SSC GD Constable 6 February 2025 · Shift 1 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 35 of 210
6 February 2025 · Shift 1
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
‘गृहस्थ’ का विलोम शब्द नीचे दिए विकल्पों में से चुनिए-
A.ब्रह्मचर्य
B.संन्यासी
C.ग्रामवासी
D.वानप्रस्थ
Solution
विलोम शब्द
‘गृहस्थ’ वह है जो विवाह करके घर-परिवार में रहता है और सांसारिक दायित्व निभाता है।
इसका ठीक उल्टा वह है जो घर-गृहस्थी त्यागकर विरक्त हो जाए - अर्थात् ‘संन्यासी’।
ब्रह्मचर्य - आश्रम अथवा भाव का नाम है, व्यक्तिवाचक विलोम नहीं; गृहस्थ (व्यक्ति) का विलोम भी व्यक्ति ही होगा।
ग्रामवासी - गाँव में रहने वाला; इसका विलोम ‘नगरवासी’ होता है, गृहस्थ नहीं।
वानप्रस्थ - गृहस्थ के बाद का तीसरा आश्रम है, अर्थात् उसका अगला चरण, विलोम नहीं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
82
‘कौआ डाली से उड़ गया।’ इस वाक्य में ‘कौआ’ शब्द का तत्सम रूप प्रयुक्त कर वाक्य पूर्ण कीजिए।
A.काग डाली से उड़ गया।
B.पिक डाली से उड़ गया।
C.कोकिल डाली से उड़ गई।
D.कलघोष डाली से उड़ गया।
Solution
तत्सम-तद्भव
‘कौआ’ तद्भव शब्द है; इसका तत्सम रूप ‘काक’ है, जो हिंदी में ‘काग’ रूप में भी प्रयुक्त होता है।
अतः पूर्ण वाक्य होगा - काग डाली से उड़ गया।
पिक - कोयल का तत्सम पर्याय; कोकिल - कोयल; कलघोष - मधुर ध्वनि करने वाला, अर्थात् कोयल।
तीनों ही कोयल के पर्यायवाची हैं, कौए के नहीं; साथ ही (c) में ‘उड़ गई’ लिंग भी बदल देता है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
83
निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान करें। रेलगाड़ी अपनी रफ्तार में जंगलों और नदीयों को पार करते हुए दौड़े जा रही थी।
A.रेलगाड़ी
B.जंगलों
C.नदीयों
D.रफ्तार
Solution
वर्तनी
‘नदी’ के बहुवचन में इकारांत ‘ई’ ह्रस्व होकर ‘इ’ हो जाती है और ‘य’ जुड़ता है - नदी + यों = नदियों।
वाक्य में ‘नदीयों’ लिखा है, जो दीर्घ ‘ई’ रखने के कारण अशुद्ध है।
शुद्ध वाक्य - रेलगाड़ी अपनी रफ्तार में जंगलों और नदियों को पार करते हुए दौड़े जा रही थी।
‘रेलगाड़ी’, ‘जंगलों’ और ‘रफ्तार’ तीनों की वर्तनी शुद्ध है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
84
मेरी माँ अत्यन्त ____ व्यंजन बनाती हैं। रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उचित सार्थक शब्द है-
A.भोजन
B.मिष्ट
C.स्वादिष्ट
D.पकवान
Solution
रिक्त स्थान की पूर्ति
रिक्त स्थान ‘अत्यन्त’ के बाद और संज्ञा ‘व्यंजन’ के पहले है, अतः वहाँ विशेषण ही आ सकता है।
स्वादिष्ट - जिसका स्वाद उत्तम हो; पूर्ण वाक्य - मेरी माँ अत्यन्त स्वादिष्ट व्यंजन बनाती हैं।
भोजन और पकवान - दोनों संज्ञा हैं, विशेषण नहीं; ‘अत्यन्त भोजन व्यंजन’ निरर्थक है।
मिष्ट - मीठा; यह अर्थ को केवल मिठाइयों तक सीमित कर देता है, जबकि वाक्य माँ के पाक-कौशल की सामान्य प्रशंसा कर रहा है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
85
‘गार्ड ने सीटी बजायी और ट्रेन चल दी।’ निम्नलिखित विकल्पों में से इस वाक्य के लिए कौन-सा एक उचित सरल वाक्य होगा?
A.सीटी बजाते ही ट्रेन चल दी गार्ड की।
B.गार्ड की सीटी से ट्रेन चल दी।
C.ज्यों ही गार्ड ने सीटी दी ट्रेन चल दी।
D.गार्ड के सीटी बजाते ही ट्रेन चल दी।
Solution
वाक्य-रूपांतरण (सरल वाक्य)
सरल वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही मुख्य क्रिया होती है; दूसरी क्रिया को पूर्वकालिक या कृदंत रूप में बदलना पड़ता है।
‘गार्ड ने सीटी बजायी और ट्रेन चल दी।’ संयुक्त वाक्य है, क्योंकि ‘और’ दो स्वतंत्र उपवाक्यों को जोड़ रहा है।
पहली क्रिया को पूर्वकालिक कृदंत ‘बजाते ही’ बनाने पर मिलता है - गार्ड के सीटी बजाते ही ट्रेन चल दी।
(c) ‘ज्यों ही … त्यों ही’ योजक से बना मिश्र वाक्य है, सरल नहीं; (a) का पदक्रम ही अशुद्ध है।
(b) यद्यपि सरल है, पर उसमें ‘बजाना’ क्रिया लुप्त हो जाती है और मूल वाक्य का अर्थ पूरा नहीं उतरता।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
86
निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित खंड के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला सबसे उपयुक्त विकल्प चुनिए- सिंह बड़ों की सेवा के तत्पर लिए है।
A.तत्पर है
B.है के लिए तत्पर
C.के लिए तत्पर है
D.का तत्पर है
Solution
वाक्य-शुद्धि (पदक्रम)
हिंदी में संबंधसूचक ‘के लिए’ एक अखंड परसर्ग है; उसे तोड़कर बीच में कोई शब्द नहीं रखा जा सकता।
वाक्य में ‘के तत्पर लिए है’ लिखकर ‘के’ और ‘लिए’ के बीच ‘तत्पर’ घुसा दिया गया है, जिससे पदक्रम बिगड़ गया।
शुद्ध क्रम है - कर्म + के लिए + विशेषण + क्रिया, अर्थात् ‘के लिए तत्पर है’।
शुद्ध वाक्य - सिंह बड़ों की सेवा के लिए तत्पर है।
(a) में ‘के लिए’ पूरा ही लुप्त है, (b) का क्रम उलटा है और (d) में ‘का’ संबंध कारक यहाँ असंगत है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
87
शब्द या वाक्यखंड बदलें और उत्तर के रूप में सही विकल्प चुनें। मैंने एक वर्ष तक उनकी प्रतीक्षा देखी।
A.मैंने सिर्फ वर्ष उनकी प्रतीक्षा देखी।
B.मैं एक वर्ष उसकी प्रतीक्षा किया।
C.मैंने एक वर्ष तक उनकी प्रतीक्षा की।
D.मैंने एक वर्ष उनकी प्रतीक्षा की।
Solution
वाक्य-शुद्धि (क्रिया प्रयोग)
‘प्रतीक्षा’ के साथ शुद्ध क्रिया ‘करना’ है; ‘प्रतीक्षा देखना’ अशुद्ध सहप्रयोग है।
साथ ही अवधि बताने के लिए ‘एक वर्ष तक’ में ‘तक’ आवश्यक है, जो सीमा का बोध कराता है।
शुद्ध वाक्य - मैंने एक वर्ष तक उनकी प्रतीक्षा की।
(a) में ‘देखी’ की अशुद्धि बनी हुई है; (b) में ‘मैं … किया’ से कर्ता-क्रिया की अन्विति टूटती है (‘मैंने … किया’ चाहिए)।
(d) यद्यपि क्रिया शुद्ध कर देता है, पर ‘तक’ हटा देने से अवधि का भाव अधूरा रह जाता है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
88
निम्नलिखित मुहावरे के रेखांकित अशुद्ध भाग को उचित विकल्प से बदलें- ‘छाती पर चना दलना।’
A.जौ
B.उड़द
C.चावल
D.मूँग
Solution
मुहावरा
शुद्ध मुहावरा है - ‘छाती पर मूँग दलना’, जिसका अर्थ है पास रहकर लगातार कष्ट देना।
मुहावरे रूढ़ होते हैं; उनमें कोई भी शब्द अपनी इच्छा से नहीं बदला जा सकता, अतः ‘चना’ के स्थान पर ‘मूँग’ ही आएगा।
भाव यह है कि मूँग दलने के लिए उसे रगड़ना पड़ता है - किसी की छाती पर वैसा करना निकट रहकर सताने का चित्र है।
जौ, उड़द और चावल - तीनों अन्न अवश्य हैं, पर इस मुहावरे में इनका प्रयोग नहीं होता।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
89
‘महाभारत के युद्ध में कौरवों के ____ का नाश हो गया।’ ‘तुम्हारे पास ____ कितने रुपये हैं?’ उपर्युक्त वाक्यों में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त अनेकार्थी शब्द है-
A.परिवार
B.वंश
C.कूल
D.कुल
Solution
अनेकार्थी शब्द
प्रश्न ऐसा शब्द माँगता है जो दोनों वाक्यों में अलग-अलग अर्थ देते हुए भी उपयुक्त बैठे।
‘कुल’ के दो अर्थ हैं - (1) वंश या परिवार, (2) सम्पूर्ण, जोड़, समग्र।
पहले वाक्य में - महाभारत के युद्ध में कौरवों के कुल (वंश) का नाश हो गया।
दूसरे वाक्य में - तुम्हारे पास कुल (कुल मिलाकर) कितने रुपये हैं?
परिवार और वंश केवल पहले वाक्य में चलते हैं, दूसरे में नहीं; ‘कूल’ का अर्थ ‘किनारा/तट’ है और वह दीर्घ ऊकार वाला भिन्न शब्द है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
90
‘निहत्था’ का विलोम है-
A.हथियारविहीन
B.हत्यारा
C.हथियारबंद
D.हथियारहीन
Solution
विलोम शब्द
‘निहत्था’ = जिसके हाथ में कोई हथियार न हो, नि: + हत्था।
इसका विलोम वह होगा जो हथियारों से लैस हो - ‘हथियारबंद’।
हथियारविहीन और हथियारहीन - दोनों ‘निहत्था’ के ही पर्यायवाची हैं, विलोम नहीं; यही इस प्रश्न का जाल है।
हत्यारा - हत्या करने वाला; यह ‘हत्था’ से ध्वनि-साम्य भर रखता है, अर्थ में कोई संबंध नहीं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
91
‘जिसे मारना उचित न हो’ उपर्युक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
A.अवंश
B.अवधेय
C.अवध्य
D.अवक
Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
‘वध्य’ का अर्थ है - जिसका वध किया जाना उचित हो; उसमें निषेधवाचक उपसर्ग ‘अ’ जोड़ने पर बनता है ‘अवध्य’।
अवध्य = जिसे मारना उचित न हो। यही अभीष्ट एक शब्द है।
अवंश - जिसका कोई वंश न हो; प्रश्न के भाव से इसका कोई संबंध नहीं।
अवधेय - ध्यान देने योग्य (अव + धा); ध्वनि-साम्य के कारण यह सबसे बड़ा भ्रम पैदा करता है।
अवक - हिंदी का कोई प्रचलित सार्थक शब्द नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
92
दिए गए वाक्य के रेखांकित शब्द के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान करें-
A.लड़कपन में कई बार बड़ी गलतियाँ हो जाती हैं।
B.जिसके व्यवहार में नम्रता नहीं वह मनुष्य सफल नहीं हो सकता।
C.आजकल बहुत सर्दी पड़ रही है।
D.यह पानी तो बहुत गर्म है इससे नहाना मुश्किल है।
Solution
भाववाचक संज्ञा
चारों वाक्यों में रेखांकित शब्द की परख इस दृष्टि से करनी है कि वह भाववाचक संज्ञा है या नहीं।
‘लड़कपन’ (लड़का + पन), ‘नम्रता’ (नम्र + ता) और ‘सर्दी’ - तीनों भाववाचक संज्ञाएँ हैं और अपने-अपने वाक्य में संज्ञा के रूप में ही प्रयुक्त हैं।
‘गर्म’ भाववाचक संज्ञा नहीं, विशेषण है; उससे बनी भाववाचक संज्ञा ‘गर्मी’ होती है।
अतः संज्ञा की दृष्टि से (d) ही असंगत वाक्य है - वहाँ रेखांकित शब्द संज्ञा है ही नहीं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
93
‘कृतज्ञ’ का विलोम शब्द है-
A.कृपण
B.कुटिल
C.कपटी
D.कृतघ्न
Solution
विलोम शब्द
‘कृतज्ञ’ = कृत (किया हुआ उपकार) + ज्ञ (जानने वाला), अर्थात् उपकार मानने वाला।
इसका विलोम ‘कृतघ्न’ है = कृत + घ्न (नष्ट करने वाला), अर्थात् किए हुए उपकार को भुला देने वाला।
कृपण - कंजूस; इसका विलोम ‘उदार’ होता है।
कुटिल - टेढ़ी चाल वाला, और कपटी - छल करने वाला; दोनों चरित्र-दोष अवश्य बताते हैं, पर उपकार मानने-न मानने से इनका संबंध नहीं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
94
निम्न में से किस वाक्य में कारक चिह्न का अशुद्ध प्रयोग हुआ है?
A.उसे पत्र द्वारा सूचित कर दिया गया है।
B.पेट के वास्ते मनुष्य क्या नहीं करता।
C.यमुना यमुनोत्री द्वारा निकलती है।
D.हे भगवान! मुझे दुखों से बचाइए।
Solution
कारक
जहाँ किसी वस्तु के अलग होने या निकलने का भाव हो, वहाँ अपादान कारक होता है और उसका विभक्ति-चिह्न ‘से’ है।
‘यमुना यमुनोत्री द्वारा निकलती है।’ में निकलने का भाव है, अतः ‘द्वारा’ अशुद्ध है।
शुद्ध वाक्य - यमुना यमुनोत्री से निकलती है।
(a) में ‘पत्र द्वारा’ करण कारक (साधन) है और शुद्ध है; (b) में ‘के वास्ते’ सम्प्रदान का चिह्न है और शुद्ध है।
(d) में ‘हे भगवान!’ सम्बोधन तथा ‘दुखों से’ अपादान - दोनों शुद्ध हैं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
95
वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान कीजिए।
A.अगामी दिनों में हम घुमने चलेंगे।
B.कार्यक्रम शुरू किया जाए।
C.गणित पढ़ना अच्छा होता है।
D.उसे क्षमा कर दो।
Solution
वर्तनी
विकल्प (a) में दो वर्तनी-अशुद्धियाँ हैं - ‘अगामी’ और ‘घुमने’।
शुद्ध रूप हैं ‘आगामी’ (आ + गामी = आने वाला) और ‘घूमने’ (मूल क्रिया ‘घूमना’ में दीर्घ ऊ)।
शुद्ध वाक्य - आगामी दिनों में हम घूमने चलेंगे।
(b), (c) और (d) - ‘कार्यक्रम शुरू किया जाए।’, ‘गणित पढ़ना अच्छा होता है।’ तथा ‘उसे क्षमा कर दो।’ की वर्तनी पूर्णतः शुद्ध है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.ऐतिहासिक
B.औद्योगिक
C.काल्पनिक
D.सामाजिक
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
रिक्त स्थान ‘वैज्ञानिक और ____ क्षेत्र’ में है, अतः वहाँ ‘क्षेत्र’ का विशेषण चाहिए जो ‘वैज्ञानिक’ के समकक्ष हो।
‘और’ से जुड़े दोनों विशेषण एक ही कोटि के होने चाहिए - देश की प्रगति के संदर्भ में विज्ञान का सहचर ‘उद्योग’ है।
अतः ‘औद्योगिक’ उपयुक्त है; आगे ‘समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर’ भी इसी की पुष्टि करता है।
ऐतिहासिक और काल्पनिक क्षेत्र में ‘आशातीत प्रगति’ का कोई अर्थ नहीं बनता; सामाजिक क्षेत्र का ‘वैज्ञानिक’ के साथ यह युग्म प्रचलित नहीं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.स्वाधीनता
B.छुटकारा
C.पलायन
D.रक्षा
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
वाक्य है - ‘एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम ____ चाहते हैं।’ यहाँ ‘जिससे’ अपादान का बोध कराता है, अर्थात् उससे अलग होने की इच्छा।
‘छुटकारा’ के साथ ‘से’ का ही प्रयोग होता है - किसी से छुटकारा पाना/चाहना। अतः यह रिक्त स्थान में सीधे बैठ जाता है।
स्वाधीनता - राजनीतिक स्वतंत्रता; किसी दोष के संदर्भ में यह शब्द नहीं आता।
पलायन - भाग खड़ा होना; ‘पलायन चाहते हैं’ प्रयोग अशुद्ध है (‘पलायन करना’ होता है) और अर्थ भी नकारात्मक है।
रक्षा - बचाव; ‘जिससे हम रक्षा चाहते हैं’ के लिए ‘जिससे रक्षा’ नहीं, ‘जिसकी रक्षा’ या ‘बचाव’ जैसी अलग रचना चाहिए।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.बाजी
B.शर्त
C.होड़
D.पड़ी
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
वाक्य है - ‘भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की ____ लगी है।’
‘में … की ____ लगी है’ रचना प्रतिस्पर्धा का भाव माँगती है - एक-दूसरे से आगे निकलने की चढ़ा-ऊपरी।
‘होड़’ का अर्थ ही स्पर्धा/प्रतियोगिता है, और ‘होड़ लगी है’ रूढ़ सहप्रयोग है। अतः यही उपयुक्त है।
बाजी और शर्त - दोनों दाँव लगाने के अर्थ में आते हैं, जो यहाँ अभीष्ट नहीं; ‘शर्त लगी है’ का अर्थ दाँव लगना होगा, स्पर्धा नहीं।
‘पड़ी’ क्रिया रूप है, संज्ञा नहीं; ‘की पड़ी लगी है’ व्याकरण की दृष्टि से ही अशुद्ध है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.मानवीयता
B.अलौकिकता
C.अराजकता
D.नैतिकता
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
वाक्य है - ‘____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है।’ यहाँ ‘पर’ विरोध सूचित करता है।
विरोध ‘अनैतिकता’ से है, अतः रिक्त स्थान में उसका विलोम ‘नैतिकता’ ही आएगा।
पूरा गद्यांश भी यही कहता है - ‘वह है नैतिकता का पहलू’ - इसलिए यही केंद्रीय शब्द दोहराया जा रहा है।
मानवीयता और अलौकिकता ‘अनैतिकता’ के सीधे विलोम नहीं; अराजकता तो स्वयं नकारात्मक है, अतः वह भी असंगत है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.बेकदर
B.बेनकाब
C.बेकरार
D.बेअदब
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
वाक्य है - ‘उन्हें ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।’ यह भ्रष्टाचार-मुक्त समाज के संकल्प का अगला चरण है।
‘बेनकाब’ = नकाब हटाकर असली चेहरा सामने लाना, अर्थात् भंडाफोड़ करना; ‘बेनकाब करना’ रूढ़ प्रयोग है।
भ्रष्ट लोगों के विरुद्ध उठाया जाने वाला स्वाभाविक कदम उन्हें उजागर करना ही है, अतः यही उपयुक्त है।
बेकदर - जिसकी कद्र न हो; बेकरार - बेचैन; बेअदब - अशिष्ट।
ये तीनों विशेषण हैं और ‘करेंगे’ के साथ उनका सार्थक सहप्रयोग नहीं बनता।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
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