SSC GD Constable 4 February 2025 · Shift 3 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 15 of 210
4 February 2025 · Shift 3
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
भारत गुटों से अलग रहने वाले देशों में शामिल है। ‘गुटों से अलग रहने वाले’ वाक्यांश के स्थान पर उचित शब्द होगा-
A.स्वतंत्र
B.विकासशील
C.सापेक्ष
D.तटस्थ
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
'गुटों से अलग रहने वाला' अर्थात् जो किसी पक्ष या गुट में सम्मिलित न हो, निष्पक्ष बना रहे; इस वाक्यांश के लिए एक शब्द 'तटस्थ' है।
विकल्पों के अर्थ: स्वतंत्र = जो किसी के अधीन न हो; विकासशील = जो विकास की ओर अग्रसर हो, पूर्ण विकसित न हुआ हो; सापेक्ष = जो किसी दूसरे की अपेक्षा या संदर्भ से जाना जाए; तटस्थ = किसी भी पक्ष में सम्मिलित न होने वाला।
'स्वतंत्र' का भाव परतंत्रता का अभाव है, गुट-निरपेक्षता का नहीं; इसी कारण वह भ्रामक विकल्प बनता है।
अतः सही उत्तर विकल्प (d) 'तटस्थ' है।
82
सरल वाक्य ‘दुर्भाग्य से वह परीक्षा में बैठ न सका।’ निम्नलिखित विकल्पों में से इस वाक्य के लिए कौन-सा एक उचित संयुक्त वाक्य होगा?
A.उसका दुर्भाग्य था और इसलिए वह परीक्षा में बैठ न सका।
B.उसका दुर्भाग्य कि परीक्षा में बैठ न सका।
C.उसका दुर्भाग्य था और परीक्षा में पास न हुआ।
D.इसलिए वह परीक्षा में उसका दुर्भाग्य था और बैठ न सका।
Solution
वाक्य-रूपांतरण (सरल से संयुक्त वाक्य)
संयुक्त वाक्य वह होता है जिसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य 'और, किन्तु, इसलिए, या, फिर भी' जैसे समुच्चयबोधक शब्दों से जुड़े हों।
विकल्प (a) में 'उसका दुर्भाग्य था' तथा 'वह परीक्षा में बैठ न सका' दोनों स्वतंत्र उपवाक्य 'और इसलिए' से जुड़े हैं और मूल वाक्य का अर्थ भी ज्यों-का-त्यों सुरक्षित है।
(b) में योजक 'कि' है, जो आश्रित उपवाक्य जोड़कर मिश्र वाक्य बनाता है; (c) में 'बैठ न सका' के स्थान पर 'पास न हुआ' कर देने से अर्थ ही बदल जाता है; (d) का शब्द-क्रम अशुद्ध और अर्थहीन है।
अतः सही उत्तर विकल्प (a) है।
83
निम्न में से किस वाक्य में सम्बन्धवाचक सर्वनाम नहीं है?
A.जिसकी लाठी उसकी भैंस।
B.उसने कुछ नहीं खाया।
C.वह कौन है जो जा रहा है।
D.जो सोएगा सो खोएगा।
Solution
सर्वनाम
सम्बन्धवाचक सर्वनाम वे हैं जो एक उपवाक्य का दूसरे उपवाक्य से सम्बन्ध जोड़ते हैं, जैसे जो, सो, जिसकी, उसकी, जैसा-वैसा।
(a) 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' में 'जिसकी-उसकी', (c) 'वह कौन है जो जा रहा है' में 'जो', तथा (d) 'जो सोएगा सो खोएगा' में 'जो-सो' सम्बन्धवाचक सर्वनाम हैं।
(b) 'उसने कुछ नहीं खाया' में 'उसने' पुरुषवाचक और 'कुछ' अनिश्चयवाचक सर्वनाम है; यहाँ कोई सम्बन्धवाचक सर्वनाम नहीं है।
अतः सही उत्तर विकल्प (b) है।
84
दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
किसी शुभ कार्य को विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक करना
A.अर्चना
B.श्रद्धा
C.यज्ञ
D.अनुष्ठान
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
किसी शुभ कार्य को विधि-विधान तथा श्रद्धापूर्वक सम्पन्न करना 'अनुष्ठान' कहलाता है।
विकल्पों के अर्थ: अर्चना = देव-प्रतिमा की पूजा-स्तुति; श्रद्धा = आदरयुक्त विश्वास, जो एक मनोभाव है, कोई कर्म नहीं; यज्ञ = अग्नि में आहुति देकर किया जाने वाला वैदिक कर्म; अनुष्ठान = विधिपूर्वक किया जाने वाला शुभ कर्म।
'यज्ञ' अनुष्ठान का एक भेद मात्र है और उसका अर्थ सीमित है, जबकि प्रश्न 'किसी शुभ कार्य' की बात करता है; इसलिए व्यापक शब्द ही उपयुक्त है।
अतः सही उत्तर विकल्प (d) 'अनुष्ठान' है।
85
‘हाथ का मैल होना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
A.अत्यंत खट्टा होना
B.अत्यंत बड़ा होना
C.अत्यंत तुच्छ होना
D.अत्यंत मीठा होना
Solution
मुहावरे
'हाथ का मैल होना' मुहावरे का अर्थ है अत्यंत तुच्छ अथवा महत्वहीन होना; यह प्रायः धन के लिए प्रयुक्त होता है, जैसे 'धन तो हाथ का मैल है, आज है कल नहीं'।
शेष विकल्प मुहावरे का लाक्षणिक अर्थ नहीं देते: 'अत्यंत खट्टा होना' और 'अत्यंत मीठा होना' स्वादबोधक शाब्दिक अर्थ हैं, जिनका इस मुहावरे से कोई सम्बन्ध नहीं।
'अत्यंत बड़ा होना' तो मुहावरे के अर्थ का ठीक उल्टा है, क्योंकि मैल को महत्वहीन वस्तु माना गया है।
अतः सही उत्तर विकल्प (c) 'अत्यंत तुच्छ होना' है।
86
‘आपने चाय-वाय पी ली होगी।’ वाक्य में प्रयुक्त चाय-वाय किस प्रकार का शब्द-युग्म है?
A.पर्यायवाची
B.एकार्थी-अनेकार्थी
C.सार्थक-निरर्थक
D.विलोम शब्द
Solution
शब्द-युग्म (सार्थक-निरर्थक)
जब किसी सार्थक शब्द के साथ उसी की ध्वनि पर गढ़ा हुआ अर्थहीन शब्द जोड़ दिया जाता है, तो वह सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म कहलाता है, जैसे पानी-वानी, रोटी-वोटी, खाना-वाना।
'चाय' सार्थक शब्द है (एक पेय पदार्थ), किन्तु 'वाय' का स्वतंत्र रूप से कोई अर्थ नहीं निकलता; अतः 'चाय-वाय' सार्थक-निरर्थक युग्म है।
पर्यायवाची युग्म में दोनों शब्द सार्थक तथा समानार्थी होते हैं और विलोम युग्म में दोनों सार्थक तथा विपरीतार्थी; यहाँ दूसरा शब्द ही निरर्थक है, इसलिए वे विकल्प कट जाते हैं।
अतः सही उत्तर विकल्प (c) है।
87
‘आसक्ति’ का उपयुक्त एकार्थक शब्द है-
A.घृणा
B.गहरी चाह
C.निर्गुण
D.कुशल
Solution
एकार्थक शब्द
एकार्थक शब्द वे हैं जिनका एक ही निश्चित अर्थ होता है। 'आसक्ति' का अर्थ है किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति गहरा लगाव, अनुराग अथवा गहरी चाह।
विकल्पों के अर्थ: घृणा = नफ़रत, अरुचि; गहरी चाह = तीव्र लगाव, अर्थात् आसक्ति; निर्गुण = गुणों से रहित, निराकार; कुशल = दक्ष, निपुण।
'घृणा' आसक्ति का ठीक विपरीत भाव है, तथा 'निर्गुण' एवं 'कुशल' का इस शब्द से कोई अर्थ-सम्बन्ध नहीं है।
अतः सही उत्तर विकल्प (b) 'गहरी चाह' है।
88
‘यहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालुम नहीं है।’
उपरोक्त वाक्य में वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धि है। इसके शुद्ध रूप का चयन करें-
A.यहां किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नहीं है।
B.यहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालुम नहीं है।
C.यहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नहीं है।
D.यहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नही है।
Solution
वर्तनी शुद्धि
दिए गए वाक्य में 'मालुम' की वर्तनी अशुद्ध है; इस शब्द का शुद्ध रूप 'मालूम' है, जिसमें 'लू' दीर्घ ऊकार के साथ लिखा जाता है।
शुद्ध वाक्य होगा: 'यहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नहीं है।'
(a) में 'यहाँ' के स्थान पर अनुस्वारयुक्त 'यहां' लिख दिया गया है, जो वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है; (b) में मूल अशुद्धि 'मालुम' ज्यों-की-त्यों बनी हुई है; (d) में 'नहीं' के स्थान पर 'नही' है, अर्थात् अनुस्वार छूट गया है।
अतः सही उत्तर विकल्प (c) है।
89
दिए गए शब्द का सही पर्यायवाची शब्द पहचानिए-
ब्रह्म
A.लोकेश
B.पशुपति
C.नीलकंठ
D.महेश्वर
Solution
पर्यायवाची शब्द
'ब्रह्म' अथवा 'ब्रह्मा' के पर्यायवाची हैं: विधि, स्वयंभू, पितामह, विरंचि, चतुरानन, कमलासन, हिरण्यगर्भ तथा लोकेश।
विकल्पों के अर्थ: लोकेश = लोकों का स्वामी, अर्थात् ब्रह्मा; पशुपति = पशुओं अर्थात् समस्त जीवों के स्वामी, शिव; नीलकंठ = विषपान के कारण जिनका कंठ नीला पड़ गया, शिव; महेश्वर = महान् ईश्वर, शिव।
तीन विकल्प एक ही देवता शिव के नाम हैं, अतः शेष बचा हुआ विकल्प ही अभीष्ट उत्तर होगा।
अतः सही उत्तर विकल्प (a) 'लोकेश' है।
90
निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और बताएं कि चिह्नित वाक्यांश में किस प्रकार की त्रुटि है?
वह बहुत ज्ञानी व्यक्ति है। उसने अनेकों ग्रन्थों की रचना की है।
A.लिंग
B.अव्यय
C.विशेषण
D.वचन
Solution
वाक्य में त्रुटि (वचन)
'अनेक' शब्द स्वयं में बहुवचन का बोधक है, इसका अर्थ ही है 'एक से अधिक' या 'बहुत सारे'।
बहुवचनवाची शब्द पर पुनः बहुवचन का चिह्न लगाकर 'अनेकों' बनाना वचन-सम्बन्धी अशुद्धि है।
शुद्ध वाक्य होगा: 'वह बहुत ज्ञानी व्यक्ति है। उसने अनेक ग्रन्थों की रचना की है।'
चिह्नित वाक्यांश में लिंग, अव्यय अथवा विशेषण-चयन की कोई त्रुटि नहीं है, त्रुटि केवल वचन की है; अतः सही उत्तर विकल्प (d) है।
91
‘सारे कलाकार ऊपर हैं।’ उपर्युक्त वाक्य का सार्थक किस क्रिया-विशेषण से है?
A.स्थानवाचक क्रिया-विशेषण
B.कालवाचक क्रिया-विशेषण
C.रीतिवाचक क्रिया-विशेषण
D.परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
Solution
क्रिया-विशेषण
जो अविकारी शब्द क्रिया के होने के स्थान का बोध कराते हैं, वे स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहलाते हैं, जैसे ऊपर, नीचे, भीतर, बाहर, दूर, पास, यहाँ, वहाँ।
'सारे कलाकार ऊपर हैं।' में 'ऊपर' शब्द कलाकारों के होने के स्थान को बता रहा है।
यहाँ न समय (कब), न रीति (किस प्रकार) और न ही परिमाण (कितना) का बोध हो रहा है, इसलिए कालवाचक, रीतिवाचक तथा परिमाणवाचक विकल्प अनुपयुक्त हैं।
अतः सही उत्तर विकल्प (a) 'स्थानवाचक क्रिया-विशेषण' है।
92
‘जलजीवन’ पर्याय है-
A.पानी का
B.नदी का
C.समुद्र का
D.मछली का
Solution
पर्यायवाची शब्द
'जलजीवन' का शाब्दिक अर्थ है 'जल ही जिसका जीवन हो', अर्थात् जल में ही जीवित रहने वाला प्राणी; यह मछली का पर्यायवाची है।
मछली के पर्यायवाची: मीन, मत्स्य, झष, शफरी, जलजीवन, मकरी।
भ्रम इसलिए होता है कि 'जीवन' शब्द अकेले जल का पर्यायवाची है (जल, नीर, वारि, तोय, सलिल, अंबु, उदक, जीवन); किन्तु समस्त पद 'जलजीवन' जल का नहीं, जल में जीने वाले प्राणी का वाचक है।
नदी के पर्यायवाची सरिता, तटिनी, आपगा तथा समुद्र के पर्यायवाची सागर, जलधि, रत्नाकर हैं; इनमें 'जलजीवन' कहीं नहीं आता।
अतः सही उत्तर विकल्प (d) 'मछली का' है।
93
दिए गए वाक्य में शब्द या वाक्य खंड को बदलिए।
मेरे पीछे आप आये।
A.मेरे पीछे ही आप आये।
B.आप आये मेरे पीछे।
C.मेरे बाद आप आये।
D.मेरे आने के पीछे आप आये।
Solution
वाक्य-शुद्धि (उपयुक्त शब्द-चयन)
'पीछे' शब्द स्थान का बोध कराता है, जैसे 'वह मेरे पीछे खड़ा है'; जबकि यहाँ आने के समय-क्रम का बोध अभीष्ट है।
समय-क्रम अर्थात् 'बाद में' के अर्थ में शुद्ध शब्द 'बाद' है, अतः शुद्ध वाक्य होगा: 'मेरे बाद आप आये।'
(a) और (b) में वही अशुद्ध शब्द 'पीछे' बना रहता है, केवल बल अथवा शब्द-क्रम बदलता है; (d) वाक्य को अनावश्यक रूप से लम्बा करके भी अर्थ स्पष्ट नहीं करता।
अतः सही उत्तर विकल्प (c) है।
94
निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा एक विलोम युग्म सही नहीं है?
A.खग-मृग
B.गमन-लाघव
C.गुप्त-प्रकट
D.गमन-आगमन
Solution
विलोम शब्द
विलोम युग्म में दोनों शब्दों का अर्थ परस्पर विपरीत होना चाहिए।
'गमन' का अर्थ है जाना और इसका विलोम 'आगमन' अर्थात् आना है, जो विकल्प (d) में ठीक-ठीक दिया गया है।
'लाघव' का अर्थ है लघुता या हल्कापन और इसका विलोम 'गौरव' अर्थात् बड़प्पन या भारीपन होता है, न कि 'गमन'।
इस प्रकार एक ही शब्द 'गमन' दो युग्मों में रखकर भ्रम उत्पन्न किया गया है; उनमें से 'गमन-लाघव' असंगत युग्म है।
(c) में गुप्त (छिपा हुआ) और प्रकट (सामने आया हुआ) शुद्ध विलोम हैं; (a) में खग अर्थात् आकाश में उड़ने वाला पक्षी और मृग अर्थात् धरती पर विचरने वाला हिरन परस्पर विरोधी कोटियों के प्राणी हैं।
अतः जो युग्म सही नहीं है, वह विकल्प (b) 'गमन-लाघव' है।
95
‘रक्षिका आज अपने घर-वर गयी होगी।’ वाक्य में प्रयुक्त घर-वर किस प्रकार के शब्द-युग्म के अंतर्गत आएँगे?
A.सार्थक-सार्थक
B.निरर्थक-निरर्थक
C.शब्द विलोम
D.सार्थक-निरर्थक
Solution
शब्द-युग्म (सार्थक-निरर्थक)
'घर' सार्थक शब्द है, जिसका अर्थ है निवास-स्थान; किन्तु उसके साथ जुड़ा 'वर' यहाँ ध्वनि-साम्य से गढ़ा गया शब्द है और इस युग्म में उसका कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं है।
अतः 'घर-वर' सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म है, ठीक वैसे ही जैसे चाय-वाय, पानी-वानी, रोटी-वोटी।
यदि दोनों शब्द अर्थवान होते तो युग्म सार्थक-सार्थक कहलाता, जैसे माता-पिता; और दोनों अर्थहीन होते तो निरर्थक-निरर्थक, जैसे ऊल-जलूल।
यहाँ पहला शब्द अर्थवान तथा दूसरा अर्थहीन है और दोनों में विपरीतार्थकता भी नहीं है, इसलिए 'शब्द विलोम' विकल्प भी गलत है।
अतः सही उत्तर विकल्प (d) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
महात्मा फुले के अनुसार-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, उस परिवार को किस प्रकार के परिवार की संज्ञा दी है?
A.परिपूर्ण परिवार
B.शिक्षित परिवार
C.स्वतंत्र परिवार
D.आदर्श परिवार
Solution
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश में स्पष्ट लिखा है कि आदर्श परिवार के विषय में महात्मा फुले की अवधारणा यह थी कि जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है।
इससे स्पष्ट है कि उन्होंने ऐसे परिवार को 'आदर्श परिवार' की संज्ञा दी, क्योंकि उसमें सर्वधर्म समभाव विद्यमान है।
'परिपूर्ण परिवार', 'शिक्षित परिवार' अथवा 'स्वतंत्र परिवार' जैसा कोई पद गद्यांश में प्रयुक्त ही नहीं हुआ है।
अतः सही उत्तर विकल्प (d) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
‘महात्मा’ शब्द में किस संधि का प्रयोग हुआ है?
A.महा + आत्मा
B.मह + आत्मा
C.महा + अत्मा
D.महात् + आ
Solution
संधि-विच्छेद
'महात्मा' का संधि-विच्छेद है महा + आत्मा। यहाँ 'महा' का अंतिम 'आ' तथा 'आत्मा' का आदि 'आ' मिलकर दीर्घ 'आ' हो गया है।
नियम: अ अथवा आ के बाद अ अथवा आ आने पर दोनों मिलकर दीर्घ 'आ' हो जाते हैं; यह दीर्घ स्वर संधि है। जैसे हिम + आलय = हिमालय, विद्या + आलय = विद्यालय।
(b) में 'मह' कोई सिद्ध पद नहीं है; (c) में 'अत्मा' अशुद्ध रूप है; (d) 'महात् + आ' निरर्थक विच्छेद है।
अतः सही उत्तर विकल्प (a) 'महा + आत्मा' है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
महात्मा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से कब सम्मानित किया गया?
A.1888
B.1886
C.1887
D.1889
Solution
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश में उल्लेख है कि सन् 1888 में जब ज्योतिबा फुले को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया गया, तब उन्होंने अपने संघर्ष को पूर्णविराम न देने की बात कही थी।
अतः उपाधि से सम्मानित किए जाने का वर्ष 1888 है और शेष तीनों वर्ष गद्यांश में कहीं नहीं आए हैं।
अतः सही उत्तर विकल्प (a) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी क्या विशेषता थी?
A.जो देखते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
B.जो सुनते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
C.जो कहते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
D.जो कहते थे वह अपने आचरण एवं व्यवहार में कभी नहीं उतारते थे।
Solution
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश की अंतिम पंक्ति के अनुसार महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे जो कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
अर्थात् उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था।
(a) और (b) में 'कहते' के स्थान पर 'देखते' तथा 'सुनते' रखकर मूल कथन बदल दिया गया है; (d) गद्यांश के आशय का ठीक उल्टा है।
अतः सही उत्तर विकल्प (c) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक होगा?
A.ज्योतिबा फुले के राजनीतिक विचार
B.ज्योतिबा फुले के जाति सम्बन्धी विचार
C.ज्योतिबा फुले के आदर्श विचार
D.ज्योतिबा फुले के नारी सम्बन्धी विचार
Solution
गद्यांश (शीर्षक चयन)
उपयुक्त शीर्षक वही होता है जो पूरे गद्यांश के केंद्रीय भाव को संक्षेप में प्रकट कर दे।
यह गद्यांश फुले की पुस्तकों में संगृहीत मौलिक विचारों, आदर्श परिवार की उनकी अवधारणा, 'महात्मा' उपाधि पर दी गई उनकी विनम्र प्रतिक्रिया तथा कथनी-करनी की एकता पर केंद्रित है; ये सब उनके आदर्श विचार ही हैं।
गद्यांश में न तो राजनीति की, न जाति-व्यवस्था की और न ही नारी-सम्बन्धी विचारों की कोई विशेष चर्चा है, इसलिए वे तीनों शीर्षक गद्यांश का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
अतः सही उत्तर विकल्प (c) 'ज्योतिबा फुले के आदर्श विचार' है।
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