SSC GD Constable 4 February 2025 · Shift 1 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 5 of 210
4 February 2025 · Shift 1
Hindi
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20 questions
A
81
निम्नलिखित वाक्यांश हेतु सार्थक शब्द की पहचान करें।
जिसकी उपमा नहीं दी जा सके
A.अनादि
B.उपमा
C.अनुपम
D.अनन
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
‘जिसकी उपमा न दी जा सके’ अर्थात् जिसकी तुलना किसी दूसरे से हो ही न सके - इस वाक्यांश के लिए एक शब्द ‘अनुपम’ है (अन् + उपम = जिसकी उपमा न हो, अद्वितीय)।
विकल्पों के अर्थ - ‘अनादि’: जिसका कोई आदि अर्थात् आरंभ न हो; ‘उपमा’: समानता दिखाने की क्रिया, तुलना; ‘अनुपम’: जिसकी उपमा न हो, अतुलनीय; ‘अनन’ कोई स्वतंत्र प्रचलित शब्द नहीं, यह ‘आनन’ (मुख) का विकृत रूप भर है।
‘उपमा’ इसलिए भ्रम में डालता है कि वही शब्द प्रश्न-वाक्यांश में आया है; किंतु वह स्वयं तुलना का नाम है, ‘तुलना न हो सकने’ का नहीं। अतः उत्तर ‘अनुपम’ है।
82
‘तोता उड़कर पेड़ की ______।’ निम्नलिखित में से ‘देशज’ शब्द युक्त विकल्प चुनकर वाक्य पूर्ण करें।
A.फुनगी पर बैठ गया
B.टहनी पर बैठ गया
C.डाल पर बैठ गया
D.शाखा पर बैठ गया
Solution
शब्द-भेद (देशज शब्द)
देशज वे शब्द हैं जो संस्कृत या किसी विदेशी भाषा से नहीं, बल्कि स्थानीय बोलचाल से हिंदी में आए हैं और जिनका मूल निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता।
‘फुनगी’ (पेड़ की सबसे ऊपरी पतली कोंपल) ऐसा ही देशज शब्द है; परीक्षा-सूचियों में इसे लोटा, डिबिया, खिड़की, कुल्हाड़ी, तेंदुआ, पगड़ी, खिचड़ी आदि के साथ गिना जाता है।
‘शाखा’ तत्सम अर्थात् संस्कृत से ज्यों-का-त्यों लिया गया शब्द है और ‘डाल’ उसी परंपरा का तद्भव रूप; ‘टहनी’ भी सामान्य प्रचलित शब्द है, किंतु देशज कोटि का मानक उदाहरण ‘फुनगी’ ही माना जाता है।
अर्थ की दृष्टि से चारों वाक्य ठीक बैठते हैं - यहाँ चयन का आधार अर्थ नहीं, शब्द की उत्पत्ति है। अतः उत्तर ‘फुनगी पर बैठ गया’ है।
83
‘छः महीने का समय’ उपरोक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
A.छठवाँ
B.छमाई
C.छमाही
D.छठी
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
‘छः महीने का समय’ अर्थात् छह मास की अवधि के लिए एक शब्द ‘छमाही’ (अर्धवार्षिक) है - जैसे ‘छमाही परीक्षा’, ‘छमाही ब्याज’।
अन्य विकल्पों के अर्थ - ‘छठवाँ’: क्रम में छठे स्थान पर आने वाला (क्रमवाचक विशेषण); ‘छठी’: जन्म के छठे दिन होने वाला संस्कार; ‘छमाई’ हिंदी का कोई मानक शब्द नहीं है।
ध्यान रहे कि प्रश्न में अवधि पूछी गई है, क्रम नहीं; इसीलिए क्रमवाचक ‘छठवाँ’ और ‘छठी’ यहाँ नहीं चलेंगे।
84
निम्नलिखित में से बहुवचन से संबंधित वाक्य है-
A.प्रेम और हरि तुम्हारे मामा हैं।
B.वह एक दाता है।
C.देवराज अत्यंत वीर है।
D.प्रेम तुम्हारे मामा हैं।
Solution
वचन
बहुवचन शब्द का वह रूप है जिससे एक से अधिक व्यक्ति, वस्तु या प्राणी का बोध हो।
विकल्प (a) ‘प्रेम और हरि तुम्हारे मामा हैं।’ में कर्ता दो व्यक्ति हैं, अतः कर्ता वास्तव में बहुवचन है और क्रिया ‘हैं’ भी उसी के अनुसार बहुवचन में है।
(b) ‘वह एक दाता है।’ तथा (c) ‘देवराज अत्यंत वीर है।’ में कर्ता और क्रिया दोनों एकवचन हैं।
(d) ‘प्रेम तुम्हारे मामा हैं।’ इस प्रश्न का भ्रामक विकल्प है - यहाँ कर्ता एक ही व्यक्ति है और ‘हैं’ केवल आदरार्थ बहुवचन है, संख्या का बहुवचन नहीं। अतः उत्तर (a) है।
85
इनमें से किस वाक्य में त्रुटि नहीं है?
A.मोहन का व्यवहार अच्छी नहीं है।
B.मोहन का व्यवहार अच्छा नहीं है।
C.आपकी बातें बहुत मीठा हैं।
D.तुम्हारा गाँव किसका हैं?
Solution
वाक्य-शुद्धि (लिंग एवं वचन का अन्वय)
नियम - विशेषण अपने विशेष्य के लिंग और वचन के अनुसार चलता है, तथा क्रिया कर्ता के लिंग-वचन के अनुसार।
शुद्ध वाक्य है - ‘मोहन का व्यवहार अच्छा नहीं है।’ ‘व्यवहार’ पुल्लिंग एकवचन संज्ञा है, इसलिए उसका विशेषण ‘अच्छा’ ही होगा; यही विकल्प त्रुटिरहित है।
(a) में स्त्रीलिंग रूप ‘अच्छी’ लगा है - शुद्ध रूप ‘मोहन का व्यवहार अच्छा नहीं है।’
(c) में ‘बातें’ स्त्रीलिंग बहुवचन है, अतः ‘मीठा’ के स्थान पर ‘मीठी’ चाहिए - शुद्ध रूप ‘आपकी बातें बहुत मीठी हैं।’
(d) में प्रश्नवाचक शब्द और क्रिया का वचन दोनों अनुपयुक्त हैं - शुद्ध रूप ‘तुम्हारा गाँव कौन-सा है?’ अतः उत्तर (b) है।
86
निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए-
A.यह कैसे संभव हो सकता है।
B.इसके बाद क्या हुआ?
C.मैं प्रातः काल के समय पढ़ता हूँ।
D.मेरे पास केवल एक घड़ी है।
Solution
वाक्य-शुद्धि
शुद्ध वाक्य है - ‘मेरे पास केवल एक घड़ी है।’ इसमें कारक, विशेषण का स्थान, क्रिया और विराम-चिह्न सभी उचित हैं।
(a) प्रश्नवाचक वाक्य होते हुए भी उसके अंत में पूर्ण विराम लगा है; साथ ही ‘संभव’ में ही ‘हो सकना’ निहित है, अतः ‘हो सकता है’ पुनरुक्ति है - शुद्ध रूप ‘यह कैसे संभव है?’
(c) में ‘प्रातःकाल’ का अर्थ ही ‘प्रातः का समय’ है, इसलिए ‘के समय’ जोड़ना पुनरुक्ति दोष है - शुद्ध रूप ‘मैं प्रातःकाल पढ़ता हूँ।’
(b) व्याकरण की दृष्टि से चल जाता है, किंतु पूर्व में घट चुकी बात के लिए ‘इसके बाद’ के स्थान पर ‘उसके बाद’ अधिक उपयुक्त होता है; पूर्णतः निर्दोष वाक्य (d) ही है।
87
‘अनन्या स्नेहा को पत्र लिख रही है।’ प्रेरणार्थक क्रिया का प्रयोग कर इस वाक्य को लिखिए-
A.अनन्या स्नेहा को पत्र लिखेगी।
B.अनन्या स्नेहा को पत्र लिख सकती है।
C.अनन्या स्नेहा को पत्र लिख रही थी।
D.अनन्या स्नेहा से पत्र लिखवाती है।
Solution
प्रेरणार्थक क्रिया
प्रेरणार्थक क्रिया वह है जिसमें कर्ता कार्य स्वयं न करके किसी दूसरे से कराता है। ऐसी क्रियाएँ प्रायः ‘-आना’ और ‘-वाना’ प्रत्यय से बनती हैं - लिखना → लिखाना → लिखवाना।
उत्तर है ‘अनन्या स्नेहा से पत्र लिखवाती है।’ - यहाँ अनन्या स्वयं नहीं लिखती, स्नेहा से लिखवाती है, अतः यह द्वितीय प्रेरणार्थक रूप है।
ध्यान दें कि प्रेरणार्थक रचना में प्रेरित व्यक्ति के साथ ‘से’ परसर्ग आता है - ‘स्नेहा से लिखवाती है’, ‘स्नेहा को’ नहीं।
(a) सामान्य भविष्यत् काल, (b) सामर्थ्यसूचक (सकना) रूप और (c) अपूर्ण भूतकाल हैं; इनमें केवल काल या भाव बदला है, प्रेरणा का भाव कहीं नहीं आया।
88
मेरे परीक्षा में अच्छे अंक आए हैं। - वाक्य में प्रयुक्त रेखांकित एकार्थी शब्द के लिए उचित विकल्प है-
A.अध्याय
B.गिनती के अंक
C.नाटक के अंक
D.भाग
Solution
अनेकार्थी शब्द (‘अंक’)
‘अंक’ अनेक अर्थों वाला शब्द है - गोद, चिह्न, संख्या अथवा परीक्षा में प्राप्त अंक, नाटक का विभाग, अध्याय या भाग।
प्रस्तुत वाक्य ‘परीक्षा में अच्छे अंक आए हैं’ में आशय परीक्षा में मिली संख्या अर्थात् प्राप्तांक से है, इसलिए ‘गिनती के अंक’ उपयुक्त विकल्प है।
‘नाटक के अंक’ (नाटक का एक विभाग), ‘अध्याय’ तथा ‘भाग’ भी ‘अंक’ के प्रचलित अर्थ हैं, किंतु परीक्षा के इस संदर्भ में वे लागू नहीं होते। अतः उत्तर (b) है।
89
‘विष्णु’ के लिए पर्यायवाची शब्द होगा-
A.नागेंद्र
B.नागेश
C.जनार्दन
D.राकेश
Solution
पर्यायवाची शब्द
‘जनार्दन’ विष्णु का पर्यायवाची है (जन + अर्दन - जनों के कष्ट दूर करने वाला)। विष्णु के अन्य पर्याय हैं - हरि, नारायण, केशव, माधव, चक्रपाणि, अच्युत, लक्ष्मीपति, गोविंद।
‘नागेंद्र’ तथा ‘नागेश’ दोनों का अर्थ है नागों का स्वामी अर्थात् शेषनाग; ये विष्णु के नहीं, सर्पराज के नाम हैं।
‘राकेश’ (राका + ईश) का अर्थ है पूर्णिमा का स्वामी अर्थात् चंद्रमा। अतः उत्तर ‘जनार्दन’ है।
90
यह वस्तु ग्राह्य है।
उपरोक्त वाक्य में ‘ग्राह्य’ शब्द का विलोम चयन कीजिए।
A.आर्य
B.अनाग्रह
C.भोज्य
D.त्याज्य
Solution
विलोम शब्द
‘ग्राह्य’ का अर्थ है - ग्रहण करने योग्य, स्वीकार करने योग्य। इसका ठीक विपरीत शब्द ‘त्याज्य’ है, जिसका अर्थ है - त्यागने योग्य, छोड़ देने योग्य।
अन्य विकल्पों के अर्थ - ‘आर्य’: श्रेष्ठ, कुलीन (इसका विलोम ‘अनार्य’ है); ‘अनाग्रह’: आग्रह का अभाव (यह ‘आग्रह’ का विलोम है, ‘ग्राह्य’ का नहीं); ‘भोज्य’: खाने योग्य।
‘भोज्य’ इसलिए भ्रमित करता है कि उसका रूप भी ‘-य’ प्रत्यय वाला है, किंतु अर्थ की दृष्टि से वह ‘ग्राह्य’ का विरोधी नहीं है। अतः उत्तर ‘त्याज्य’ है।
91
‘खिन्न’ का विलोम शब्द नीचे दिए विकल्पों में से चुनिए-
A.दुखी
B.मलाल
C.अप्रसन्न
D.प्रसन्न
Solution
विलोम शब्द
‘खिन्न’ का अर्थ है - दुखी, उदास, मन से टूटा हुआ; अतः इसका विलोम ‘प्रसन्न’ (हर्षित) होगा।
‘दुखी’ और ‘अप्रसन्न’ तो ‘खिन्न’ के पर्यायवाची हैं, विलोम नहीं - यही इस प्रश्न का जाल है।
‘मलाल’ भाववाचक संज्ञा है जिसका अर्थ है खेद या पछतावा; वह भी विलोम नहीं। अतः उत्तर ‘प्रसन्न’ है।
92
रिक्त स्थान की पूर्ति सार्थक-निरर्थक शब्द युग्म से करें-
जीवन में हमेशा मनुष्य को... रास्ते से गुजरना पड़ता है।
A.चलते-फिरते
B.ऊपर-नीचे
C.टेढ़े-मेढ़े
D.सुगम
Solution
सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म
सार्थक-निरर्थक युग्म में पहला शब्द अर्थवान होता है और दूसरा उसकी अनुकृति मात्र, जिसका अपना कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता - जैसे रोटी-वोटी, पानी-वानी, टेढ़ा-मेढ़ा।
‘टेढ़े-मेढ़े’ में ‘टेढ़े’ सार्थक है और ‘मेढ़े’ निरर्थक; अर्थ की दृष्टि से भी वाक्य ठीक बैठता है - जीवन में मनुष्य को टेढ़े-मेढ़े अर्थात् कठिन रास्ते से गुजरना पड़ता है।
‘चलते-फिरते’ तथा ‘ऊपर-नीचे’ में दोनों ही शब्द सार्थक हैं, अतः वे सार्थक-सार्थक युग्म हैं; ‘सुगम’ एकल शब्द है, युग्म ही नहीं, और वाक्य के भाव के भी विपरीत है।
93
निम्नलिखित में से विशेषण युक्त पद नहीं है।
A.लाल कपड़ा
B.उत्तर चढ़ाव
C.मोटा लड़का
D.ऊँचा मकान
Solution
विशेषण
विशेषण-युक्त पद में एक शब्द विशेषण होता है और दूसरा विशेष्य अर्थात् वह संज्ञा जिसकी विशेषता बताई जा रही है।
‘लाल कपड़ा’, ‘मोटा लड़का’ और ‘ऊँचा मकान’ - इन तीनों में क्रमशः लाल, मोटा और ऊँचा गुणवाचक विशेषण हैं तथा कपड़ा, लड़का और मकान विशेष्य।
‘उत्तर चढ़ाव’ में ‘उत्तर’ (दिशा अथवा जवाब) और ‘चढ़ाव’ (ऊँचाई) दोनों ही संज्ञाएँ हैं; इस पद में कोई विशेषण नहीं है।
अतः विशेषण-युक्त पद न होने के कारण उत्तर (b) ‘उत्तर चढ़ाव’ है।
94
निम्नलिखित में से उस विकल्प का चयन करें, जिसमें उचित मुहावरे का प्रयोग नहीं किया गया है-
A.तुमने मेरा इतना नुकसान किया है, अब मैंने भी तुम्हारे कपड़े न उतरवा लिए तो मेरा नाम नहीं।
B.मैंने तो काम करने के लिए कमर कस ली है, अब सब कुछ करना है अपने परिवार के लिए।
C.मैं चाहे कब खोदकर इतना पैसा लाऊँ, तुमसे क्या मतलब? तुम तो यह ज़मीन बेचने के लिए मान जाओ बस।
D.तुमने मेरा इतना पैसा ले रखा है, लेकिन मुझे देखते ही कनी चाटने लगते हो।
Solution
मुहावरे
मुहावरा अपने निश्चित रूप में ही चलता है; उसके किसी शब्द को बदल देने पर वह मुहावरा नहीं रह जाता और वाक्य निरर्थक हो जाता है - इसी आधार पर यहाँ चयन करना है।
विकल्पों के मुहावरे और उनके अर्थ - ‘कपड़े उतारना’: सबके सामने अपमानित करना; ‘कमर कसना’: किसी काम के लिए दृढ़ता से तैयार हो जाना; ‘खोदकर लाना’: जैसे-तैसे, कहीं से भी जुटा लाना; ‘कन्नी काटना’: सामने पड़ने से बचना, कतराकर निकल जाना।
(a), (b) और (c) में मुहावरे अपने शुद्ध रूप में तथा प्रसंग के अनुकूल अर्थ में प्रयुक्त हुए हैं - बदला लेने, तैयार होने और किसी भी तरह धन जुटाने के भाव में।
(d) में मुहावरे का रूप ही शुद्ध नहीं है; शुद्ध मुहावरा ‘कन्नी काटना’ है और उसका रूप बिगड़ जाने पर वाक्य से कोई अर्थ नहीं निकलता।
अतः जिस विकल्प में उचित मुहावरे का प्रयोग नहीं हुआ, वह (d) है।
95
निम्न वाक्य में किस पद पर त्रुटि है? पहचानिए।
मेले में विद्यार्थियों की कई टोलियों थीं।
A.कई
B.टोलियों
C.विद्यार्थियों की
D.मेले में
Solution
वाक्य में त्रुटि (संज्ञा का वचन-रूप)
ऐसे प्रश्न में एक-एक पद जाँचना चाहिए। ‘मेले में’ अधिकरण कारक का शुद्ध रूप है; ‘विद्यार्थियों की’ भी शुद्ध है, क्योंकि परसर्ग ‘की’ के पहले बहुवचन का तिर्यक रूप ‘विद्यार्थियों’ ही आएगा और ‘टोली’ स्त्रीलिंग होने से परसर्ग ‘की’ ही लगेगा; ‘कई’ अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण के रूप में उपयुक्त है।
अतः त्रुटि केवल संज्ञा पद पर बचती है, और वह त्रुटि वर्तनी की नहीं, वचन-रूप की है।
नियम - जो संज्ञा कर्ता के रूप में बिना परसर्ग के आती है, वह अपने अविकारी बहुवचन रूप में रहती है: टोली → टोलियाँ। विकारी अथवा तिर्यक रूप ‘टोलियों’ केवल परसर्ग के साथ आता है - ‘टोलियों में’, ‘टोलियों को’, ‘टोलियों ने’।
यहाँ कर्ता के साथ कोई परसर्ग नहीं है, इसलिए शुद्ध रूप ‘टोलियाँ’ ही होगा।
शुद्ध वाक्य - ‘मेले में विद्यार्थियों की कई टोलियाँ थीं।’ स्त्रीलिंग बहुवचन कर्ता के अनुरूप क्रिया ‘थीं’ भी इसी रूप में शुद्ध है। अतः त्रुटि वाला पद (b) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एक युवक पत्थर की बेंच पर बैठकर टिफिन खाता हुआ। उससे कुछ दूर एक उम्रदराज मगर तंदुरुस्त आदमी शहनाई जैसा____(76) - बैगपाइपर (bagpiper) बजा रहा था। उसने काला लबादा गाउन पहन रखा ____(77)। कपड़े-जूते ठीक-ठाक पहन रखे थे। हैट भी लगा रखा था। उसके सामने जमीन पर कोट और कपड़ों का बना संदूकनुमा बाक्स था। बाक्स में कुछ सिक्के थे। वह खड़ा होकर वाद्य ____(78) रहा था। उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे जैसे हमारे यहाँ भी शहनाई बजाते समय या शंख फूँकते समय। लोग उसके सामने से अदब ____(79) से गुजर रहे थे। एक-दो लोगों ने उसे अभिवादन भी किया। कुछ लोग करीब जाते और झुककर बाक्स में पेंस (सिक्के) डाल देते। दूर से फेंकता कोई नहीं था। वह एक भिखारी था लेकिन यहाँ उसे स्ट्रीट आर्टिस्ट (सड़क कलाकार) कहा जाता है। भिक्षा या दान भी यहाँ कला के माध्यम से लिया जाता है। कोई माँगता या गुहार नहीं लगाता। या तो चुप बैठा रहता है या संगीत कला या गायन के माध्यम से वह लोगों का ध्यान आकृष्ट करता है। यह दृश्य मुझे सुखद विस्मय से भर गया। मैं देर तक उसे वाद्य बजाते देखता-सुनता रहा। पास में पेंस (सिक्के) ____ (80) न होने का अफसोस हुआ। भिक्षा के लिए यहाँ हाथ फैलाने की परंपरा नहीं है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.वाद्य
B.समान
C.तरह का
D.बाज
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति (संज्ञा)
रिक्त स्थान पर ऐसी संज्ञा चाहिए जिसका समानाधिकरण आगे आया ‘बैगपाइपर’ बन सके - ‘शहनाई जैसा वाद्य - बैगपाइपर बजा रहा था।’
‘वाद्य’ का अर्थ है बजाया जाने वाला यंत्र। गद्यांश में आगे भी ‘वह खड़ा होकर वाद्य बजा रहा था’ तथा ‘उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे’ आया है, जिससे यही शब्द प्रसंग-संगत सिद्ध होता है।
‘समान’ और ‘तरह का’ वाक्य में पहले से आए ‘जैसा’ की पुनरुक्ति कर देते हैं (‘जैसा समान’, ‘जैसा तरह का’ - अशुद्ध रचना), और ‘बाज’ एक पक्षी का नाम है, जो यहाँ अर्थहीन है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एक युवक पत्थर की बेंच पर बैठकर टिफिन खाता हुआ। उससे कुछ दूर एक उम्रदराज मगर तंदुरुस्त आदमी शहनाई जैसा____(76) - बैगपाइपर (bagpiper) बजा रहा था। उसने काला लबादा गाउन पहन रखा ____(77)। कपड़े-जूते ठीक-ठाक पहन रखे थे। हैट भी लगा रखा था। उसके सामने जमीन पर कोट और कपड़ों का बना संदूकनुमा बाक्स था। बाक्स में कुछ सिक्के थे। वह खड़ा होकर वाद्य ____(78) रहा था। उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे जैसे हमारे यहाँ भी शहनाई बजाते समय या शंख फूँकते समय। लोग उसके सामने से अदब ____(79) से गुजर रहे थे। एक-दो लोगों ने उसे अभिवादन भी किया। कुछ लोग करीब जाते और झुककर बाक्स में पेंस (सिक्के) डाल देते। दूर से फेंकता कोई नहीं था। वह एक भिखारी था लेकिन यहाँ उसे स्ट्रीट आर्टिस्ट (सड़क कलाकार) कहा जाता है। भिक्षा या दान भी यहाँ कला के माध्यम से लिया जाता है। कोई माँगता या गुहार नहीं लगाता। या तो चुप बैठा रहता है या संगीत कला या गायन के माध्यम से वह लोगों का ध्यान आकृष्ट करता है। यह दृश्य मुझे सुखद विस्मय से भर गया। मैं देर तक उसे वाद्य बजाते देखता-सुनता रहा। पास में पेंस (सिक्के) ____ (80) न होने का अफसोस हुआ। भिक्षा के लिए यहाँ हाथ फैलाने की परंपरा नहीं है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.था
B.हैं
C.थी
D.थीं
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति (क्रिया का रूप एवं काल)
वाक्य ‘उसने काला लबादा गाउन पहन रखा ____’ में ‘ने’ परसर्ग होने के कारण क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार चलेगी। कर्म ‘लबादा गाउन’ पुल्लिंग एकवचन है, अतः ‘पहन रखा था’ शुद्ध है।
पूरा गद्यांश भूतकाल में है - आगे ‘कपड़े-जूते ठीक-ठाक पहन रखे थे’, ‘हैट भी लगा रखा था’, ‘बजा रहा था’; इसलिए वर्तमानकालिक ‘हैं’ काल की संगति तोड़ देता है।
‘थी’ और ‘थीं’ स्त्रीलिंग रूप हैं, जो पुल्लिंग ‘लबादा’ के साथ नहीं चल सकते। अतः उत्तर ‘था’ है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एक युवक पत्थर की बेंच पर बैठकर टिफिन खाता हुआ। उससे कुछ दूर एक उम्रदराज मगर तंदुरुस्त आदमी शहनाई जैसा____(76) - बैगपाइपर (bagpiper) बजा रहा था। उसने काला लबादा गाउन पहन रखा ____(77)। कपड़े-जूते ठीक-ठाक पहन रखे थे। हैट भी लगा रखा था। उसके सामने जमीन पर कोट और कपड़ों का बना संदूकनुमा बाक्स था। बाक्स में कुछ सिक्के थे। वह खड़ा होकर वाद्य ____(78) रहा था। उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे जैसे हमारे यहाँ भी शहनाई बजाते समय या शंख फूँकते समय। लोग उसके सामने से अदब ____(79) से गुजर रहे थे। एक-दो लोगों ने उसे अभिवादन भी किया। कुछ लोग करीब जाते और झुककर बाक्स में पेंस (सिक्के) डाल देते। दूर से फेंकता कोई नहीं था। वह एक भिखारी था लेकिन यहाँ उसे स्ट्रीट आर्टिस्ट (सड़क कलाकार) कहा जाता है। भिक्षा या दान भी यहाँ कला के माध्यम से लिया जाता है। कोई माँगता या गुहार नहीं लगाता। या तो चुप बैठा रहता है या संगीत कला या गायन के माध्यम से वह लोगों का ध्यान आकृष्ट करता है। यह दृश्य मुझे सुखद विस्मय से भर गया। मैं देर तक उसे वाद्य बजाते देखता-सुनता रहा। पास में पेंस (सिक्के) ____ (80) न होने का अफसोस हुआ। भिक्षा के लिए यहाँ हाथ फैलाने की परंपरा नहीं है।
रिक्त स्थान के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.बजा
B.रो
C.चल
D.गा
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति (सकर्मक क्रिया)
रिक्त स्थान पर ऐसी सकर्मक क्रिया का धातु-रूप चाहिए जो ‘वाद्य’ को कर्म के रूप में ले सके - ‘वह खड़ा होकर वाद्य बजा रहा था।’
आगे का वाक्य ‘उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे’ इसी की पुष्टि करता है।
‘रो’, ‘चल’ और ‘गा’ अकर्मक अथवा भिन्न कर्म वाली क्रियाएँ हैं; इनके साथ ‘वाद्य’ कर्म नहीं बन सकता (‘वाद्य गा रहा था’, ‘वाद्य चल रहा था’ - अशुद्ध)। अतः उत्तर ‘बजा’ है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एक युवक पत्थर की बेंच पर बैठकर टिफिन खाता हुआ। उससे कुछ दूर एक उम्रदराज मगर तंदुरुस्त आदमी शहनाई जैसा____(76) - बैगपाइपर (bagpiper) बजा रहा था। उसने काला लबादा गाउन पहन रखा ____(77)। कपड़े-जूते ठीक-ठाक पहन रखे थे। हैट भी लगा रखा था। उसके सामने जमीन पर कोट और कपड़ों का बना संदूकनुमा बाक्स था। बाक्स में कुछ सिक्के थे। वह खड़ा होकर वाद्य ____(78) रहा था। उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे जैसे हमारे यहाँ भी शहनाई बजाते समय या शंख फूँकते समय। लोग उसके सामने से अदब ____(79) से गुजर रहे थे। एक-दो लोगों ने उसे अभिवादन भी किया। कुछ लोग करीब जाते और झुककर बाक्स में पेंस (सिक्के) डाल देते। दूर से फेंकता कोई नहीं था। वह एक भिखारी था लेकिन यहाँ उसे स्ट्रीट आर्टिस्ट (सड़क कलाकार) कहा जाता है। भिक्षा या दान भी यहाँ कला के माध्यम से लिया जाता है। कोई माँगता या गुहार नहीं लगाता। या तो चुप बैठा रहता है या संगीत कला या गायन के माध्यम से वह लोगों का ध्यान आकृष्ट करता है। यह दृश्य मुझे सुखद विस्मय से भर गया। मैं देर तक उसे वाद्य बजाते देखता-सुनता रहा। पास में पेंस (सिक्के) ____ (80) न होने का अफसोस हुआ। भिक्षा के लिए यहाँ हाथ फैलाने की परंपरा नहीं है।
उपरोक्त गद्यांश के आधार पर निम्न चिह्नित शब्द का विपरीत शब्द पहचानें।
लोग उसके सामने से अदब से गुजर रहे थे।
A.नज़रअंदाज़
B.बेअदब
C.बुरा अदब
D.बैअदब
Solution
गद्यांश - विलोम शब्द
‘अदब’ उर्दू से आया शब्द है, जिसका अर्थ है - शिष्टता, सम्मान, तमीज़। गद्यांश में लोग सड़क कलाकार के सामने से आदरपूर्वक निकल रहे थे।
‘बे-’ उपसर्ग निषेध का बोध कराता है, अतः ‘अदब’ का सीधा विपरीत शब्द ‘बेअदब’ है, जिसका अर्थ है - शिष्टाचार रहित, गुस्ताख़।
‘नज़रअंदाज़’ का अर्थ है अनदेखा कर देना, उपेक्षा करना - यह ‘अदब’ का विलोम नहीं, केवल भाव से मिलता-जुलता भ्रामक विकल्प है।
‘बुरा अदब’ हिंदी का कोई मानक शब्द नहीं, दो शब्दों का कृत्रिम जोड़ मात्र है; और ‘बेअदबी’ ‘बेअदब’ से बनी भाववाचक संज्ञा (अशिष्टता) है, जबकि प्रश्न में मूल शब्द का विपरीत शब्द अपेक्षित है।
अतः उत्तर ‘बेअदब’ है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एक युवक पत्थर की बेंच पर बैठकर टिफिन खाता हुआ। उससे कुछ दूर एक उम्रदराज मगर तंदुरुस्त आदमी शहनाई जैसा____(76) - बैगपाइपर (bagpiper) बजा रहा था। उसने काला लबादा गाउन पहन रखा ____(77)। कपड़े-जूते ठीक-ठाक पहन रखे थे। हैट भी लगा रखा था। उसके सामने जमीन पर कोट और कपड़ों का बना संदूकनुमा बाक्स था। बाक्स में कुछ सिक्के थे। वह खड़ा होकर वाद्य ____(78) रहा था। उसके गाल वाद्य बजाने के कारण फूल-फूल जा रहे थे जैसे हमारे यहाँ भी शहनाई बजाते समय या शंख फूँकते समय। लोग उसके सामने से अदब ____(79) से गुजर रहे थे। एक-दो लोगों ने उसे अभिवादन भी किया। कुछ लोग करीब जाते और झुककर बाक्स में पेंस (सिक्के) डाल देते। दूर से फेंकता कोई नहीं था। वह एक भिखारी था लेकिन यहाँ उसे स्ट्रीट आर्टिस्ट (सड़क कलाकार) कहा जाता है। भिक्षा या दान भी यहाँ कला के माध्यम से लिया जाता है। कोई माँगता या गुहार नहीं लगाता। या तो चुप बैठा रहता है या संगीत कला या गायन के माध्यम से वह लोगों का ध्यान आकृष्ट करता है। यह दृश्य मुझे सुखद विस्मय से भर गया। मैं देर तक उसे वाद्य बजाते देखता-सुनता रहा। पास में पेंस (सिक्के) ____ (80) न होने का अफसोस हुआ। भिक्षा के लिए यहाँ हाथ फैलाने की परंपरा नहीं है।
उपलब्ध विकल्पों में से कौन सा विकल्प निम्नलिखित वाक्य के चिह्नित शब्द का पर्यायवाची शब्द नहीं है?
पास में पेंस (सिक्के) न होने का अफसोस हुआ।
A.रूपक
B.धाक
C.मुद्रा
D.टंक
Solution
गद्यांश - पर्यायवाची शब्द
प्रश्न उलटा है - यहाँ वह विकल्प चुनना है जो ‘सिक्का’ का पर्यायवाची नहीं है।
‘मुद्रा’ का अर्थ है प्रचलित सिक्का या धन; ‘टंक’ संस्कृत ‘टङ्क’ से बना है और चाँदी के सिक्के के अर्थ में प्रयुक्त होता है; ‘धाक’ ‘सिक्का’ के आलंकारिक अर्थ - रौब, प्रभाव - का पर्याय है, जैसे ‘उसका सिक्का जमता है’।
‘रूपक’ का अर्थ है एक अर्थालंकार तथा नाट्य-प्रस्तुति का एक रूप; सिक्के अथवा मुद्रा से इसका कोई संबंध नहीं।
अतः जो पर्यायवाची नहीं है, वह ‘रूपक’ है।
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