SSC GD Constable 7 February 2025 · Shift 1 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 50 of 210
7 February 2025 · Shift 1
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान करें। हाथी सूखी टहनीयां खा रहा है।
A.हाथी
B.खा
C.सूखी
D.टहनीयां
Solution
वर्तनी-शुद्धि
दिए गए वाक्य में 'टहनीयां' की वर्तनी अशुद्ध है; इसका शुद्ध रूप 'टहनियाँ' है।
नियम: 'ई' में समाप्त होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों का बहुवचन बनाते समय अंत्य 'ई' ह्रस्व 'इ' हो जाती है और 'याँ' जुड़ता है - टहनी > टहनियाँ, नदी > नदियाँ, लड़की > लड़कियाँ।
यहाँ दो चूकें हैं - 'नी' की दीर्घ मात्रा और 'यां' पर अनुस्वार, जबकि चंद्रबिंदु आना चाहिए।
'हाथी', 'सूखी' और 'खा' - तीनों शुद्ध हैं, अतः त्रुटि केवल विकल्प (d) में है।
शुद्ध वाक्य - हाथी सूखी टहनियाँ खा रहा है। इसलिए सही विकल्प (d) है।
82
निम्नलिखित वाक्य में अशुद्ध शब्द या वाक्यांश है- मैं मेरा कलम से लिखता हूँ।
A.से
B.कलम
C.लिखता
D.मेरा
Solution
वाक्य-शुद्धि (सर्वनाम)
वाक्य में 'मेरा' अशुद्ध प्रयोग है।
नियम: जब वाक्य का कर्ता और स्वामित्व रखने वाला एक ही हो, तब निजवाचक सर्वनाम 'अपना' आता है, 'मेरा/तेरा' नहीं।
'कलम' स्त्रीलिंग है, इसलिए रूप भी 'अपनी' बनेगा।
'से', 'कलम' और 'लिखता' - तीनों वाक्य में उचित हैं।
शुद्ध वाक्य - मैं अपनी कलम से लिखता हूँ। इसलिए सही विकल्प (d) है।
83
निम्नलिखित वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द का चयन कीजिए- ‘इन्द्रियों को वश में करने वाला’
A.इन्द्रियजित
B.इन्द्रजीत
C.इन्द्रियनिग्रह
D.इन्द्रियातीत
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
'इन्द्रियों को वश में करने वाला' के लिए एक शब्द 'इन्द्रियजित' है (इन्द्रिय + जित = जिसने इन्द्रियों को जीत लिया हो)।
'इन्द्रजीत' सबसे बड़ा भ्रम है - यह रावण-पुत्र मेघनाद का नाम है, जिसने इन्द्र को जीता था, इन्द्रियों को नहीं।
'इन्द्रियनिग्रह' भाववाचक संज्ञा है - इन्द्रियों को वश में रखने की क्रिया; प्रश्न में क्रिया नहीं, व्यक्ति पूछा गया है।
'इन्द्रियातीत' का अर्थ है जो इन्द्रियों की पहुँच से परे हो।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
84
‘रात्रि में गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।’ वाक्य में रेखांकित शब्द की शुद्ध वर्तनी है-
A.गरीष्ट
B.गरीश्ठ
C.गरीष्ठ
D.गरिष्ठ
Solution
शुद्ध वर्तनी
रेखांकित शब्द की शुद्ध वर्तनी 'गरिष्ठ' है, जो 'गुरु' के उत्तमावस्था रूप (गुरु + इष्ठ) से बना है और भारी, देर से पचने वाले भोजन के लिए आता है।
नियम याद रखें: पहले 'रि' ह्रस्व होता है और अंत में 'ष्ठ' (ष + ठ) आता है, जैसे श्रेष्ठ, ज्येष्ठ, वरिष्ठ, कनिष्ठ।
विकल्प (a) 'गरीष्ट' और (c) 'गरीष्ठ' में 'री' दीर्घ कर दिया गया है, तथा (a) में 'ष्ठ' के स्थान पर 'ष्ट' है।
विकल्प (b) 'गरीश्ठ' में 'ष' के स्थान पर 'श' है, जो अशुद्ध है।
शुद्ध वाक्य - रात्रि में गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए। इसलिए सही विकल्प (d) है।
85
निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित पद के बदले कौन-सा विकल्प उपयुक्त है? निराला को अभिनंदन ग्रंथ प्रदान किया गया।
A.उपहार किया गया
B.पुरस्कृत की गई
C.भेंट किया गया
D.दान की गई
Solution
रेखांकित पद का प्रतिस्थापन
रेखांकित पद 'प्रदान किया गया' के स्थान पर 'भेंट किया गया' उपयुक्त है।
नियम: अभिनंदन ग्रंथ सम्मान-स्वरूप सौंपा जाता है, और ऐसे अवसर के लिए शिष्ट तथा प्रचलित प्रयोग 'भेंट करना' ही है; 'प्रदान' प्रायः पुरस्कार, उपाधि या अनुदान के साथ आता है।
'उपहार किया गया' अशुद्ध है - 'उपहार' संज्ञा है, उसके साथ 'देना' आता है, 'करना' नहीं।
'पुरस्कृत की गई' और 'दान की गई' में लिंग-दोष है, क्योंकि 'ग्रंथ' पुल्लिंग है; साथ ही ग्रंथ न पुरस्कार है, न दान।
शुद्ध वाक्य - निराला को अभिनंदन ग्रंथ भेंट किया गया। इसलिए सही विकल्प (c) है।
86
‘वृक्ष’ का पर्याय निम्न में से है-
A.इषु
B.झख
C.भर्ता
D.गाछ
Solution
पर्यायवाची
'वृक्ष' का पर्यायवाची 'गाछ' है; इसके अन्य पर्याय हैं - पेड़, तरु, विटप, द्रुम, पादप, रूख।
'इषु' का अर्थ बाण या तीर है।
'झख' का अर्थ मछली है (झष भी इसी अर्थ में आता है)।
'भर्ता' का अर्थ पति, स्वामी या पालन करने वाला है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
87
मुहावरे और उसके अर्थ के लिए सही विकल्प चुनें। कलम तोड़ना
A.कलम तोड़ देना
B.जैसा-तैसा लिखना
C.अच्छा नहीं लिखना
D.बढ़िया लिखना
Solution
मुहावरा
'कलम तोड़ना' मुहावरे का अर्थ है - बहुत बढ़िया लिखना, लेखन में कमाल कर देना।
प्रयोग - प्रेमचंद ने 'गोदान' लिखकर कलम तोड़ दी।
विकल्प (a) मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है, और मुहावरे में शाब्दिक अर्थ कभी नहीं लिया जाता - यही यहाँ का सबसे बड़ा जाल है।
विकल्प (b) 'जैसा-तैसा लिखना' और (c) 'अच्छा नहीं लिखना' अर्थ को ठीक उलट देते हैं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
88
दिए गए वाक्यों के रेखांकित शब्दों के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान करें-
A.आपकी समझ तो अपूर्व है।
B.हर व्यक्ति में देवत्व और पशुत्व दोनों ही रहते हैं।
C.गीता तेजी से लम्बी हो रही है।
D.बातचीत में मिठास रखो, सब काम बनते जाएँगे।
Solution
संज्ञा-प्रयोग की अशुद्धि
विकल्प (a), (b) और (d) के रेखांकित शब्द - समझ, देवत्व और पशुत्व, मिठास - भाववाचक संज्ञाएँ हैं और वाक्य में संज्ञा के रूप में ही प्रयुक्त हुई हैं।
विकल्प (c) में रेखांकित 'लम्बी' संज्ञा नहीं, विशेषण है; उससे बनी भाववाचक संज्ञा 'लम्बाई' होती है।
नियम: 'तेजी से बढ़ना' जिस गुण का है, उसे संज्ञा रूप में रखना चाहिए, इसलिए संज्ञा की दृष्टि से यही वाक्य अशुद्ध है।
शुद्ध वाक्य - गीता की लम्बाई तेजी से बढ़ रही है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
89
दिए गए शब्द का सही पर्यायवाची शब्द पहचानिए- विनीत
A.प्रणत
B.हितय
C.अजय
D.विजय
Solution
पर्यायवाची
'विनीत' का अर्थ है नम्र, विनयशील, झुका हुआ; इसी अर्थ में 'प्रणत' इसका पर्यायवाची है।
'प्रणत' शब्द 'प्र + नत' से बना है, अर्थात् आगे की ओर झुका हुआ - विनम्रता का ही भाव।
'अजय' का अर्थ है जिसे जीता न जा सके, और 'विजय' का अर्थ है जीत - दोनों विनयशीलता से संबंधित नहीं।
'हितय' कोई मानक हिन्दी शब्द नहीं है, वह केवल भरती का विकल्प है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
90
‘कबीर _____ काव्य धारा के प्रमुख कवि हैं।’ रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तद्भव शब्द है-
A.निर्गुण
B.भक्त
C.सगुण
D.निरगुन
Solution
तत्सम-तद्भव
कबीर निर्गुण भक्ति काव्य धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के प्रमुख कवि हैं - यही अर्थ की दृष्टि से अभीष्ट शब्द है।
किन्तु प्रश्न 'तद्भव' शब्द माँगता है: 'निर्गुण' तत्सम रूप है और उसी का तद्भव रूप 'निरगुन' है, जिसे कबीर ने स्वयं अपनी वाणी में प्रयुक्त किया है।
नियम: तत्सम शब्दों के संयुक्त व्यंजन तद्भव में खुल जाते हैं और ध्वनियाँ सरल हो जाती हैं - निर्गुण > निरगुन, कर्म > काम, सर्प > साँप।
'निर्गुण' यहाँ का सबसे बड़ा जाल है - अर्थ तो ठीक है, पर वह तत्सम है; 'भक्त' और 'सगुण' भी तत्सम हैं, और सगुण धारा के प्रमुख कवि सूरदास तथा तुलसीदास हैं, कबीर नहीं।
पूर्ण वाक्य - कबीर निरगुन काव्य धारा के प्रमुख कवि हैं। इसलिए सही विकल्प (d) है।
91
‘कोयल’ का पर्याय है-
A.कांता
B.सुता
C.श्यामा
D.परहेज
Solution
पर्यायवाची
'कोयल' के पर्यायवाची हैं - कोकिला, पिक, श्यामा, वसंतदूत, परभृत।
'श्यामा' का शाब्दिक अर्थ है साँवली; कोयल के काले रंग के कारण यह उसका पर्याय बना।
'कांता' का अर्थ पत्नी या सुंदरी है, और 'सुता' का अर्थ पुत्री।
'परहेज' का अर्थ है बचाव या संयम - यह पक्षी से संबंधित शब्द ही नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
92
‘आम के बागों में ______ बोल रही है।’ रिक्त स्थान की पूर्ति तत्सम शब्द द्वारा कीजिए।
A.कोकिला
B.कोयल
C.कोयलिया
D.कोकिल
Solution
तत्सम शब्द
रिक्त स्थान के लिए तत्सम शब्द माँगा गया है, और 'कोकिला' संस्कृत से ज्यों का त्यों आया तत्सम शब्द है।
'कोयल' उसी का तद्भव रूप है तथा 'कोयलिया' लोकभाषा/देशज रूप है - अतः ये दोनों तत्सम नहीं हैं।
'कोकिल' तत्सम अवश्य है, किन्तु वह पुल्लिंग है, जबकि वाक्य की क्रिया 'बोल रही है' स्त्रीलिंग है; अतः लिंग की दृष्टि से वह नहीं चलेगा।
पूर्ण वाक्य - आम के बागों में कोकिला बोल रही है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
93
निम्नलिखित में से कौन-सा स्थानवाचक क्रिया-विशेषण नहीं है?
A.अभी
B.किधर
C.यहाँ
D.वहाँ
Solution
क्रिया-विशेषण के भेद
प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सा शब्द स्थानवाचक क्रिया-विशेषण नहीं है।
'अभी' कालवाचक क्रिया-विशेषण है - यह बताता है कि क्रिया कब हुई, जैसे अभी, तब, कल, प्रतिदिन।
'किधर', 'यहाँ' और 'वहाँ' क्रिया के होने का स्थान बताते हैं, अतः तीनों स्थानवाचक क्रिया-विशेषण हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
94
‘इस वर्ष इस्पात के ______ में इजाफा हुआ है।’ वाक्य के रिक्त स्थान के लिए आयात शब्द का सर्वाधिक उपयुक्त विलोम शब्द चुनिए-
A.खरीद
B.बिक्री
C.खपत
D.निर्यात
Solution
विलोम शब्द
'आयात' का अर्थ है विदेश से माल मँगाना; इसका विलोम 'निर्यात' है, अर्थात् विदेश को माल भेजना।
उपसर्गों से पहचान आसान है - 'आ' भीतर की ओर और 'निर्' बाहर की ओर संकेत करता है।
'खरीद', 'बिक्री' और 'खपत' व्यापार के शब्द अवश्य हैं, पर इनमें से कोई भी 'आयात' का विलोम नहीं; 'बिक्री' सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि बिक्री देश के भीतर भी होती है।
पूर्ण वाक्य - इस वर्ष इस्पात के निर्यात में इजाफा हुआ है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
95
दिए गए वाक्य में शब्द या वाक्य खण्ड को बदलिए। उसके चाचा को लड़की हुई है।
A.उसके चाचा के लड़की हुई है।
B.उसके चाचा की लड़की हुई है।
C.उसके चाचा को लड़की हुई है।
D.उसके चाचा की सिर्फ लड़की हुई है।
Solution
वाक्य-शुद्धि (कारक)
जन्म की सूचना देने वाले वाक्यों में संबंध कारक का चिह्न 'के' आता है - 'उसके चाचा के लड़की हुई है।'
नियम: 'को' कर्म अथवा संप्रदान कारक का चिह्न है; यहाँ चाचा को कुछ दिया नहीं जा रहा, इसलिए मूल वाक्य में 'को' अशुद्ध है।
विकल्प (b) और (d) में 'की' लगाने से अर्थ बदल जाता है - 'चाचा की लड़की' का अर्थ हो जाता है उनकी पुत्री (संबंध), जन्म की सूचना नहीं।
विकल्प (c) वही अशुद्ध वाक्य ज्यों का त्यों दोहराता है।
शुद्ध वाक्य - उसके चाचा के लड़की हुई है। इसलिए सही विकल्प (a) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.अनुभवों
B.कष्ट
C.स्वरूप
D.सत्य
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
रिक्त स्थान 'जीवन के ______ का निचोड़' के बीच है, अतः यहाँ संबंध कारक 'के' के अनुरूप बहुवचन संज्ञा चाहिए - 'अनुभवों'।
अगला वाक्य 'अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं' इसी शब्द को आगे बढ़ाता है, जो चयन की पुष्टि करता है।
'कष्ट', 'स्वरूप' और 'सत्य' एकवचन रूप हैं और 'जीवन के' के साथ इनका अन्वय नहीं बैठता; भाव भी अधूरा रह जाता है।
पूर्ण वाक्य - जिसमें जीवन के अनुभवों का निचोड़ हो। इसलिए सही विकल्प (a) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.बाधक
B.आवश्यक
C.व्यर्थ
D.सहायक
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
रिक्त स्थान 'आदर्श की संरचना करने में ______ होता है' में है, अतः वहाँ 'करने में' के साथ चलने वाला विशेषण चाहिए।
गद्यांश का मूल मत यही है कि यथार्थ और आदर्श परस्पर पूरक हैं, इसलिए यथार्थ आदर्श की रचना में 'सहायक' होता है।
'बाधक' और 'व्यर्थ' इस मत को ही उलट देते हैं, जबकि आगे लिखा है कि यथार्थ के साथ आदर्श का सामंजस्य आवश्यक है।
'आवश्यक' का अर्थ भले सकारात्मक हो, पर 'करने में आवश्यक होता है' का अन्वय शुद्ध नहीं बैठता।
पूर्ण वाक्य - आदर्श की संरचना करने में सहायक होता है। इसलिए सही विकल्प (d) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.सुखद
B.कष्टप्रद
C.आवश्यक
D.अनावश्यक
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
वाक्य है - यदि आदर्श का सामंजस्य न हो तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं ______ बन कर रह जाता।
'एवं' दोनों विशेषणों को एक ही दिशा में जोड़ता है, इसलिए 'अमूर्त' के साथ नकारात्मक भाव वाला विशेषण ही आएगा।
आदर्श से रहित नंगा यथार्थ पीड़ा ही देता है, अतः 'कष्टप्रद' उपयुक्त है।
'सुखद' और 'आवश्यक' सकारात्मक होने से 'अमूर्त' के साथ संगति तोड़ देते हैं; 'अनावश्यक' कहने पर लेखक का यह प्रारंभिक कथन ही कट जाता कि यथार्थ-चित्रण आवश्यक है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.पवित्र
B.आदर्श
C.उत्तक
D.पुष्प
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
'एक ओर ... तो दूसरी ओर ...' रचना दो विपरीत बातों को जोड़ती है; एक ओर 'जीवन का चरम यथार्थ' है, अतः दूसरी ओर उसका प्रतिपक्ष 'आदर्श' ही आएगा।
अगला वाक्य - 'यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा' - इसी जोड़ी की पुष्टि करता है।
'पवित्र' और 'पुष्प' प्रसंग से बाहर हैं, और 'उत्तक' कोई मानक शब्द नहीं है।
पूर्ण वाक्य - तो दूसरी ओर आदर्श की भी प्रतिष्ठा की गई है। इसलिए सही विकल्प (b) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.अच्छा
B.श्रेष्ठ
C.कुछ
D.सही
Solution
गद्यांश: रिक्त स्थान
अंतिम वाक्य पहले यथातथ्य चित्रण का निषेध करता है और फिर 'जीवन के ______ स्वरूप' के चित्रण की बात कहता है, अर्थात् आदर्श रूप की।
'श्रेष्ठ स्वरूप' ही आदर्श का पर्याय बनकर पूरे गद्यांश के निष्कर्ष से मेल खाता है।
'अच्छा' और 'सही' बोलचाल के सामान्य विशेषण हैं, जो इस साहित्यिक प्रसंग में हल्के पड़ते हैं।
'कुछ' अनिश्चयवाचक है और वाक्य के अर्थ को अधूरा छोड़ देता है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
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