दिया गया। चबूतरे पर भिक्षुओं के कमरे भी हैं। 1922 में जब राखालदास बनर्जी यहाँ आए तब वे इसे स्तूप की खोजबीन करना चाहते थे। इसके गिर्द खुदाई शुरू करने के बाद उन्हें इलहाम हुआ कि यहाँ ईसा पूर्व के निशान हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर खुदाई का व्यापक अभियान शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह खोज विशेषज्ञों को सिंधु घाटी सभ्यता की देहरी पर ले आई। इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया (इराक) की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया। दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने के भारत के दावे को पुरातत्व का वैज्ञानिक आधार मिल गया।
स्तूप को कितनी ऊँचाई पर बने चबूतरे पर आकार दिया गया?
A.25 फुट
B.27 फुट
C.26 फुट
D.24 फुट
Solution
गद्यांश - संख्यात्मक तथ्य
गद्यांश में लिखा है - ‘कोई पच्चीस फुट ऊँचे चबूतरे पर … स्तूप को आकार दिया गया।’
‘पच्चीस’ का अंकों में रूप 25 है, अतः चबूतरे की ऊँचाई 25 फुट हुई।
गद्यांश की दूसरी संख्या ‘छब्बीस’ ईंटों की प्राचीनता के लिए आई है (छब्बीस सदी पहले बनी ईंटें), ऊँचाई के लिए नहीं - यहीं भ्रम की संभावना है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सबसे ऊँचे चबूतरे पर बड़ा बौद्ध स्तूप है। मगर यह मुअनजो-दड़ो की सभ्यता के बिखरने के बाद एक जीर्ण-शीर्ण टीले पर बना। कोई पच्चीस फुट ऊँचे चबूतरे पर छब्बीस सदी पहले बनी ईंटों के दम पर स्तूप को आकार दिया गया। चबूतरे पर भिक्षुओं के कमरे भी हैं। 1922 में जब राखालदास बनर्जी यहाँ आए तब वे इसे स्तूप की खोजबीन करना चाहते थे। इसके गिर्द खुदाई शुरू करने के बाद उन्हें इलहाम हुआ कि यहाँ ईसा पूर्व के निशान हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर खुदाई का व्यापक अभियान शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह खोज विशेषज्ञों को सिंधु घाटी सभ्यता की देहरी पर ले आई। इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया (इराक) की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया। दुनिया को प्राचीन सभ्यता होने के भारत के दावे को पुरातत्व का वैज्ञानिक आधार मिल गया।
बड़ा बौद्ध स्तूप कहाँ स्थित है?
A.नीचे चबूतरे पर
B.ऊँचे चबूतरे पर
C.ईंटों के बने चबूतरे पर
D.पहाड़ पर
Solution
गद्यांश - स्थान-निर्धारण
गद्यांश का आरंभ ही इस तथ्य से होता है - ‘सबसे ऊँचे चबूतरे पर बड़ा बौद्ध स्तूप है।’
अतः बड़ा बौद्ध स्तूप सबसे ऊँचे चबूतरे पर स्थित है।
ईंटों का उल्लेख चबूतरे की निर्माण-सामग्री के संदर्भ में हुआ है, स्थिति बताने के लिए नहीं; ‘नीचे चबूतरे पर’ तथा ‘पहाड़ पर’ गद्यांश के विरुद्ध हैं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
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