SSC GD Constable 13 February 2025 · Shift 2 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 115 of 210
13 February 2025 · Shift 2
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
निम्नलिखित में से किस वाक्य में लिंग संबंधी अशुद्धि है?
A.नदी सदैव बहती ही रहती है।
B.मोहिनी की नृत्य अत्यंत ललित है।
C.मेरी अभिलाषा है कि मेरे जन्मदिन पर आप अवश्य आयें।
D.आपकी क्षति की पूर्ति कर दी जायेगी।
Solution
लिंग संबंधी अशुद्धि
हिंदी में ‘नृत्य’ संस्कृत मूल का पुल्लिंग शब्द है, अतः उसके साथ संबंधबोधक ‘का’ आना चाहिए।
विकल्प (b) में ‘मोहिनी की नृत्य’ लिखा है, जहाँ स्त्रीलिंग संबंधबोधक ‘की’ पुल्लिंग संज्ञा ‘नृत्य’ से जुड़ गया है - यही लिंग संबंधी अशुद्धि है।
शुद्ध वाक्य होगा - ‘मोहिनी का नृत्य अत्यंत ललित है।’
शेष वाक्यों में लिंग-अन्विति ठीक है: ‘नदी … बहती रहती है’, ‘मेरी अभिलाषा है’ तथा ‘क्षति की पूर्ति … कर दी जायेगी’ - तीनों में संज्ञाएँ स्त्रीलिंग हैं और क्रिया भी स्त्रीलिंग।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
82
निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान कर शुद्ध वाक्य का चयन करें। मालती के दो छोटे-छोटे बच्चेन हैं।
A.मालती के दो छोटे-छोटे बच्चेन हैं।
B.मालती के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
C.मालती की दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
D.मालती कि दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
Solution
वर्तनी शुद्धि
‘बच्चा’ का बहुवचन ‘बच्चे’ बनता है; मानक हिंदी में ‘-न’ जोड़कर बना ‘बच्चेन’ जैसा कोई रूप नहीं होता - यही वाक्य की वर्तनी संबंधी त्रुटि है।
विकल्प (a) में वही अशुद्ध रूप ‘बच्चेन’ ज्यों का त्यों बना हुआ है, अतः वह शुद्ध वाक्य नहीं है।
विकल्प (c) में ‘मालती की’ अशुद्ध है - ‘बच्चे’ पुल्लिंग बहुवचन है, इसलिए संबंधकारक ‘के’ ही आएगा।
विकल्प (d) में योजक ‘कि’ का प्रयोग संबंधबोधक ‘की’ के स्थान पर हुआ है, जो स्वयं एक वर्तनी दोष है।
शुद्ध वाक्य - ‘मालती के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।’ इसलिए सही विकल्प (b) है।
83
‘कलंक’ का उपयुक्त एकार्थक शब्द है-
A.अपकीर्ति
B.प्रतिष्ठा
C.सम्मान
D.सुकीर्ति
Solution
एकार्थक (समानार्थी) शब्द
‘कलंक’ का अर्थ है - दोष, धब्बा या बदनामी, अर्थात् यश का नष्ट होना।
‘अपकीर्ति’ = अप (बुरा/विपरीत) + कीर्ति (यश), अर्थात् बुरा यश या बदनामी - यही ‘कलंक’ का उपयुक्त एकार्थक शब्द है।
‘प्रतिष्ठा’, ‘सम्मान’ और ‘सुकीर्ति’ तीनों प्रशंसा-वाचक शब्द हैं और ‘कलंक’ के विपरीत अर्थ देते हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
84
निम्नलिखित में से बहुवचन से संबंधित वाक्य है-
A.महिला बाजार जा रही है।
B.कल कोई महिला आई थी।
C.कुछ महिलाएँ बाहर खड़ी हैं।
D.एक महिला आई है।
Solution
वचन (बहुवचन)
बहुवचन वह रूप है जो एक से अधिक व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए।
विकल्प (c) में संज्ञा ‘महिलाएँ’ बहुवचन रूप में है, उसके साथ ‘कुछ’ अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण है और क्रिया भी बहुवचन ‘खड़ी हैं’ आई है।
‘महिला बाजार जा रही है’, ‘कल कोई महिला आई थी’ तथा ‘एक महिला आई है’ - तीनों वाक्यों में एकवचन का बोध होता है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
85
रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए। आपकी उपस्थिति के बिना हम कुछ नहीं कर सकते थे।
A.उपलब्धता
B.प्रतिष्ठा
C.सहायता
D.अनुकम्पा
Solution
उपयुक्त शब्द-चयन
प्रश्न रेखांकित शब्द के स्थान पर रखे जाने योग्य सर्वोचित शब्द माँगता है, अतः चारों विकल्पों को साँचे ‘आपकी ____ के बिना हम कुछ नहीं कर सकते थे’ में रखकर देखना चाहिए।
वाक्य का भाव है - किसी के सहयोग के अभाव में कार्य पूरा न हो पाना; यह भाव ‘सहायता’ से ही पूरा उतरता है।
‘उपलब्धता’ प्रायः वस्तु या साधन के मिलने के अर्थ में आती है, ‘प्रतिष्ठा’ मान-सम्मान का बोध कराती है और ‘अनुकम्पा’ कृपा का - तीनों इस प्रसंग में अस्वाभाविक हैं।
अतः शुद्ध वाक्य - ‘आपकी सहायता के बिना हम कुछ नहीं कर सकते थे।’ इसलिए सही विकल्प (c) है।
86
निम्नलिखित में से कौन-सा ‘पेड़’ का पर्यायवाची शब्द नहीं है?
A.पादप
B.आशय
C.तरु
D.विटप
Solution
पर्यायवाची शब्द
‘पेड़’ के पर्यायवाची शब्द हैं - पादप, तरु, विटप, वृक्ष, द्रुम, रुख आदि।
‘आशय’ का अर्थ है - अभिप्राय, तात्पर्य या मंतव्य; इसका ‘पेड़’ से कोई संबंध नहीं है।
शेष तीनों (पादप, तरु, विटप) ‘पेड़’ के प्रचलित पर्याय हैं।
इसलिए पर्यायवाची न होने वाला शब्द ‘आशय’ है, अर्थात् सही विकल्प (b) है।
87
‘दीपावली का पर्व ____ की रात्रि को मनाया जाता है।’ उपर्युक्त वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तत्सम शब्द है-
A.चौथ
B.अमावस्या
C.छठ
D.तीज
Solution
तत्सम शब्द
दीपावली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, अर्थात् अमावस्या की रात्रि को मनाई जाती है - इसीलिए उस रात दीप जलाकर अंधकार दूर किया जाता है।
‘अमावस्या’ तत्सम शब्द है; इसका तद्भव रूप ‘अमावस’ है। अतः यह प्रश्न की दोनों शर्तें (तिथि और तत्सम) पूरी करता है।
‘चौथ’, ‘छठ’ और ‘तीज’ क्रमशः तत्सम ‘चतुर्थी’, ‘षष्ठी’ और ‘तृतीया’ के तद्भव रूप हैं, इसलिए वे तत्सम की शर्त ही पूरी नहीं करते; तिथि की दृष्टि से भी वे दीपावली की रात्रि नहीं हैं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
88
‘____ प्रमुख भारतीय व्यंजन है।’ रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तत्सम है-
A.क्षीर
B.हरिद्रा
C.निवात
D.दही
Solution
तत्सम शब्द
रिक्त स्थान में ऐसा शब्द चाहिए जो एक साथ दो शर्तें पूरी करे - वह तत्सम हो और किसी प्रमुख भारतीय व्यंजन का बोध कराए।
‘क्षीर’ तत्सम शब्द है, जिसका अर्थ है दूध तथा दूध से बना पकवान; इसी से तद्भव ‘खीर’ बना है, जो प्रमुख भारतीय व्यंजन है।
‘दही’ खाद्य पदार्थ अवश्य है, किंतु वह तद्भव शब्द है (तत्सम रूप ‘दधि’), अतः तत्सम की शर्त पर खरा नहीं उतरता - यही सबसे भ्रामक विकल्प है।
‘हरिद्रा’ (हल्दी) मसाला है, स्वयं व्यंजन नहीं, और ‘निवात’ का अर्थ है वायुरहित स्थान - दोनों प्रसंग से बाहर हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
89
निम्न वाक्य में रेखांकित पद को संशोधित कीजिए। एक बदमाश की मस्तिष्क पुलिस के डंडे से फट गयी।
A.कपोल
B.खोपड़ी
C.दिमाग
D.सिर
Solution
वाक्य-शुद्धि (उपयुक्त पद)
वाक्य में संबंधकारक ‘की’ और क्रिया ‘फट गयी’ दोनों स्त्रीलिंग हैं, जबकि रेखांकित पद ‘मस्तिष्क’ पुल्लिंग है - इसी कारण वाक्य अशुद्ध है।
अर्थ की दृष्टि से भी ‘मस्तिष्क’ बुद्धि या भीतरी अंग का बोध कराता है; डंडे की चोट से शरीर का कठोर बाहरी भाग, अर्थात् ‘खोपड़ी’ फटती है।
‘खोपड़ी’ स्त्रीलिंग है, अतः ‘की … फट गयी’ के साथ उसका अन्वय ठीक बैठता है - ‘एक बदमाश की खोपड़ी पुलिस के डंडे से फट गयी।’
‘कपोल’ (गाल), ‘दिमाग’ और ‘सिर’ तीनों पुल्लिंग हैं, इसलिए उन्हें रखने पर वाक्य की लिंग-अन्विति भंग ही रहती है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
90
रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए। उसे अभिमान है कि वह उच्चवर्णीय परिवार में पैदा हुआ है।
A.आशंका
B.गर्व
C.कष्ट
D.आनंद
Solution
उपयुक्त शब्द-चयन (पर्याय)
वाक्य का भाव है - ऊँचे कुल में जन्म लेने के कारण होने वाला आत्म-गौरव।
रेखांकित शब्द ‘अभिमान’ का निकटतम पर्याय ‘गर्व’ है; दोनों अपने किसी गुण, कुल या स्थिति पर होने वाले अहं-भाव को व्यक्त करते हैं।
‘आशंका’ भय या संदेह का, ‘कष्ट’ पीड़ा का और ‘आनंद’ हर्ष का बोध कराते हैं - इनमें से किसी में वह अहं-भाव नहीं है, अतः वे रेखांकित शब्द का स्थान नहीं ले सकते।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
91
‘बात में यूँ तो कोई बात नहीं होती पर फिर भी वह ____ की तरह चुभ जाती है।’ ‘तीर’ के पर्याय से वाक्य पूर्ण करें-
A.शूल
B.तलवार
C.शर
D.खंजर
Solution
पर्यायवाची शब्द
प्रश्न स्पष्ट निर्देश देता है कि रिक्त स्थान ‘तीर’ के पर्यायवाची शब्द से भरा जाए।
‘तीर’ के पर्यायवाची हैं - शर, बाण, सायक, विशिख।
‘शूल’ का अर्थ काँटा या नुकीली नोक है, तथा ‘तलवार’ और ‘खंजर’ अलग-अलग शस्त्र हैं; ये चुभने का भाव भले दें, पर ‘तीर’ के पर्याय नहीं हैं।
अतः वाक्य बनेगा - ‘… पर फिर भी वह शर की तरह चुभ जाती है।’ इसलिए सही विकल्प (c) है।
92
निम्नांकित मुहावरे के रिक्त स्थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शब्द कौन-सा है? ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं ____।
A.पानी
B.बारिश
C.छाया
D.सूखा
Solution
लोकोक्ति की पूर्ति
प्रचलित लोकोक्ति है - ‘ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया।’
इसका आशय है कि ईश्वर की सृष्टि में सुख-दुःख और सम्पन्नता-विपन्नता साथ-साथ चलते हैं; कहीं कुछ है तो कहीं उसका उलटा।
यह अर्थ ‘धूप’ के सहज विरोधी युग्म ‘छाया’ से ही बनता है, और तुक भी ‘माया’ से मिलती है; ‘पानी’, ‘बारिश’ या ‘सूखा’ रखने पर न वह जोड़ी बनती है न लोकोक्ति का रूप बचता है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
93
निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और बताएं कि प्रस्तुत विकल्पों में से कौन-सा विकल्प चिह्नित शब्द का विलोम शब्द है? आजादी के इतने वर्षों के बाद भी भारत की अधिकतर जनसंख्या साक्षरता दर के नीचे है।
A.स्वच्छता
B.साक्षरता
C.अक्षरता
D.निरक्षरता
Solution
विलोम शब्द
वाक्य में चिह्नित शब्द ‘साक्षरता’ है, जिसका अर्थ है - पढ़ना-लिखना जानने की स्थिति, अर्थात् अक्षर-ज्ञान होना।
इसका विलोम ‘निरक्षरता’ है, जो ‘निर्’ (अभाव सूचक उपसर्ग) + अक्षरता से बना है, अर्थात् अक्षर-ज्ञान का अभाव।
विकल्प (b) स्वयं वही चिह्नित शब्द है, ‘अक्षरता’ स्वतंत्र रूप से प्रचलित शब्द नहीं है और ‘स्वच्छता’ का इस प्रसंग से कोई संबंध नहीं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
94
निम्नलिखित वाक्य के किस खंड में अशुद्धि है? इन दोनों में केवल यही अंतर है।
A.यही
B.अंतर
C.केवल
D.दोनों
Solution
वाक्य-शुद्धि (पुनरुक्ति दोष)
वाक्य है - ‘इन दोनों में केवल यही अंतर है।’
‘यही’ में लगा ‘ही’ निपात स्वयं ही सीमा या अवधारण (only) का भाव दे रहा है; उसके साथ ‘केवल’ जोड़ देने पर एक ही भाव दो बार आ जाता है, जो पुनरुक्ति दोष है।
अतः अशुद्धि ‘केवल’ खंड में है; शुद्ध वाक्य होगा - ‘इन दोनों में यही अंतर है।’ (अथवा ‘इन दोनों में केवल यह अंतर है।’)
‘दोनों’, ‘अंतर’ और ‘यही’ तीनों अपने-अपने स्थान पर वचन तथा अर्थ की दृष्टि से शुद्ध हैं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
95
निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शब्द कौन-सा है? जिंदगी सबको ____ है।
A.दया
B.रोती
C.सजा
D.मांगती
Solution
रिक्त स्थान की पूर्ति
वाक्य का ढाँचा है - ‘जिंदगी सबको ____ है।’ यहाँ कर्ता ‘जिंदगी’ स्त्रीलिंग है और उससे पहले कर्म ‘सबको’ (को-कारक सहित) आया है।
इसलिए रिक्त स्थान में ऐसा पद चाहिए जो ‘सबको’ को कर्म के रूप में ले सके और ‘है’ के साथ मिलकर स्त्रीलिंग क्रिया-रूप बनाए।
‘मांगती’ सकर्मक क्रिया का स्त्रीलिंग रूप है - ‘जिंदगी सबको मांगती है’, अर्थात् जीवन हर व्यक्ति से कुछ न कुछ माँगता ही रहता है; यह अर्थ और अन्विति दोनों दृष्टि से ठीक बैठता है।
‘रोती’ अकर्मक क्रिया है, अतः ‘सबको’ के साथ उसका अन्वय नहीं बनता।
‘दया’ और ‘सजा’ संज्ञाएँ हैं; उन्हें रखने पर वाक्य ‘जिंदगी सबके लिए सजा है’ जैसा होना चाहिए था, ‘सबको’ के साथ नहीं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.‘सादा जीवन उच्च विचार’
B.‘सादा जीवन उत्तम विचार’
C.‘सादा जीवन अच्छा विचार’
D.‘सादा जीवन नेक विचार’
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
रिक्त स्थान से पहले ‘भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य’ आया है, अतः वहाँ कोई सर्वविदित सूक्ति ही आएगी।
‘सादा जीवन उच्च विचार’ भारतीय संस्कृति की प्रसिद्ध सूक्ति है, जो सरल रहन-सहन और ऊँचे विचारों का संदेश देती है।
शेष तीनों विकल्प इसी सूक्ति के गढ़े हुए रूपांतर हैं; ‘उच्च’ के स्थान पर ‘उत्तम’, ‘अच्छा’ या ‘नेक’ रख देने पर वह प्रचलित महावाक्य नहीं रह जाता।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.भारतीयता
B.लौकिकता
C.प्रभुता
D.मानवता
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
वाक्य कहता है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में किसी की ‘सरसता’ कहीं खो गई है।
पूरा गद्यांश जाति-भेद के विरुद्ध और मनुष्य मात्र की समानता के पक्ष में है, अतः जातिवाद के कोलाहल में जो सरसता खोई, वह ‘मानवता’ की ही है।
‘भारतीयता’, ‘लौकिकता’ और ‘प्रभुता’ में वह भाव नहीं आता जो लेखक जातिप्रथा से हुई हानि के रूप में व्यक्त कर रहा है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.कर्म
B.शर्म
C.मर्म
D.धर्म
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
वाक्यांश है - ‘उसका आधार ____ था, जन्म नहीं।’ अतः रिक्त स्थान में ‘जन्म’ के विरोधी कसौटी-सूचक शब्द की अपेक्षा है।
वर्ण-व्यवस्था का मूल आधार व्यक्ति का ‘कर्म’ माना गया है, जन्म नहीं; आगे दिए गए वाल्मीकि और विश्वामित्र के उदाहरण इसी बात को सिद्ध करते हैं।
‘शर्म’, ‘मर्म’ और ‘धर्म’ केवल तुक मिलाते हैं; ‘जन्म’ के विपरीत कोई कसौटी वे प्रस्तुत नहीं करते।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.महर्षि
B.देवर्षि
C.संन्यासी
D.साधु
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
प्रसंग यह है कि सेवक वर्ग में जन्मे, निरक्षर लुटेरे वाल्मीकि ज्ञानियों की संगति पाकर क्या बन गए।
यहाँ बल आचरण के रूपांतरण पर है - लुटेरे से सन्मार्ग पर चलने वाला सज्जन, अर्थात् ‘साधु’; ‘बना दिया’ क्रिया भी इसी चरित्र-परिवर्तन की सूचक है।
‘महर्षि’ उपाधि गद्यांश आगे विश्वामित्र के लिए प्रयुक्त करता है (‘… महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया’), अतः उसी शब्द को यहाँ दोहराना उपयुक्त नहीं।
‘देवर्षि’ विशेष रूप से नारद की उपाधि है और ‘संन्यासी’ आश्रम-सूचक शब्द है - दोनों संगति से हुए इस परिवर्तन को व्यक्त नहीं करते।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.अभिमान
B.सत्कार
C.स्थान
D.सम्मान
Solution
गद्यांश - रिक्त स्थान की पूर्ति
वाक्य पूछता है कि क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित ____ नहीं मिला।
लेखक कहना चाहता है कि योग्यता को उसका उचित आदर मिला; ‘प्रतिभा का सम्मान मिलना’ ही यहाँ का सटीक और स्वाभाविक सहप्रयोग है।
‘अभिमान’ स्वयं का अहं-भाव है, ‘सत्कार’ प्रायः अतिथि की आवभगत के अर्थ में आता है और ‘स्थान’ से प्रतिभा के आदर का भाव नहीं निकलता।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
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