SSC GD Constable 7 February 2025 · Shift 2 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 55 of 210
7 February 2025 · Shift 2
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
‘बहुत परिश्रम करना’ के लिए निम्नलिखित में से उपयुक्त मुहावरा है।
A.अत्यधिक जुगाड़ लगाना
B.आकाश-पाताल एक करना
C.दिन-रात न होना
D.आग में घी डालना
Solution
मुहावरा
‘आकाश-पाताल एक करना’ का अर्थ है - किसी कार्य को पूरा करने के लिए हर संभव उपाय करते हुए अत्यधिक परिश्रम करना।
प्रश्न में ‘बहुत परिश्रम करना’ भाव माँगा गया है, जो इसी मुहावरे से व्यक्त होता है।
‘आग में घी डालना’ = क्रोध या झगड़े को और भड़काना - यह परिश्रम का नहीं, उत्तेजना का भाव है।
‘दिन-रात न होना’ तथा ‘अत्यधिक जुगाड़ लगाना’ हिंदी के प्रचलित मुहावरे ही नहीं हैं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
82
निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए- आकाश में विचरण करने वाला
A.नभचर
B.भूमिचर
C.निशाचर
D.जलचर
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
‘नभ’ का अर्थ आकाश है और ‘चर’ प्रत्यय ‘विचरण करने वाला’ का बोध कराता है।
अतः आकाश में विचरण करने वाला ‘नभचर’ कहलाता है।
‘भूमिचर’ = पृथ्वी पर चलने वाला; ‘जलचर’ = जल में रहने वाला।
‘निशाचर’ = रात में विचरण करने वाला - यह आकाश का नहीं, रात्रि का बोध कराता है, इसीलिए भ्रम उत्पन्न करता है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
83
‘अभ्यागत’ का पर्याय है-
A.अतीत
B.अतिरिक्त
C.मेहमान
D.आगत
Solution
पर्यायवाची शब्द
‘अभ्यागत’ का अर्थ है - घर पर आया हुआ अतिथि, अर्थात् मेहमान।
अतः दिए गए विकल्पों में इसका पर्यायवाची ‘मेहमान’ है।
‘आगत’ का अर्थ केवल ‘आया हुआ’ है; उसमें अतिथि का भाव नहीं आता, इसलिए वही सबसे भ्रामक विकल्प है।
‘अतीत’ = बीता हुआ समय; ‘अतिरिक्त’ = शेष अथवा अधिक।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
84
निम्नलिखित मुहावरे के उचित अर्थ का चयन करें- ‘आँखों के आगे नाचना’
A.हर समय याद रहना
B.प्रतीक्षा करना
C.देखने को जी चाहना
D.क्रोध करना
Solution
मुहावरे का अर्थ
‘आँखों के आगे नाचना’ का अर्थ है - किसी का रूप या दृश्य हर समय स्मृति में बना रहना।
अर्थात् वह वस्तु या व्यक्ति निरंतर याद आता रहे, चाहे सामने न हो।
‘देखने को जी चाहना’ इच्छा का भाव है, स्मरण का नहीं - यही सबसे निकट दिखने वाला भ्रामक विकल्प है।
‘प्रतीक्षा करना’ तथा ‘क्रोध करना’ इस मुहावरे से पूर्णतः असंबद्ध हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
85
‘निंदा’ का विलोम शब्द है-
A.बुराई
B.स्तुति
C.प्रताप
D.स्फूर्ति
Solution
विलोम शब्द
‘निंदा’ का अर्थ है किसी की बुराई करना; इसका विलोम है ‘स्तुति’ अर्थात् प्रशंसा करना।
‘बुराई’ तो ‘निंदा’ का पर्यायवाची है, विलोम नहीं - यही चूक परीक्षार्थी सबसे अधिक करते हैं।
‘प्रताप’ = तेज अथवा प्रभाव; ‘स्फूर्ति’ = चुस्ती, ताज़गी।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
86
‘तालाब का किनारा अत्यन्त सुंदर दिख रहा है।’ इस वाक्य में प्रयुक्त ‘किनारा’ शब्द का अनेकार्थी शब्द निम्न में से कौन-सा है?
A.हाशिया
B.अंदाज
C.सलीका
D.माध्यम
Solution
अनेकार्थी शब्द
‘किनारा’ शब्द के अनेक अर्थ हैं - तट, छोर, तथा पृष्ठ पर छोड़ा गया हाशिया; ‘किनारा करना’ = अलग हो जाना।
दिए गए विकल्पों में केवल ‘हाशिया’ ही ‘किनारा’ का एक अर्थ है।
‘अंदाज’ = अनुमान या ढंग; ‘सलीका’ = काम करने का तरीका; ‘माध्यम’ = साधन।
इनमें से कोई भी ‘किनारा’ का अर्थ नहीं देता, अतः वे केवल ध्यान बँटाते हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
87
‘चिंता यह है की देश का पुनरुथान कैसे होगा?’ उपरोक्त वाक्य में वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ हैं। अशुद्धि रहित वाक्य का चयन करें-
A.चिंता यह है की देश का पुनरुत्थान कैसे होगा।
B.चिंता यह है कि देश का पुनरुत्थान कैसे होगा।
C.चिंता यह है कि देश का पुनरुथान कैसे होगा।
D.चिंता यह है की देश का पुनरुथान कैसे होगा।
Solution
वाक्य-शुद्धि (वर्तनी)
दिए गए वाक्य में दो अशुद्धियाँ हैं - ‘की’ और ‘पुनरुथान’; शुद्ध विकल्प वही होगा जो दोनों को ठीक करे।
‘कि’ समुच्चयबोधक अव्यय है जो दो उपवाक्यों को जोड़ता है, जबकि ‘की’ संबंध बताने वाला परसर्ग है (राम की पुस्तक)। यहाँ जोड़ने का काम है, अतः ‘कि’ शुद्ध है।
‘पुनरुत्थान’ = पुनः + उत्थान; ‘त्थ’ का संयुक्ताक्षर अनिवार्य है, अतः ‘पुनरुथान’ अशुद्ध है।
शुद्ध वाक्य - चिंता यह है कि देश का पुनरुत्थान कैसे होगा।
विकल्प (a) और (c) में एक-एक अशुद्धि शेष रह जाती है तथा (d) में दोनों ज्यों-की-त्यों बनी रहती हैं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
88
‘उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग तेईस ____ है।’ रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तत्सम शब्द है-
A.कच्छज
B.कोटि
C.कुक्कुर
D.करोड़
Solution
तत्सम शब्द
संस्कृत से ज्यों-का-त्यों हिंदी में आए शब्द ‘तत्सम’ कहलाते हैं; उनके बिगड़े हुए रूप ‘तद्भव’ होते हैं।
‘कोटि’ तत्सम शब्द है और उसका एक अर्थ करोड़ है - ‘तेईस कोटि’ अर्थात् तेईस करोड़।
‘करोड़’ इसी ‘कोटि’ का तद्भव रूप है; अर्थ सही होने पर भी प्रश्न तत्सम माँगता है, इसलिए वह उत्तर नहीं बनता - यही सबसे बड़ा जाल है।
‘कच्छज’ = कछुआ तथा ‘कुक्कुर’ = कुत्ता; ये संख्यावाचक शब्द ही नहीं हैं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
89
‘स्वामी’ के लिए विलोम शब्द होगा-
A.श्रद्धा
B.श्रीमान
C.दास
D.दाता
Solution
विलोम शब्द
‘स्वामी’ अर्थात् मालिक; जो सेवा करता है वह ‘दास’ - यही उसका विलोम है।
‘श्रीमान’ आदरसूचक संबोधन है, विलोम नहीं।
‘दाता’ (देने वाला) का विलोम ‘याचक’ होगा और ‘श्रद्धा’ का ‘घृणा’।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
90
‘जो शिव की उपासना करता हो’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द इनमें से कौन-सा है?
A.शैव
B.वैष्णव
C.शाक्त
D.भक्त
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
शिव की उपासना करने वाले को ‘शैव’ कहते हैं (शिव + अण् प्रत्यय)।
‘वैष्णव’ विष्णु का उपासक होता है और ‘शाक्त’ शक्ति अर्थात् देवी का - यही दो विकल्प सबसे अधिक भ्रमित करते हैं।
‘भक्त’ सामान्य शब्द है; वह किसी भी देवता का हो सकता है, अतः वह ‘शिव’ का विशेष बोध नहीं कराता।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
91
निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित खंड के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए- सीमा की लिखावट हिंदी की बहुत सुंदर है।
A.हिंदी की लिखावट
B.हिंदी की
C.हिंदी लिखावट की
D.लिखावट की हिंदी
Solution
वाक्य-शुद्धि (पदक्रम)
हिंदी में संबंधवाचक पदबंध अपने विशेष्य से ठीक पहले आता है - ‘हिंदी की लिखावट’, न कि ‘लिखावट हिंदी की’।
यहाँ ‘लिखावट’ का संबंध ‘हिंदी’ से है, अतः रेखांकित खंड के स्थान पर ‘हिंदी की लिखावट’ रखना होगा।
शुद्ध वाक्य - सीमा की हिंदी की लिखावट बहुत सुंदर है।
‘हिंदी लिखावट की’ तथा ‘लिखावट की हिंदी’ में पदक्रम दोष बना ही रहता है, और केवल ‘हिंदी की’ रखने पर ‘लिखावट’ शब्द ही लुप्त हो जाता है।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
92
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द पुल्लिंग नहीं है-
A.कार्य
B.जड़ता
C.पोषण
D.शोषण
Solution
लिंग-निर्णय
नियम: ‘-ता’ प्रत्यय से बनी भाववाचक संज्ञाएँ हिंदी में स्त्रीलिंग होती हैं - सुंदरता, मधुरता, जड़ता।
अतः ‘जड़ता’ ही वह शब्द है जो पुल्लिंग नहीं है (जड़ता बढ़ती है)।
‘पोषण’ और ‘शोषण’ ‘-अन’ प्रत्यय वाली तत्सम भाववाचक संज्ञाएँ हैं और पुल्लिंग हैं (पोषण होता है)।
‘कार्य’ भी पुल्लिंग है (कार्य हुआ), इसलिए वह भी उत्तर नहीं बन सकता।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
93
‘हमारे संविधान में स्त्री के अधिकारों के सम्बन्ध में क्या प्रविधान है?’ उपरोक्त वाक्य के किस शब्द की वर्तनी अशुद्ध है?
A.प्रविधान
B.सम्बन्ध
C.अधिकारों
D.संविधान
Solution
वर्तनी-अशुद्धि
वाक्य में ‘प्रविधान’ अशुद्ध है; इसकी शुद्ध वर्तनी ‘प्रावधान’ है।
‘प्र’ उपसर्ग के बाद ‘अवधान’ जुड़ने पर स्वर-संधि से दीर्घ ‘वा’ बनता है - प्र + अवधान = प्रावधान।
‘संविधान’ में अनुस्वार तथा ‘सम्बन्ध’ में संयुक्त व्यंजन दोनों शुद्ध हैं (‘संबंध’ रूप भी मान्य है)।
‘अधिकारों’ भी शुद्ध बहुवचन रूप है, अतः शेष तीनों में कोई दोष नहीं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
94
‘आपके यहाँ मेरे लिए कुछ ____ हो तो बताइये, मैं इस समय बेकार हूँ।’ उचित सार्थक और निरर्थक शब्द-युग्म वाले विकल्प का चयन करके उपरोक्त वाक्य पूर्ण करें-
A.राशन-पानी
B.मीठा-सीठा
C.कपड़ा-लत्ता
D.काम-वाम
Solution
शब्द-युग्म (सार्थक-निरर्थक)
सार्थक-निरर्थक युग्म में पहला शब्द अर्थवान होता है और दूसरा उसी की तुक पर गढ़ा गया निरर्थक शब्द - जैसे काम-वाम, पानी-वानी, चाय-वाय।
‘काम-वाम’ में ‘काम’ सार्थक है और ‘वाम’ यहाँ केवल तुकांत निरर्थक शब्द है।
वाक्य का भाव भी यही माँगता है - ‘मैं इस समय बेकार हूँ’, अर्थात् वक्ता कोई काम चाहता है।
‘राशन-पानी’ तथा ‘कपड़ा-लत्ता’ में दोनों शब्द सार्थक हैं, और ‘मीठा-सीठा’ में ‘सीठा’ (फीका) भी अर्थवान है - अतः इनमें से कोई सार्थक-निरर्थक युग्म नहीं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
95
दिए गए वाक्यों के रेखांकित शब्दों के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान करें-
A.ज़िया ने चतुराई से दुश्मन को परास्त कर दिया।
B.गोपाल और रहीम की मित्रता बहुत पुरानी है।
C.कोई अपना ही कई बार आपका सबसे बड़ा नुकसान कर देता है।
D.अच्छा मित्र मिल जाना किस्मत की बात है।
Solution
संज्ञा और सर्वनाम
प्रश्न रेखांकित शब्दों को संज्ञा मानकर पूछा गया है; अतः जिस वाक्य का रेखांकित शब्द संज्ञा नहीं है, संज्ञा की दृष्टि से वही वाक्य अशुद्ध ठहरेगा।
‘चतुराई’, ‘मित्रता’ और ‘किस्मत’ - तीनों भाववाचक संज्ञाएँ हैं (गुण या भाव का बोध कराती हैं)।
‘अपना’ संज्ञा नहीं, सर्वनाम है; यहाँ ‘कोई अपना’ में भी वह किसी नाम के स्थान पर आया है, अतः सर्वनाम ही रहता है।
पहचान का सरल सूत्र यह है कि संज्ञा किसी वस्तु, भाव या गुण का नाम होती है, जबकि सर्वनाम नाम के बदले आता है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.शिकंजे
B.अधीन
C.अंतर्गत
D.अनाधीन
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान
रिक्त स्थान से पहले ‘किसी बाह्य सत्ता के’ आया है, अतः वहाँ ‘के’ परसर्ग के साथ चलने वाला शब्द ही आ सकता है।
अस्तित्ववाद का मूल कथन यही है कि मनुष्य का अस्तित्व किसी बाहरी सत्ता के ‘अधीन’ नहीं है - ‘के अधीन’ शुद्ध प्रयोग भी है और प्रसंग भी।
‘अंतर्गत’ किसी सीमा या वर्ग के भीतर आने के अर्थ में आता है, स्वतंत्रता-अस्वतंत्रता के प्रसंग में नहीं।
‘शिकंजे’ के साथ ‘में’ चाहिए (‘शिकंजे में’), अतः वह ‘के’ के बाद नहीं बैठता; ‘अनाधीन’ मानक शब्द ही नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.विकासकर्ता
B.व्याख्याता
C.प्रस्तुतकर्ता
D.निर्माता
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान
वाक्य है - ‘मनुष्य अपने भाग्य का ____ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है’; रिक्त स्थान में ‘भाग्य का’ के साथ जुड़ने वाला कर्ता-सूचक शब्द चाहिए।
अस्तित्ववाद के अनुसार मनुष्य ही अपने भाग्य को गढ़ता है, अतः वह अपने भाग्य का ‘निर्माता’ है।
‘व्याख्याता’ (व्याख्या करने वाला) और ‘प्रस्तुतकर्ता’ (प्रस्तुत करने वाला) भाग्य के साथ कोई अर्थ नहीं देते।
‘विकासकर्ता’ भी यहाँ अटपटा है - भाग्य का विकास नहीं, निर्माण होता है; आगे ‘उत्तरदायी स्वयं है’ भी निर्माण के भाव की ही पुष्टि करता है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.जीवित
B.परतंत्र
C.स्वच्छंद
D.आनन्दित
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान
वाक्य है - ‘बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में ____ भी नहीं हो सकता।’
गद्यांश का पूरा प्रसंग स्वतंत्रता और आत्म-उत्तरदायित्व का है, अतः रिक्त स्थान में स्वतंत्रता-सूचक विशेषण ‘स्वच्छंद’ आएगा।
‘परतंत्र’ रखने पर अर्थ उलट जाएगा, क्योंकि अस्तित्वबोध के बिना मनुष्य परतंत्र ही होता है - निषेध वाक्य में यह विरोधाभास बना देता है।
‘जीवित’ और ‘आनन्दित’ प्रसंग से मेल नहीं खाते; अस्तित्वबोध जीवन या आनंद की नहीं, स्वतंत्रता की शर्त बताया गया है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.वार्ता
B.योग्यता
C.लालसा
D.लालच
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान
रिक्त स्थान से पहले ‘सुख की’ है, अतः वहाँ केवल स्त्रीलिंग संज्ञा ही आ सकती है।
‘लालसा’ स्त्रीलिंग है और उसका अर्थ है तीव्र इच्छा - ‘सुख की लालसा’ व्याकरण और अर्थ, दोनों दृष्टि से शुद्ध है।
‘लालच’ पुल्लिंग है, इसलिए ‘सुख की लालच’ अशुद्ध हो जाता; अर्थ निकट होने के कारण यही सबसे बड़ा जाल है।
‘वार्ता’ (बातचीत) और ‘योग्यता’ (क्षमता) स्त्रीलिंग तो हैं, पर सुख के साथ अर्थ नहीं बनाते।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.उन्नति
B.खोज
C.पराकाष्ठा
D.अवनति
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान
क्रिया ‘कर सकती है’ स्त्रीलिंग है, किंतु चारों विकल्प स्त्रीलिंग हैं, अतः निर्णय अर्थ के आधार पर होगा।
‘सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक अथवा वैज्ञानिक’ - ये पाँचों विशेषण जिस संज्ञा के साथ स्वाभाविक रूप से चलते हैं, वह ‘उन्नति’ है।
भाव यह है कि किसी भी प्रकार की उन्नति मनुष्य को न पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है, न सुखी - यही अस्तित्ववादी दृष्टि है।
‘अवनति’ अर्थ को उलट देती है, तथा ‘खोज’ और ‘पराकाष्ठा’ इन विशेषणों के साथ पदबंध ही नहीं बनातीं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
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