SSC GD Constable 21 February 2025 · Shift 1 · Hindi — questions with answers · ShikshaSphere
Chapter 185 of 210
21 February 2025 · Shift 1
Hindi
20 questions ~20 min readFree
20 questions
A
81
रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए-
आज के नेताओं और स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले के नेताओं की कोई बराबरी नहीं हो सकती।
A.समरूपता
B.समीपता
C.तुलना
D.समता
Solution
सटीक शब्द-चयन
वाक्य दो कालों के नेताओं को आमने-सामने रखकर परखने की बात कह रहा है - यह भाव 'तुलना' का है।
'बराबरी' का अर्थ है समान स्तर पर होना; पर यहाँ वक्ता यह कह रहा है कि दोनों को एक तराजू में तौला ही नहीं जा सकता, अर्थात् 'कोई तुलना नहीं हो सकती'।
'समरूपता' = एक जैसा रूप, 'समता' = समानता - ये दोनों परिणाम बताते हैं, प्रक्रिया नहीं; 'समीपता' = निकटता, जो प्रसंग से पूरी तरह असंगत है।
अतः रेखांकित शब्द के स्थान पर 'तुलना' सर्वाधिक उपयुक्त है। इसलिए सही विकल्प (c) है।
82
‘सरस’ शब्द का विलोम शब्द क्या होगा?
A.नीरस
B.रसिक
C.कठोर
D.सरल
Solution
विलोम शब्द
'सरस' = रस से युक्त, रसपूर्ण। इसमें 'स' उपसर्ग रस के होने का सूचक है।
रस के अभाव को दर्शाने के लिए 'निः' उपसर्ग लगता है - निः + रस = नीरस।
'रसिक' सरस का विलोम नहीं, बल्कि सजातीय शब्द है; 'कठोर' का विलोम 'कोमल' और 'सरल' का विलोम 'कठिन' होता है।
अतः 'सरस' का विलोम 'नीरस' है। इसलिए सही विकल्प (a) है।
83
निम्न में से ‘होनी’ का विलोम है-
A.असर
B.अनहोनी
C.अहोनी
D.होनहार
Solution
विलोम शब्द
'होनी' का अर्थ है - जो होने वाली हो, भवितव्यता।
इसके निषेध के लिए 'अन्' उपसर्ग जुड़ता है - अन् + होनी = अनहोनी, अर्थात् जो न होने योग्य हो।
'अहोनी' कोई मानक शब्द नहीं है और 'होनहार' (प्रतिभाशाली) विलोम नहीं, भिन्न अर्थ का शब्द है।
अतः 'होनी' का विलोम 'अनहोनी' है। इसलिए सही विकल्प (b) है।
84
‘मेज पर एक डिब्बा रखा है, जिसमें मिठाई रखी है।’ वाक्य में प्रयुक्त कौन-सा शब्द देशज है?
A.मिठाई
B.डिब्बा
C.रखी
D.मेज
Solution
देशज शब्द
देशज वे शब्द हैं जो न संस्कृत से आए, न किसी विदेशी भाषा से - वे स्थानीय बोलियों में स्वयं गढ़े गए हैं।
वाक्य के शब्दों की जाँच: 'मेज' फ़ारसी (विदेशज) है, 'मिठाई' संस्कृत 'मिष्ट' से बना तद्भव है, 'रखी' भी तद्भव क्रिया-रूप है।
'डिब्बा' का कोई संस्कृत या विदेशी मूल नहीं मिलता; यह लोकभाषा में बना शब्द है, अतः देशज है।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
85
निम्नलिखित में से किस वाक्य में एक-दूसरे के उचित विलोम शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है?
A.श्रृंगार के दो भेद हैं-संयोग और वियोग।
B.विशिष्ट-शिष्ट मेहमान के लिए विशेष प्रबंध है।
C.यश-अपयश कर्म पर निर्भर करता है।
D.स्थावर और जंगम एक-दूसरे के विलोम शब्द हैं।
Solution
विलोम युग्म की परख
प्रश्न में वह वाक्य खोजना है जिसमें दिया गया शब्द-युग्म वस्तुतः विलोम है ही नहीं।
(a) संयोग × वियोग - मिलन और बिछोह, शुद्ध विलोम युग्म है।
(c) यश × अपयश - 'अप' उपसर्ग से बना ठीक विलोम है।
(d) स्थावर (अचल) × जंगम (चलायमान) - यह भी मान्य विलोम युग्म है।
(b) में 'विशिष्ट' का विलोम 'सामान्य' होता है और 'शिष्ट' का विलोम 'अशिष्ट'; 'विशिष्ट' और 'शिष्ट' तो दोनों ही सकारात्मक अर्थ के शब्द हैं, परस्पर विलोम नहीं।
अतः विलोम का अनुचित प्रयोग विकल्प (b) में है। इसलिए सही विकल्प (b) है।
86
‘सुआ’ पर्याय है-
A.तोते का
B.मुर्गे का
C.कोयल का
D.मोर का
Solution
पर्यायवाची शब्द
'सुआ' (सुग्गा) तोते का लोकप्रचलित नाम है; यह संस्कृत 'शुक' से विकसित तद्भव रूप है।
तोते के अन्य पर्यायवाची - शुक, कीर, रक्ततुंड, सुग्गा।
मुर्गे के लिए 'कुक्कुट', कोयल के लिए 'पिक/कोकिल' तथा मोर के लिए 'मयूर/शिखी' प्रयुक्त होते हैं।
इसलिए सही विकल्प (a) है।
87
‘मैंने अपने पूज्य पिताजी को एक पत्र लिखकर यहाँ की स्थिती से अवगत करा दिया है।’ उपरोक्त वाक्य के किस भाग में वर्तनी संबंधी अशुद्धि है?
A.अवगत करा दिया है
B.यहाँ की स्थिती से
C.एक पत्र लिखकर
D.मैंने अपने पूज्य पिताजी को
Solution
वर्तनी अशुद्धि
चारों खंडों को अलग-अलग परखने पर केवल एक में हलंत-मात्रा की गड़बड़ी मिलती है।
'स्थिती' अशुद्ध है - यह संस्कृत का इकारांत स्त्रीलिंग शब्द 'स्थिति' है, जिसके अंत में ह्रस्व 'इ' आती है, दीर्घ 'ई' नहीं।
इसी नियम से गति, मति, रीति-कोटि के शब्द ह्रस्व इकारांत रहते हैं - 'गती', 'मती' लिखना भी अशुद्ध होगा।
शेष खंड - 'मैंने अपने पूज्य पिताजी को', 'एक पत्र लिखकर', 'अवगत करा दिया है' - वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं।
अतः अशुद्धि 'यहाँ की स्थिती से' खंड में है। इसलिए सही विकल्प (b) है।
88
‘अरे भगवान! मेरी रक्षा करो।’ वाक्य-शुद्धि हेतु रेखांकित स्थान पर उचित कारक होगा-
A.से
B.पर
C.हे
D.के लिए
Solution
संबोधन कारक
वाक्य में भगवान को पुकारा जा रहा है, अतः यहाँ संबोधन कारक का चिह्न चाहिए।
संबोधन के मानक चिह्न हैं - हे, अरे, ओ, अजी। इनमें आदरसूचक तथा देवता के लिए प्रयुक्त होने वाला चिह्न 'हे' है; 'अरे' अनादर या आश्चर्य का भाव देता है, इसलिए भगवान के लिए अनुपयुक्त है।
'से' अपादान/करण का, 'पर' अधिकरण का और 'के लिए' संप्रदान कारक का चिह्न है - तीनों ही पुकार का भाव नहीं दे सकते।
शुद्ध वाक्य होगा - 'हे भगवान! मेरी रक्षा करो।'
इसलिए सही विकल्प (c) है।
89
‘गाल फुलाना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
A.गुस्सा करना
B.अधिक खा लेना
C.भूख लगना
D.रूठ जाना
Solution
मुहावरा
'गाल फुलाना' का लाक्षणिक अर्थ है - रूठ जाना, नाराज़ होकर मुँह बना लेना।
प्रयोग - 'ज़रा-सी बात पर बच्चे ने गाल फुला लिए।' यहाँ भाव नाराज़गी दिखाने का है।
'गुस्सा करना' क्रोध के प्रकट होने की बात कहता है, जबकि यह मुहावरा मौन रूठने का भाव देता है; 'अधिक खा लेना' और 'भूख लगना' शब्दों के शाब्दिक अर्थ से भ्रमित करने वाले विकल्प हैं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
90
निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए-
जो चिरकाल तक रहे
A.अस्थाई
B.चिरस्थायी
C.लगातार
D.निरंतर
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
'चिरकाल' = बहुत लंबा समय; जो उतने समय तक टिका रहे, वह 'चिरस्थायी' कहलाता है (चिर + स्थायी)।
'अस्थाई' तो इसका ठीक उल्टा है - जो टिके ही नहीं।
'लगातार' और 'निरंतर' क्रिया के बिना रुके चलने को बताते हैं, अवधि की दीर्घता को नहीं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
91
रिक्त स्थान की पूर्ति तत्सम शब्द से करें-
प्राचीन काल से पानी के घड़ों का निर्माण ____ से होता है।
A.सोना
B.मिट्टी
C.मृत्तिका
D.लोहा
Solution
तत्सम शब्द
तत्सम वे शब्द हैं जो संस्कृत से ज्यों-के-त्यों हिंदी में आए हैं।
अर्थ की दृष्टि से रिक्त स्थान पर 'मिट्टी' और 'मृत्तिका' दोनों बैठते हैं, पर प्रश्न विशेष रूप से तत्सम शब्द माँग रहा है।
'मिट्टी' तद्भव है और उसका तत्सम रूप 'मृत्तिका' है; 'सोना' भी तद्भव (तत्सम - स्वर्ण) है तथा 'लोहा' तद्भव (तत्सम - लौह) है।
अतः तत्सम शब्द 'मृत्तिका' ही है। इसलिए सही विकल्प (c) है।
92
‘आधे से अधिक लोगों की मिलकर एक राय।’ उपरोक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
A.लोकतंत्र
B.बहुमत
C.अल्पमत
D.बहुमूल
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
आधे से अधिक लोगों की एक जैसी राय को 'बहुमत' कहते हैं (बहु + मत = अधिक लोगों का मत)।
'अल्पमत' इसका विलोम है - आधे से कम लोगों की राय।
'लोकतंत्र' शासन-पद्धति का नाम है, राय का नहीं; 'बहुमूल' का यहाँ कोई संबंध नहीं।
इसलिए सही विकल्प (b) है।
93
निम्नलिखित में से किस विकल्प में उभयलिंगी शब्द उपस्थित है?
A.मंद-मंद पवन का चलना अच्छा लगता है।
B.हमारी आकाशगंगा में पुष्कल तारा भी है।
C.प्रत्येक वस्तु का एक निश्चित मूल्य होता है।
D.सभी अक्षर ठीक से लिखे गए हैं।
Solution
उभयलिंगी शब्द
उभयलिंगी वह शब्द है जो पुल्लिंग और स्त्रीलिंग - दोनों रूपों में शुद्ध माना जाता है, जैसे आत्मा, पवन, वायु, ऋतु।
विकल्प (a) में 'पवन' आया है, जो उभयलिंगी है - 'पवन चलता है' और 'पवन चलती है', दोनों प्रयोग मान्य हैं।
(b) का 'तारा', (c) का 'मूल्य' तथा (d) का 'अक्षर' केवल पुल्लिंग में प्रयुक्त होते हैं, इनका कोई स्त्रीलिंग प्रयोग मान्य नहीं।
अतः उभयलिंगी शब्द वाला वाक्य (a) है। इसलिए सही विकल्प (a) है।
94
निम्नलिखित वाक्य के किस खंड में अशुद्धि है?
शत्रु उस पर टूट गए।
A.उस
B.टूट
C.शत्रु
D.गए
Solution
वाक्य-शुद्धि
'टूट पड़ना' एक रूढ़ मुहावरा है, जिसका अर्थ है - एक साथ ज़ोर से हमला कर देना।
मुहावरे का अंश बदलते ही अर्थ बिगड़ जाता है: 'टूट गए' का अर्थ होगा 'खंडित हो गए', जो शत्रुओं के आक्रमण का भाव नहीं देता।
यहाँ 'शत्रु' कर्ता, 'उस पर' कर्म-सूचक पदबंध और 'टूट' मुहावरे का पहला अंश - तीनों ठीक हैं; अशुद्धि केवल अंतिम खंड 'गए' में है, जिसके स्थान पर 'पड़े' चाहिए।
शुद्ध वाक्य - 'शत्रु उस पर टूट पड़े।'
इसलिए सही विकल्प (d) है।
95
दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
आगे बढ़कर स्वागत करना
A.अगुआना
B.अगुआ
C.अग्रगामी
D.अगवानी
Solution
वाक्यांश के लिए एक शब्द
आगे बढ़कर किसी का स्वागत करने की क्रिया को 'अगवानी' कहते हैं - 'बारात की अगवानी की गई।'
ध्यान दें कि प्रश्न क्रिया/भाव माँग रहा है, कर्ता नहीं।
'अगुआ' वह व्यक्ति है जो आगे चले (नेता), और 'अग्रगामी' का अर्थ भी आगे बढ़ने वाला है - ये दोनों व्यक्तिवाचक हैं; 'अगुआना' मानक शब्द नहीं है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
96
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.उपाय
B.कार्य
C.अर्थ
D.उद्देश्य
Solution
गद्यांश रिक्त-स्थान पूर्ति
वाक्य है - 'उत्सवों का एकमात्र ____ आनंद-प्राप्ति है।' यहाँ बताया जा रहा है कि उत्सव किसलिए मनाए जाते हैं, अर्थात् उनका लक्ष्य क्या है।
लक्ष्य या प्रयोजन के लिए उपयुक्त शब्द 'उद्देश्य' है, और 'एकमात्र उद्देश्य' एक स्वाभाविक सहप्रयोग भी है।
'उपाय' और 'कार्य' साधन बताते हैं, लक्ष्य नहीं; 'अर्थ' यहाँ 'मतलब' का भाव देकर वाक्य को उलझा देता है।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
97
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.प्राप्ति
B.पूर्ण
C.पूर्ति
D.पूरा
Solution
गद्यांश रिक्त-स्थान पूर्ति
रिक्त स्थान 'आवश्यकता की ____ होने पर' में है - 'की' के बाद स्त्रीलिंग संज्ञा ही आ सकती है।
'पूर्ण' और 'पूरा' विशेषण हैं, इसलिए व्याकरण की दृष्टि से ही अनुपयुक्त हैं।
'प्राप्ति' और 'पूर्ति' दोनों स्त्रीलिंग संज्ञाएँ हैं, पर 'आवश्यकता' के साथ रूढ़ सहप्रयोग 'आवश्यकता की पूर्ति' है - और यही प्रयोग गद्यांश की पिछली पंक्ति में भी आया है।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
98
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.आवश्यकता
B.रास्ता
C.महत्ता
D.चीज
Solution
गद्यांश रिक्त-स्थान पूर्ति
वाक्य है - 'अब उसके लिए कोई ____ नहीं रह गई है।' क्रिया 'रह गई है' स्त्रीलिंग है, अतः रिक्त स्थान में स्त्रीलिंग संज्ञा ही आएगी; इससे पुल्लिंग 'रास्ता' और 'चीज' के साथ आने वाला भाव-मेल टूट जाता है।
पूरे गद्यांश का विषय ही आवश्यकता और उसकी पूर्ति है, तथा अगली पंक्ति 'एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है' इसी क्रम को आगे बढ़ाती है।
'महत्ता' स्त्रीलिंग तो है, पर प्रसंग महत्त्व का नहीं, अभाव का है।
अतः रिक्त स्थान में 'आवश्यकता' उपयुक्त है। इसलिए सही विकल्प (a) है।
99
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.स्थायी
B.संतोषप्रद
C.पूर्ण
D.क्षणिक
Solution
गद्यांश रिक्त-स्थान पूर्ति
वाक्य का उत्तरार्ध स्वयं कारण बताता है - 'क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है।'
जो सुख तुरंत समाप्त हो जाए, वह 'क्षणिक' कहलाता है; लेखक इसी क्षणभंगुरता के आधार पर उसे उत्सव के स्थायी आनंद से अलग बता रहा है।
'स्थायी' ठीक विपरीत अर्थ देकर वाक्य के 'क्योंकि' वाले तर्क को ही काट देता है; 'संतोषप्रद' और 'पूर्ण' भी इसी कारण असंगत हैं।
इसलिए सही विकल्प (d) है।
100
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
A.संतोष
B.सुख
C.आनंद
D.दुःख
Solution
गद्यांश रिक्त-स्थान पूर्ति
गद्यांश आरंभ से ही 'सुख' और 'आनंद' में अंतर कर रहा है - सुख आवश्यकता-पूर्ति से मिलता है और क्षणिक होता है, जबकि आनंद उत्सव की देन है।
अंतिम वाक्य उसी विचार का निष्कर्ष है, अतः 'विशुद्ध ____' में वही शब्द आएगा जिसे लेखक उत्सव से जोड़ता है - 'आनंद'।
'सुख' रखने पर लेखक का पूरा भेद ही मिट जाता है; 'संतोष' और 'दुःख' प्रसंग से बाहर हैं।
इसलिए सही विकल्प (c) है।
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